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  • 17 hours ago

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00:00अरे अब सुन्दर खुबसूरत बीवी की चाह किसे नहीं होती
00:05लेकिन क्या हो जब बीवी की खुबसूरती ही पती के लिए सरदर्द बन जाए
00:11देखिए जरा
00:12चलो न कहीं घूमने चलते हैं
00:15हमारी शादी को इतने महीने हो गया है
00:17और हम दुनों कहीं घुमने नहीं गए
00:20बाहर तक नहीं निकलने देती हो
00:22जलो न
00:23अब आज नहीं फिर कभी चलते हैं
00:26आज ना मुझे बहुत काम है
00:28वसे तुम्हें कितनी बाहर बोला है
00:30गर से बाहर जाने का ना सोचा करो
00:32तुम नहीं जानती दुनिया कैसी है
00:34तुमसे जब भी कहीं घुमने जाने के लिए बोलती हो
00:38तुम यहीं बोलती हो
00:39अरे तो फिर कभ चलेंगे
00:42और कैसी है दुनिया यह देखूंगी नहीं तो पता किसे चलेगा
00:45स्कूल से निकली ही थी
00:47कि पापा ने बालिग होते हुए भी शादी करवा दी
00:50कहीं जाने को को तो कहते थी दूले की साथ जाना
00:54और अब दूला भी ऐसा ही मिला है
00:57पत्नी को रोता देख पती को दया आ जाती है
01:02सच में आज बहुत थक्या हो
01:05ऐसा करता है कल चले है
01:07चीक है लेकिन कल के बाद कोई बहाना नहीं
01:12समझे न
01:13पती परेशान रहता है
01:15सोचता है बला की खुबसूरत बीवी को अगर बाहर ले जाएगा
01:19और कहीं दुन्या की नजल लग गई तो
01:22और ये कोई मीरी बीवी को बहला कर मुझसे दूर कर देगा तो
01:25तो क्या
01:27अगले दिन दोनों पती पत्नी गुम ले जाते हैं
01:31तो उन्हें कुछ आस पर उसकी औरते देखती है
01:34अरे आज दीपक और उसकी लोगाई की सवारी कहा जा रही है
01:39अरे आज तो गली में चांद निकलाया
01:43वो भी दिन में
01:44और कहा गुमने जा रहे है
01:48शादी हुए इतने महीने हो गया है
01:50तो सुचाज एक साथ गुमने चले
01:52क्यों गलत है क्या उसमें
01:55अरे इतनी सुंदर बीवी के होते हुए
01:58कोई कैसे गुमने न जाए
02:00आखर पूरे गाउं को भी तो दिखाना है
02:03कि गाउं की सबसे खुबसूरत बीवी मेरी है
02:06क्यों दीपक सही कहाना
02:08नई ने काकी यह से कोई बात नहीं है
02:11कौन अपनी बीवी के खुबसूरती के नुमाईश करता है
02:14एरे तो क्या हुआ अगर वो सबको दिखाना चाता है
02:18वैसे भी हैर आदमी की किसमत थोड़ी न होती है
02:21दीपक के किसमत जैसी
02:22के सबसे खुबसूरत लड़की उसकी बीवी बन जाए
02:25काकी ऐसा ना बोलो
02:28मैं जितनी खुबसूरत हुना
02:29मेरा दीपक उतना ही समझदार और सिल्चा हुआ है
02:33उसने मुझसे शादी मेरे खुबसूरती देखकर थोड़ी न की थी
02:36अपने लिए मेरा प्यार देखकर किया
02:39क्यों दीपू सिच का आनम मैंने
02:42हाँ अब दलकुष सच मेरी बुल बुल
02:44कुछ दिनों बाद पती अपने दफ्तर काम पर जाता है
02:49मैंने सुना है वो अपना दीपक नहीं है
02:52उसकी शादी हमारे गाओं की सुन्दरी कॉमा से हुई है
02:56क्यों सची ऐसी बाद है तो दीपक की तो लाटरी लग गई
03:01अरे क्या किसमत है उस लड़के की
03:03इतनी अच्छी नौक रही और घर में सुन्दर सी छोक रही
03:07अरे लड़के कि दो लाइफ सेट है
03:09किसमत चमा गई है दीपक की शादी के बाद से
03:13अरे कैसा ना चमके सब कॉमल की वज़स है
03:16नहीं तो तुम्हे लगता उसे कोई पूछता भी होगा
03:19यह तो सही का
03:21जिसकी बीबी कॉमल जैजी हो
03:23उससे कौन बात नहीं करना जाएगा
03:26अरे पता नहीं कब हमें बुलाएगा खाने में
03:30दीपक अपने साथ काम करने वालों की बाते दूर से सुन रहा था
03:36उसे अजीब सा फीर होता है कि लोग उसके बारे में क्या क्या बात कर रहे है
03:40बात तो सही है
03:42कल तक मेरे घर क्या मुझसे बात भी कोई नहीं करना चाता था
03:46लेकिन जब से शादी हुई है
03:48हर किसी को दीपक के घर आना है
03:50उसे अपने घर बुलाना है
03:52यार मेरी पहचान के मेरी बीवी से ही रह जाएगी
03:56शाम को
03:58सुनो नो दीपक बाजार चलते हैं
04:02वो कुछना घर का सामान लाना था
04:04मैं अभी तयार होकर आती हूँ
04:06क्यों तयार ही तो
04:07और कितना तयार होगी
04:09और क्या है जाब देखो बार भागने की लगी रहती है
04:12क्यों
04:13मुझे टाइम नहीं है तुम खुदी चले जाना
04:16दीपक का रवया
04:18अब तो बीवी के लिए इतना अगंदा हो जाता है
04:20कि उसकी बीवी परिशान सी रहने लगती है
04:22कुछ दिनों बाद
04:24सुनो दीपक
04:26मेरी माँ बहुत बिमार है
04:28मैं सुश्री थी अगर कल तुम मुझे
04:30मेरी माँ की वहाँ छोड़ आती तो
04:32वैसी भी अब मन नहीं लगता मेरा इस घर में
04:36न जाने तुम्हें क्या हो गया है
04:37हाँ बेटा
04:39कल ऐसा कर बहु को उसके माए के छोड़ा
04:42आजकल बहु काफी गुमसुमसी रहने लगी है
04:45बच्ची ही तो है
04:46और तु भी तो वक्त नहीं देता
04:48लेकिन माम
04:50मुझे काम है
04:51मुझे दफ्तर भी जाना है
04:52और क्या जरूरते वहाँ जाने की
04:54क्या तेरा काम बहु से ज्यादा जरूरी है
04:58क्या हो गया है बेटा
05:00क्यों तू ऐसा हो गया है
05:02तू तो ऐसा नहीं था
05:04कितना खुश था बहु से शादी करने के लिए
05:06अब क्या हो गया
05:08हाँ दीपक
05:09मैं कुछ दिनों से देख रहे हूँ
05:11तुम कुछ अचीब सा बरताओ कर रहे हो
05:13क्या हुआ
05:15मुझसे कोई गलती हुई है
05:16जिसका तुम्हें बुरा लगा है
05:18अरग मुझे क्या हो गया
05:20और मैं कांसर जरूरी हूँ
05:21तो मुझे कुछ और उसका किसी पर असर पड़े
05:24कोई बात नहीं है
05:25मुझे बस टाइम नहीं है
05:27तुम खोदी अपने माईके चली जाओ
05:28और अब मैं इस बारे में किसी से बात नहीं करना चाता
05:32पता नहीं क्या हो गया है इस लड़के को
05:35पहले तो यह ऐसा नहीं करता था
05:37वही तो मा जी मुझे भी समझ में नहीं आ रहा
05:41कि यह ऐसे क्यों बात कर रहे है
05:43पहले तो कभी यह इतनी छुटी-छुटी बातों पर
05:46घुसा नहीं करते थे
05:47अगले दिन बीवी अपने माईके के लिए
05:50निकल रही होती है
05:51कि वो पती से मिलने उसके दफ्तर जाती है
05:54पता नहीं शायद आफिस में कोई प्रॉब्लम हो
05:57मासे मिलने तो जा रही हूँ लेकिन एक बार इन्हें बता देती हूँ
06:02कल से तो बात भी नहीं किये है इनोंने
06:05बीवी जैसे ही ऑफिस में जाती है सभी उसे देखने लगते हैं
06:09तब ही वो पती के कैबिन में जाती है जहाँ
06:12अब तुझे क्या हो गया तू अपनी बीवी से बात क्यों नहीं कर रहा
06:17बला कोई अपनी इतनी सुन्दर बीवी से नाराज रह सकता है क्या
06:21वही तो, तु हमें बता जो भी बात है, हम तेरी मदद करेंगे
06:25और क्या मदद करोगे, जब परेशानी की जड़ ही मेरी बीवी है
06:29ये सुनकर बीवी के पैर के नीचे से जमिन खिसक जाती है
06:34लेकिन वो कैसे, तेरी बीवी तो सुन्दर है और तुझसे बहुत प्यार भी करती है
06:39तो परेशानी कैसी?
06:41उसके एक खुबसूरती ही तो परेशानी है
06:43मैं जब भी उसके साथ कहीं जाता हूँ ना
06:46तो लोग मुझे ऐसे देखते हैं जैसे पता नहीं क्या देख लिया हो
06:49शुरू शुरू में तो मुझे अच्छा लगता था
06:52लेकिन जब लोगों के मन की बात जानी ना कि असली बात क्या है
06:56तब मुझे बहुत बुरा लगा
06:57लोग मेरे बारे में एक ही चीज़ सोचते हैं
07:00कि मेरी कितनी अच्छी किस्मत है
07:02मुझे कोमल जैसी खुबसूरत बीवी मिली
07:05लोगों को यकीन नहीं होता
07:06कि मेरे जैसे को कोमल जैसी बीवी मिल सकती है
07:09लोगों को ऐसा लगता है कि मैं कोमल के लायक नहीं
07:12मैंने कोमल को फसाया है
07:14साब जगा बस कोमल कोमल कोमल
07:16कोमल के आगे तो मेरा कोई वजूद कोई पैचान ही नहीं है
07:19अगर कोमल मेरी बीवी नहीं होती न
07:22तो आज मेरी जिंदगी ऐसी नहीं होती
07:24मुझे कभी कभार ऐसा लगता है
07:27जैसे मैंने अपने जिंदगी में कभी मैनत ही नहीं करी
07:30साब काम कोमल की खुबसूरत ही नहीं करा है
07:33मेरी मैनत की तो कई बात ही नहीं आती
07:35कोमल पती की बात सुनकर रोने लगती है
07:39तभी उसके दोस्त की नजर कुमल पर पढ़ती है
07:41अगर सारी परिशानी की जड़ मैं ही हूँ
07:45तो मैं अपना चेरा प्लास्टिक सर्चरी से खराब करवा लेती हूँ
07:49हाँ हाँ यही ठीक होगा
07:50और अच्छा ही हुआ तुमने सुन लिया
07:52वनना मैं तुमें यह सब कभी नहीं कह पाता
07:55कुमल वहाँ से जाने लगता है कि
07:58रुकिये बावी कैसी बात करें आप
08:01सभी दोस्त मिलकर पती को समझाते हैं और फिर
08:05मुझे माफ कर दो
08:07पती के लिए पतने की तारिफ और पतने के लिए पती की तारिफ ही
08:12असली सफलता है
08:14मुझे माफ कर दो
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