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  • 6 months ago

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Transcript
00:00खानपूर नामक एक सुन्दर गाव में मोहन, राजेश नामक दो दोस्त रहते थे
00:07वो दोनों दोस्त उसी गाव में इंद्रा नामक एक आदमी के लौरियों को चलाते हुए ड्राइवर का काम करते थे
00:16एक दन सुबह वो दोनों ड्राइवर उनके मालिक के पास जाते हैं
00:30और फिर घर देर रात गये थे, इसलिए देर रात से सोय और सुबह भी देरी से ही उठे, और अब यहाँ आने में देर लग गई, आरे हम इसके लॉरी ड्राइवर है तो क्या हो गया, इसके सारे सवालों का जवाब देना होगा, क्या, एक ना एक दिन इसके लॉरी लेकर वा�
01:00मोहन यार, कितने दिन हम ऐसे ही हमारे मालिक की बात सुनते हुए,
01:30उसके लिए समान कुछ शहर पहुचाते हुए रहेंगे
01:32उसके सवालों का जवाब देते हुए ऐसे कितने दिन चलेगा
01:36हमें हमारे मालिक के पास इमानदारी से काम करना होगा
01:41और खुद से लौरी खरीदने के लिए पैसे जमाना होगा
01:46तब तक हमें यही काम करना पड़ीगा और मालिक के सवालों का जवाब भी देते रहना होगा
01:51मोहन ऐसे जमा के लौरी खरीदने की क्या ज़रूरत है अब तो हमारे पास दो दो लौरी है ना
01:59बस इनी लौरीों को हमारे पास रखे मालिक के पास वापस नहीं जाते हैं
02:03तो बस यही शहर में रहेंगे और अपना खुद का काम करेंगे।
02:08क्या बात कर रहे हो राजिश तुम।
02:11ऐसे हम बेइमान काम थोड़ी करेंगे।
02:13हम पे भरोसा रखे हमारे मालिक ने हमें काम सौम दिया है।
02:17उन्हें ऐसे दोका नहीं दे सकते हम।
02:20हमें बहुत मेहनत करके पैसे कमाना होगा और उसी से खुद की लौरिया खरीदेंगे हम।
02:26इसलिए ऐसी बात आइंदा कभी मत करना मेरे साथ।
02:29च्छा, मुझे बोलना ही नहीं था मोहन को ये सब।
02:32अब इसके कहे के प्रकार तो मैं नहीं कर सकता।
02:36उजे खुद से लौरी खरीदने तक इंतजार ही नहीं होगा।
02:39इसलिए मोहन को बिन बताए इस लौरी को मैं जब वापस शहर ले जाओंगा, वहां से वापस घर नहीं जाओंगा।
02:46और मैं शहर में आराम से जी सकता हूँ।
02:49अहां ठीक है मोहन, आइंदा से कभी नहीं सोचूंगा।
02:53जैसा तुमने कहा, वैसी हम दोनों एक नएक दिन हमारा खुद का लौरी खरीदेंगे।
02:59ठीक है, चलो यहां से चले जाते हैं।
03:03यह कहने पर वो दोनों मिलकर लौरी को चलाते हुए, उनकी गाम वापस चले जाते हैं।
03:10अगले दन सुबह, दोनों दोस्त लौरी के पास जाते हैं।
03:16मोहन, आज रस्ते में मेरा एक छोटा सा काम है, इसलिए तुम शहर चले जाओ, मैं वो काम खतम करके सामान को शहर में पहुचा दूँगा।
03:26ठीक है राजिश, मैं चला जाओंगा, तुम अपना काम खतम करके आ जाना।
03:30यह कहके मोहन वहाँ से लौरी चलाते हुए चले जाता है।
03:35भगवान का शुक्र है कि मोहन ने मेरा जूट मान लिया, अब मुझे किसी को दिखे बिना यहां से लौरी लेकर बस शहर भाग जाना होगा।
03:44यह सोचकर वो लौरी को लेकर वहाँ से चले जाता है।
03:48मोहन शहर जाकर लॉरी में से समान उतार कर राजिश का इंतजार करते रहता है
03:53उसका पूरा दिन राजिश के इंतजार करने में ही चला जाता है
03:57ये क्या सुबह भी हो गए पर राजिश तो यहां नहीं आया
04:01कहीं मुझे बताए बिना वो चला तो नहीं गया लौरी के साथ
04:05अब अगर मैंने ये बात हमारी मालिक को बता दिया
04:08तो वो पुलिस के पास जा सकते हैं
04:11इसलिए मुझे उन्हें बताए बिना अपने दोस्त को ढूनना होगा
04:15ये फैसला करके वो उसका लौरी लेके अपने दोस्त को ढूनने लग जाता है
04:21पूरा दिन वो अपने दोस्त को ढून के शाम को बहुत ठक जाता है
04:26और वही एक दुकान के पास जाकर बैठ जाता है और इधर उधर देखने लगता है
04:31इतने में उसका दोस्त उसके बगल वाले दुकान में लौरी को रोक कर खाते हुए दिख जाता है
04:38और तब मोहन उसके पास जाता है
04:40राजिर तुम मुझे ऐसे बताये बिना हमारे मालिक को धोका देकर उसके ही लौरी को लेकर ऐसे चले जाओगे
04:49ये मैंने कभी नहीं सोचा था
04:51क्यूं तुमने ऐसे किया
04:52औह शहर में रहने की कारण इसने मुझे ढून निकाला
04:57अब जब इसने देख लिया तो मुझे कुछ न कुछ बहाना बनाना ही होगा
05:00और इसके साथ मालिक के पास जाना होगा
05:03इस बार मुझे कुछ भी करके इतना दूर चला जाना होगा
05:08कि मेरा दोस्त भी मुझे ढून नहीं पाए
05:10मोहन मैं कहीं नहीं चला गया
05:13लौरी में समान लिये हुए जब मैं शहर की ओर जा रहा था
05:16तो बीच रस्ते में चोर आये थे मेरे सामने
05:19और मुझे उनके साथ ले गए
05:21बहुत मुश्किल से मैं उनसे बच पाया हूँ
05:24लौरी में जब वापस आ रहा था
05:26तो बहुत भूक लगने की कारण मैं यहां रुका
05:29और अभी खाने लगा बस
05:31मुझे तो इसके बातों का यकीन ही नहीं हो रहा
05:35अपसे मैं इसके जितना करीब रहूं उतना अच्छा है
05:39वरना इस बार भी यह लौरी लेकर वापस भाग जाएगा
05:42और इस बार तो यह शहर में नहीं रहेगा
05:45बहुत तूर चला जाएगा
05:47ठीक है राजिश जो हो गया सो हो गया
05:50चलो भी घर चले जाते
05:51यह कहने पर दोनों मिलकर उनके लौरी को लेकर घर के और बढ़ जाते हैं
05:58तब से मोहन उसके मालिक के पास काम करके आई हुए पैसों को बहुत ध्यान से जमाता है
06:04और फिजूल की खर्च बिलकुल नहीं करता है
06:07और इतना ही नहीं वो हर वक्त उसके दोस्त के साथ रहता है ताकि वो कही भाग न जाए
06:13लेकिन दूसरी तरफ राजिश उसके वेतन को बहुत लापरवाही से खर्च कर देता है
06:19और किसी को बताय बिना लौरी को ले जाने के बहुत कोशिश करता था
06:24ऐसे बहुत साल बीच जाते हैं
06:27एक दिन जमा किये हुए पैसों को इखटा करके मोहन एक अपना खुद का लौरी खरीदता है
06:34और उस लौरी को खुशी से उसके मालिक के पास ले जाता है
06:37साब वो मैंने एक नया लौरी खरीदा है खुद का
06:42अपसे मैं आपके पास काम के लिए नहीं आ पाऊंगा
06:45मुझ पे भरोसा रखके काम देने के लिए मैं आपके आभारी हूँ
06:49आप ही की प्रोचाहन से ये सब हो पाया है
06:52अरे मोहन मेरे पास ड्राइवर के काम करके तुम अब खुद का एक लौरी खरीद पाए हो
06:59इस बात का मुझे बहुत खुशी है
07:01ये सुनने के बाद मोहन उसके मालिक के पास से लौरी लेकर उसके दोस्त के पास जाता है
07:07राजिश मैं अपने बचट के पैसों से खुद का एक लौरी खरीद पाया हूँ
07:12कम से कम अप से ये बे इमान के काम छोड़ दो
07:16और इमानदारी से काम करके बिना किसी को धोका दिये
07:20पैसे बचा कर खुद का एक लौरी खरीदो
07:23तब तुम्हें किसी ओर के नीचे काम करने की कोई ज़रूरत नहीं पड़ेगी
07:27मेरे दोस्त ने ये बात तो सची कही है
07:30अपसे मैं किसी को धोका देने की सोच नहीं रखूंगा
07:34मैं भी अपने दोस्त की तरह अपने पैसों को बचाऊंगा और खुद का एक लौरी खरीदूंगा
07:39ये फैसला करके अपसे राजेश उसके मालिक के पास इमानदारी से काम करता है
07:45और उसके पैसे बचाकर खुद का एक लौरी खरीदता है
07:49मोहन का भी खुद का एक लौरी रहने के कारण वो एक भी दिन खाली नहीं रहता है
07:55और हमेशा मेहनत करते हुए खुशी से जीता है
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