Skip to playerSkip to main content
  • 5 months ago

Category

😹
Fun
Transcript
00:00विश्णुपुरम नामक एक सुन्दर गाव में शरत और श्रीदर नामक दो दोस्त अगल बगल घरों में रहते थे
00:10शरत एक अच्छा आदमी था और दूसरों की सहायता करता था
00:15श्रीदर बहुत लालची था
00:18वो दोनों रिक्षा चलाते हुए खुशी से जी रहे थे
00:30एक आदमी शरत के पास जाता है
00:31सुनिए बस्टान को आओगे
00:34ये क्या? वो आदमी रिक्षा के लिए मेरे पास नहीं आया
00:38बलकि मेरे दोस्त के पास गया
00:40कुछ भी करके मुझे ही उस आदमी को बस्टान तक लेके जाना होगा
00:44अरे आये ना
00:46बस्टान तक मैं आपको लेके जाओंगा भाई सब, मेरी रिक्षा चड़िये।
00:51श्रीदर के ऐसे कहने पर वो आदमी उसका ही रिक्षा चड़ता है।
00:56उसके बाद श्रीदर उस आदमी को लेकर बस्टान के और बढ़ने लगता है।
01:01आरे मेरा ही तो दोस्त है, मेरे बजाए उसके रिक्षा में वो आदमी चला गया।
01:06इसमें क्या बात है? ऐसे उसका दोस्त सोचते रहता है।
01:10और ठीक तभी तीन आदमी उसके रिक्षा के पास आते हैं।
01:15सुनिए, बस्टान को आएंगे आप? जी साप, आईए रिक्षा में बैठिए।
01:21तब शरत भी उन तीन आदमीों को लेकर रिक्षा चलाते हुए बस्टान तक पहुचता है।
01:28रिक्षा चलाते हुए शरत सोचता है, मेरे दोस्त के उस आदमी को ले जाने की कारण ही,
01:33मुझे अब तीन ग्रहाक मिले। ऐसे सोचते हुए वो उन तीनों को बस्टान में छोड़ देता है।
02:03यसी सोचकर श्रीदर उसके दोस्त के पास जाता है। और फिर वहां से दोनों चले जाते हैं.
02:10ऐसे बहुत साल बीच जाते हैं। एक दिन वो दोनों रिक्षा स्टान मे ग्रहाक के लिए इंतजार कर रहे थे। तब अरे शरतunta एक समय में हम अगर रिक्षा स्टान में
02:23इंतजार करते थे तो बहुत चारे ग्रहा काते थे
02:26पर आज के समय में कोई नहीं आ रहा है
02:29क्योंकि सब के पास अभी आटो है, कार है
02:33और उनी में जाना पसंद करते हैं
02:35इसलिए हम चाहे जितना इंतजार करे लोग तो नहीं आएंगे
02:39अरे हाँ श्रीदर, लेकिन अब हमें अगर आटो खरीदना भी है
02:44उतने सारे पैसे तो हमारे पास नहीं है न
02:47वैसे भी रिक्षा में बैठने के लिए कोई नहीं आ रहा है
02:50इससे बैठर तो यही है कि हम ये काम छोड़ कर शहर चले जाते हैं
02:56और वही कोई काम करते हुए खुशी से जी सकते हैं
03:00श्रीदर, चाहे जो भी हो जाए, मैं अपना गाउँ छोड़ कर कहीं नहीं आऊंगा
03:05मुझे तो हर जगा होंगी ना
03:07इसका मतलब ये थोड़ी है कि हम गाउँ छोड़ कर कहीं और चले जाए
03:11और इस बात की क्या यकीन है कि कल हम शहर में जाएंगे तो वहाँ मुश्किले नहीं आएंगे
03:17तो मुझे यही रहना है और इन मुश्किलों का सामना यही करना है
03:21अरे शरत, यहाँ पर हमें कोई और काम नहीं मिलेगा
03:25ठीक है, तुम यही रहो, मैं जा रहा हूँ
03:29ऐसे कहकर वो उसकी बीवी बच्चों के साथ सच में शहर चले जाता है, वहाँ जाकर वो कार चलाते रहता है, मेरे साथ अगर मेरा दोस्त भी होता, तो हम दोनों मिलकर कोई न कोई काम ढून लेते, अब मुझे अकेले ही कुछ करना पड़ीगा, ऐसे वो बहुत दिन दुखी
03:59ऐसे जोर से एक आदमी चिला रहा था, उसे देख शरत को एक विचार आता है, आरे हाँ, मेरे पास आटो खरीदने के लिए तो पैसे नहीं है, लेकिन खुद से मैं एक प्यास का वाहन तो बना सकता हूं, और गाव में उसी वाहन को चलाते रह सकता हूं, और इतना ही नहीं
04:29ज्यादा लोग बैठ पाए, और तब नए दिखने वाले वाहन को देख, गाव वाले सारे मेरे वाहन में आएंगे, और मैं ऐसे पैसे भी कमा सकूंगा, उस आदमी का प्यास प्यास करके चिलाने के कारण ही मुझे ये विचार आया है, ये सोचकर शरत तुरंत उस काम में �
04:59चलाते हुए गाव में जाता है, बस स्टान, रेलवे स्टेशन, रामा लेनगर, आए बाबू आए, जल्दी आए, और तुरंत उसके गाड़ी में बैठ जाते हैं, ऐसे ही कम दिन में शरत का प्यास की तरह दिखने वाहन में,
05:28बहुत सारे लोग बैठते हैं, और वो बहुत प्रसद हो जाता है, इतना कि कुछ ही दिनों में वो और थोड़े प्यास के वाहन बना कर, उनमें दूसरों को चलाने के लिए नौकरी भी देता है, ऐसे वो वाहन चलाते हुए बहुत खुश रहता है, तब एक दिन, शीदर �
05:58हुँ जो शहर जाकर कार चलाते हुए, आई हुए पैसे कम पढ़ जाने के कारण कर्ज लेकर दुख में जी रहा हुँ, और मेरा दोस्त यहां इसी गाव में इतना प्रसद गाड़ी चलाते हुए, इतनी प्रशन सब पाते हुए खुश है, अगर मैं भी इसके साथ यही रह
06:28उसे मैं अपने साथ शहर ले जाऊंगा, फिर उसके सारे वाहन को मैं ले लूँगा और उसे वहाँ छोड़ कर मैं दूर भाग जाऊंगा, तब उन सारे वाहन को बेच कर आई हुए पैसों से मैं अपना कर्स चुका पाऊंगा और खुश रह पाऊंगा, लेकिन मेरा दोस्
06:58ये सोचकर श्रीदर उसके बीवी के पास जाता है।
07:02नर्मदा तुम मेरे दोस्त की पत्नी के पास जाकर उससे बात करो और उसे मनाओ कि हमें शहर जाना होगा।
07:11और ऐसे वो जो कुछ भी सोचता है उसकी बीवी को बताता है।
07:15ठीक है जी मैं वही करूँगी। ये कहके नर्मदा शरत की बीवी के पास जाती है।
07:21अरे भाबी आप भी मेरे साथ शहर आजाएगा। वहाँ अगर आप ये प्यास की वाहन चलाएंगे ना तो बहुत सारा पैसा मिलेगा।
07:31हाँ और उतना ही नहीं यहां से वहां रहने में भी दुगना अच्छा होगा।
07:38मेरे पती भी वहां कार चलाते हुए बहुत सारे पैसे कमा रहे हैं। आपके पास तो पहले से ही बहुत वाहन है। वहां आएंगे तो और भी पैसे कमा पाएंगे।
07:49जी भावी ये तो अच्छा विचार है जरूर हम सब आपके साथ शहर आएंगे यह कहके वो उसके पती शरत के पास जाकर सुनिए हम भी आपके दोस्त के साथ शहर जाएंगे ना जी वहां यहां से दुगना अच्छा होगा और दुगने पैसे भी मिलेंगी पता है आपको अ�
08:19उसके पती के ऐसे कहने पर इसी बात को कहने वो नर्मदा के पास जाती है वहां पहुचते ही पती पत्नी को कुछ बात करते हुए सुनकर वो दर्वाजे के पास ही रुख जाती है नर्मदा क्या तुमने मेरे दोस्त के बीवी से बात किया है कुछ भी करके उन्हें हमारे सा
08:49मौझूद सारे वाहन को बेच कर हमारे कर्ज चुकाएंगे
08:54और हम खुश रह पाएंगे
08:57दर्वाजे के पास खड़े हुए शरत की बीवी ये सब सुन लेती है
09:01और भागते हुए उसके पती के पास जाती है
09:05सुनिये हम शहर नहीं जाएंगे
09:08ये सब अपके दोस्त का चाल है
09:11और ऐसे उसने जो कुछ भी सुना अपनी पती को बताती है
09:15क्या मेरा दोस्त कर्जों में फसा है
09:19इसलिए वो ऐसा है
09:21कुछ भी करके मेरे पास मौझूद वाहन को बेच कर भी उसका कर्ज चुकाना होगा
09:27क्या एक तरफ आपका दोस्त आप पे जाल बिचा रहा है
09:32आपको धोका दे रहा है
09:34और आप सोच रहे हैं कि आप उसकी मतद करेंगे
09:37ये क्या है जी
09:39वो चाहे अच्छा हो या बुरा हो
09:41वो मेरा दोस्त है
09:42और वो अभी कश्टों में है
09:44तो मुझे उसे बचाना होगा
09:47और मुझे उसकी सहायता करना होगा
09:49ये कहके
09:50वो वहां से उसके दोस्त के पास चले जाता है
09:53श्रीदर
09:55मुझे नहीं पताता कि तुम यहां आये हो
09:58वरना मैं तुम्हारे पास आ जाता
10:00और अगर मुझे पहले ही पता होता
10:02कि शहर में तुम्हारी इतनी मुश्किले हैं तो मैं तुम्हारी मदद कर देता
10:07इसके लिए मुझे धोका देने की कोई जरूरत नहीं
10:10मैं खुद एक वाहन बेचकर तुम्हें वो पैसे दे दूँगा
10:14और तुम अपना कर्स चुका सकते हो
10:17उसके बाद तुम भी यहां मेरे साथ रह जाओ
10:20हम दोनों ये गाड़ी चलाते हुए खुश रह पाएंगे
10:23ऐसे वो अपनी बीवी की बाते शीदर को बताता है
10:27शरत मैं तुम्हें धोका देना चाता था
10:32ये जानकर भी तुम मेरी मदद करने यहां आए
10:36मुझे अपने आप पे घेना रही है
10:38और मुझे अब अपनी गलती का एसास हुआ है
10:42तुम एक अच्छा इंसान हो
10:44और उससे बेटर दोस्त हो मेरे
10:46अब से मैं तुम्हारे साथ ही रहूँगा
10:49और आइंदा ये गलती नहीं करूँगा
10:51तुम्हें अपनी गल्ती का एसास हो गया ना और तुम मेरे साथ रहना चाते हो बस यही चाता था मैं
10:58अब मुझे बहुत खुशी है हम दोनों को हमेशा ऐसे ही रहना है
11:02तब से वो दोनों दोस साथ में रहते हुए उसी गाव में प्यास का वाहन चलाते हुए बहुत खुश रहते हैं
Be the first to comment
Add your comment

Recommended