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  • 3 months ago

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Transcript
00:00ना जुकने वाली बहू
00:01करिश्मा के ससुराल वालों को वैसे तो करिश्मा से कोई परिशानी नहीं थी
00:06क्योंकि उसमें कोई बुरी आदत नहीं थी
00:09लेकिन एक आदत थी जो अच्छी नहीं थी
00:12और वो ये थी कि करिश्मा कभी किसी की कोई बात नहीं मानती थी
00:16लेकिन अगर उसे अपनी कोई बात मनवानी हो तो जिद पर अड़ जाती थी
00:21करिश्मा का पती अविनाश और करिश्मा के सास ससूर
00:25सब इस बात से बहुत परिशान थे
00:27अविनाश मुझे कुछ शॉपिंग करनी थी
00:30आज शाम को चल्दी फ्री होकर घर आ जाना
00:33करिश्मा इस वेक्ट मेरे पास बहुत काम है
00:36हम शॉपिंग के लिए अगले हफते चलते हैं
00:39नाई मुझे आज ही शॉपिंग के लिए जाना है मतलब जाना है
00:43करिश्मा मैंने कहा ना मेरे पास आफिस का बहुत काम है
00:47मैं नहीं चल पाऊंगा
00:48मैं कुछ नहीं जानती, अगर आप मेरे साथ शॉपिंग करने के लिए नहीं गए, तो मैं अपनी माई की चली जाओंगी, और तुम्हारी ममी की तपियत पहले से ही खराब है, सोच लो, कौन ध्यान रखीगा उनका?
00:58अरे बेटा, तुम कभी तो अपने पती की बात सुन लिया करो, एक हफते में क्या बिगड़ जाएगा?
01:07मैंने कह दिया, सुब कह दिया, मैं जुकूंगी नहीं
01:10शाम को अविनाश करिश्मा को शॉपिंग के लिए लिकर जाता है
01:14अविनाश, मुझे ये ड्रेस बहुत पसंद आ रहा है
01:17अरे, लेकिन ये पूरे बीस हजार का है
01:20तो क्या हुआ, मुझे ड्रेस पसंद ने और मुझे लेना है
01:24करिश्मा, इस बार बज़ेट थोड़ा गड़बड हो गया यार
01:27अगले मैंने तुम ये ड्रेस ली लेना
01:29कभी तो अपने जिद छोड़ दिया करो ना डालेंग
01:32मैं यही ड्रेस लूँगी, कहा ना मैं छुकूंगी नहीं
01:36कुछ दिनों के बाद
01:38करिश्मा बिटा, अविनाश के मामा जी हमारे घर आ रहे है
01:43देखो, हमारे सामने तो तुम कैसे भी कपड़े पहन लेती हो
01:47लेकिन उनके सामने बस एक दिन के बाद
01:49पिटा, साड़ी पहन लेना हा
01:51अरे, अविनाश के मामा जी आ रहे हैं
01:55तो मैं क्यों साड़ी पहन हूँ?
01:56करिश्मा, हम सब तुम्हारी बात मान लेते हैं ना
02:00कभी तुम भी तो हमारी कोई बात मान लिया करो
02:02कितनी बार कह चुकी हूँ, मैं जुकूंगी नहीं
02:06अगले दिन
02:08अरे, अविनाश, हमारे घर के बहु है, तो साड़ी पहन कर रहती है
02:13तुम्हारी बहुत पजामा टी-शिर्ट पैन कर गूम रही है
02:17अब क्या बता है, बहुत समझाने की कोशिश की
02:20लेकिन किसी की बात नहीं सुनती, हर बात पर कहती है
02:25मैं जुकूंगी नहीं
02:27बाब बहुत करने की कोशिश करता हूँ
02:30अरा करिश्मा बेटा, जरा इधर तो आओ
02:33जी मामा जी, बताइए क्या हुआ
02:36अर वैसा तो तुम बहुत प्यारी हो बेटा
02:39लेकिन तुम्हें इतना तो पता होगा ना
02:42कि कोई बड़ा घर आता है तो उसके पैर चुने चाहिए
02:44देखिए मामा जी, मैं किसी के आगे जुकती नहीं
02:50दल से सब की रिस्पेक्ट करती हूँ
02:52मैं जुकूंगी तो बिलकुल भी नहीं
02:54सुन लिया आपने मामा जी
02:57समझा समझा कर ठक गय हम किसी की नहीं सुनती
03:00कुछ दिनों की बात
03:02मामी जी, आज मेरी सहली ने
03:05मुझे किसी जरूरी काम से बलाया था
03:06तो आज अविनाश के लिए खाना आप बना देना
03:09ठीक है बिटा, कोई बात नहीं
03:11मैं बनातूंगी खाना
03:13तुम्हारा आम से अपनी सहली से मिलकर आ जाओ
03:15कोई बात नहीं
03:17जो भी काम है करके आओ, ठीक है
03:19ठांकियू बामी जी
03:21अरे ममी, करिश्मा आपकी कोई बात नहीं सुनती
03:25और आपने कितनी आसानी से उसकी बात मान ली
03:27इस घर में सब उसकी बात मानते हैं
03:30लेकिन वो किसी की बात नहीं सुनती
03:31बात तो तुम्हारी चीक है बेटा लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं
03:36जब भी उसे समझाते हैं बस एक ही बात कहती है
03:39मैं जुकूंगी नहीं
03:40तो मम्मी आपको भी उससे कहना चाहिए था ना
03:43घर का खाना बना कर जाए
03:45आपको भी उसकी बात नहीं सुननी चाहिए थी
03:47अरे बेटा बहु है वो मेरी
03:49अब क्या मैं उसके बराबर ही करूँगी
03:52और तुम्हारे लिए ही तो खाना बनाना था
03:55कोई बात नहीं बेटा
03:56कुछ महिनों के बाद
03:58बहु अविनाश का प्रमोशन होने वाला है न
04:02पंडिजी ने कुछ कहा था मुझसे
04:04क्या कहा था ममी जी
04:06पंडिजी कहा रहे थे कि
04:09अविनाश की पतनी चार सोमवार का वरत रख है
04:11इस बार उसका प्रमोशन पक्का है
04:14लेकिन ममी जी मुझसे तो भूखा रहा है नहीं जाता
04:17मैं कैसे वरत करूँगी
04:19अरे बेटा तु फल खा लेना
04:21बस एक टाइम का वरत रख अविनाश की तरक्की के लिए
04:26लेकिन ममी जी आप भी तो वरत रख सकती है ना
04:30वो आपका भी तो बेटा है
04:32अरे समझने की कोशिश करो बहू
04:35पंडिजी ने तुम्हें ही वरत रखने के लिए कहा है
04:38वन्ना मैं तो कब का खर लेती
04:39नई ममी जी मैं आपकी बात मानने को तयानी हो
04:43अरे बेटा कभी कोई बात सुन भी लिया करो
04:46तुम तो कोई बात नहीं मानती मेरी
04:49ममी जी मैंने कह दियाना कि मैं वरत नहीं करूंगी
04:53तो नहीं करूंगी
04:53कैय तो चुकी हूँ कई बात कि मैं जुकूंगी नहीं
04:57करिश्मा अपने परिवार में किसी की कोई बात नहीं सुनती
05:01वो किसी की बात सुनकर उसे मानने के लिए तयार ही नहीं होती
05:05कुछ दिनों की बार करिश्मा अपने पती अविनाश के साथ घूमने जाने का प्लान मनाती है
05:10ममी जी मैं और अमिनाश दो दिन के लिए बाहर घुमने जा रहे हैं
05:15आपको कोई आतरास सुनिए न
05:17अरे नहीं नहीं पेटा मुझे क्या परिशानी होगी
05:20आराम से घुम कर आओ
05:21वैसे कब निकलने वाले हो
05:23ममी मैं तो करिश्मा से कहा रहा था कि
05:26सुबह के वक्त निकलता है ताकि शाम होते होते पहुँच जाए
05:29नाए मुझे रात को ट्रवल करने में बहुत मजाता है
05:33और अब तो हम रात को ही जाएंगे
05:36लेकिन बेटा, खुट की गाड़ी से रात के वक्त ट्रावल करना खतरनाक हो सकता है
05:41क्या फाइदा दिन में चली जाओ
05:43वही तो मैं करा हूँ ममी, लेकिन ये सुनती ही नहीं
05:47मैंने कहा न, मुझे सिर्फ रात में ही ट्रावल करना है
05:50और गाड़ी भी तुम ही चलाओगे
05:52बेटा, इस बार तो तुम्हें ये बात मानने ही होगी
05:57ये तुम्हारी सुरक्षा का सवाल है
06:00मैंने कह दिया न, हम रात में ही जाएंगे
06:03और मैं इस बात के लिए जुकूंगी नहीं
06:06करिश्मा के जिद के आगे अविनाश की एक नहीं चलती
06:10और वो दोनों रात को गाड़ी लेकर शहर से बाहर जाने के लिए निकलते हैं
06:14रास्ते में अविनाश की गाड़ी खराब हो जाती है
06:17तबी वहाँ पर चार-पाच गुंडे पहुच जाते हैं
06:20इतने रात को अपण बीवे का लेकर कहाँ डेहलने निकला है बाहसाब
06:26अरे शेरा वक्त का दो खयाल किया होता
06:28का इतनी रात को अपनी बीवे को घुमाने चले हो
06:32देखो हम शरीफ लोग हैं
06:35हमें जाने दीजिये
06:37अरू लेकिन हम तो शरीफ लोग नहीं है न
06:39अपनी मैडम से बलो
06:41अपने गले का हार और ये सोने की चुड़िये चिप चाप उतार कर दे दे
06:44मैं तुम्हे कुछ नहीं देने वाली
06:46जाओ यहां से
06:47आए बड़ी चुड़िया लेने वाले
06:49अपने पती को जिन्दा देखना चाहती हो
06:53तो चुप चाप ये चुड़िया और हार उतार कर देदो
06:56वरना याज बचेगा नहीं
06:58करिश्मा अगर तुम्हें मेरी और अपनी जान प्यारी है
07:01तो अपने गहने उतार कर प्लीज इन गुंडों को देदो
07:04ए गुंडा किसको बोला रहे हाँ
07:08मेरा मतलब करिश्मा अपने गहने उतार कर इन भाई साहब को देदो
07:15मैं अपने गहने किसी को नहीं दोंगी
07:18दूसरा गुंडा चाको निकाल कर अविनाश के गले पर रंग देता है
07:21अब भी नहीं दोगी तो तुमारे पती की गर्दन धर से अलग हो जाएगी
07:26सोच लो
07:27अरे ऐसे कैसे तुमारे कहने से कुछ हो जाएगा
07:29मैंने कह दिया सो कह दिया
07:31मैं अपने गहने नहीं देने वाली
07:33मैं किसी के आगे जुकूंगी नहीं
07:35करिश्मा ये तुमारे घर वाले नहीं है
07:38जो तुम्हारे जुकूंगी नहीं के अनसे चुपचाप बैठ जाएंगे
07:40ये मुझे सीधा उपर पहुचा देंगे
07:43लेकिन अगर मैंने इन लोगों की बात मान ली तो मैं जुक जाओंगी न
07:47अरे तो क्या परिशानी है
07:49तुम्हारे जुकने से अगर मैं जिंदेगी पर सीधा खड़ा रह सकता हूँ
07:52तो क्या प्रॉब्लम मैं? दे तो अपने गेने
07:55करिश्मा रोते हुए अपने गेने उतार कर उन गुंडों को दे देती है
07:59गुंडे गेने लेकर महा से भाग जाते हैं
08:01करिश्मा और अविनाश वापस अपने घर पांचते हैं
08:31करिश्मा तुम मुझे सारी बात साफ साफ बताओ
08:34करिश्मा अपने और अविनाश के साथ हुआ सारा किस्सा अपनी सास को सुनाती है
08:39बहु घर में तो तुम हमारी कोई बात मानती नहीं सुनती नहीं
08:45लेकिन तुमने गुंडों के सामने भी अपनी जिद चलाई
08:48कमाल कर दिया भई
08:49तो क्या करती मम्मी जी
08:51वो मेरे गहने चीन रहे थे ना
08:54और गहने नहीं देती
08:55तो वो तुम्हारा पती चीन लेते
08:57उसका क्या
08:57लेकिन मैं उनके बाद कैसे मान लेती
09:00मैं कैसे जुक जाती
09:02अब भी तो जुकना पड़ा ना
09:05क्योंकि उन लोगों ने तुम्हारे साथ
09:06जबर्दस्ती की
09:07नहीं तो मैं उनसे कह देती
09:11मैं जुकूंगी नहीं
09:13आरा ठीक है ठीक है पभू
09:14तुम्हें नहीं जुकना मत जुको
09:16लेकिन देखो तुम दोनों बहुत डरे हुए
09:18और ठके लग रहे हो अभी जाकर
09:20अपने कमरे में आराम करो और रात को
09:22पिक्निक पर जाने की कोई ज़रुवत नहीं है
09:24चीक है मम्मी जी
09:26अभी तो मैं आराम करने जा रही हूँ
09:28मैं एक बार गुंडो के आगी
09:30जुक गई उनकी बात मान ली
09:32और अपने गैने दे दिये
09:33लेकिन याद रखीगा
09:35इस घर की चार दीवारी के अंदर
09:37तो मैं कभी भी
09:38मेरा मतलब कभी भी मैं जुकूंगी नहीं
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