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  • 3 months ago

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00:00अंग्री जिन बहु और पेचारी फूली सास
00:02मादवी अपने पती रमेश और अपने बेटे अजे के साथ रहा करती थी
00:07अजे का बच्पन से एक ही सपना था कि वो अपनी आगे की पढ़ाई USA में पूरी करे
00:13और इसलिए वो USA पढ़ाई करने के लिए चला जाता है
00:16तीन साल बाद जब वो अपनी पढ़ाई पूरी करके आता है
00:21तो अपने बेटे के आने की खुशी में मादवी उसकी पसंद के कई तरह के पकवान बनाती है
00:26और जब घर की डॉरबल बचती है तो मादवी अपने पती रमेश को कहती है
00:32लगता है मेरा अजय आ गया है आप यहीं बैटना मैं दर्वासा खोलती हूँ
00:37मादवी जल्दी से जाकर दर्वासा खोलती है
00:40तो दर्वाजी पर अजय के साथ एक लड़की को देख कर वो अजय से पूछती है
00:45ये कान है बेटा?
00:49मा ये ग्रेटी है हम दोनों USA में साथ ही पढ़ते थे और अब ग्रेटी इस घर की बहु है
00:56क्या? बहु? अरे बेटा तुने शादी कर ली और बताया भी नहीं
01:02कम से कम अपनी मा को बता तो देता कि तू अपने साथ इस घर की बहु लेकर आ रहा है
01:07मैं बहु क्याने की कुछ तैयारी तो कर लेती, कोई बात नहीं
01:12बहु यही रुख, मैं अभी तेरे लिए पूजा की थाल लेकर आती हूँ
01:17माम, हाप अपनी ये फार्मलेटीस बाद में पूरी कर लेना
01:22I'm so tired right now, are you darling, अपना रूम कहां है?
01:28कोई बात नहीं बहु, तुम पहले आराम कर लो, तब तक मैं तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूँ
01:35ग्रेटी अपनी सास की किसी भी बात का कोई जवाब नहीं देती, और अपने रूम में जाकर सूजाती है
01:42कुछ देर बाद मादवी, अपने बहु बेटी के लिए चाय नाशता लेकर उनके कमरे में जाती है
01:47जहां ग्रेटी अपने सास से कहती है
01:49हाँ जाई, आजाई
01:52क्या हुआ ग्रेटी?
01:54अपनी माम को बोलो, कि अब ये जब भी हमारे कमर में आए तो ना खर के आए
02:00आपसे मैं ऐसा ही करूंगी बहु, वो तो आज ही तुम दोनों आए हो तो मुझे लगा ठाक गए होंगे
02:09इसलिए जल्दी जल्दी मैं ऐसे ही चाय नाशता लेकर आ गई
02:12वो क्या है ना, अजे जब भी बाहर से आता है, तो आते ही चाय मांगता है
02:18बस इसलिए, मैं ना ये चाय यहां रख देती हूँ, पी लेना, अद्रक वाली चाय है
02:25ये बोलकर माद्वी वाहां से जाने लगती है, तब इग्रेटी अपनी साथ से कहती है
02:30जाठी हुए अपनी साथ, अपनी ये चाय बिले जाओ, क्योंकि आजाए अब चाय ना है पीटा
02:38हाँ मा, जब से मैं युवे से गया हूँ, तब से मैंने चाय पीनी छोड़ दिया है
02:43अपी क्रम करो, हम जोनों के लिए काफी लियाओ, मैं सच में बहुत ज़्यादा ठाक गई हूँ
02:50अरे ठीक है, ला देती हूँ, अच्छा बेटा, तुम्हारे मम्मी पापा इंडियन है या फिर वहीं अंग्रेजी है
03:00मेरे मम्मी पापा इंडियन है, पर मैं शुरू से युएसे में रही हूँ, इसलिए मैं खुट को अंग्रेजीन मांटी हूँ
03:09वैसे अब जल्दी से ज्वा कर मेरे लिए कौफी लिए कर आओ, और मेरे बारे में इतना ज़्यादा इंक्वाइरी करने का ज़रूरत नाई है
03:17अरे हाँ हाँ अभी लाती हूँ, वैसे बहु मैं तुम्हें ना इंडिया के सारे तार तरीके सिखा दूँगी
03:24अरे क्या हुआ तुम्हारी परवरिश अगर USA में हुई है, है तो तो इंडियान ही ना
03:29हाँ से घ्यान नहीं मांगा है, अब खुश्चिर के लिए हम जोनों को अखेला चाड़ दो, फ्लीज, हच चाड़ता है
03:39अपनी बहु की बात सुनकर मादवी वहाँ से चली जाती है, मादवी का उत्रा हुआ चेहरा देख कर रमेश मादवी से कहता है
03:46हमने इस नालायक को बाहर पढ़ने के लिए भीजा था, और इसने क्या क्या, बाहर से अंग्रेजन बहु उठा कर लिया आया
03:54मादवी तुम बहुत बोली हो, पर मैं नहीं, ये लड़की हमारा घर तोड़तीगी, हमसे हमारे अजय को दूर कर देगी
04:03देखा, आते ही कैसे रोब जाड़ रही है, जासे तुम इस घर के नौकरानी हो
04:08तुम उसको बोलो कि तुम इस घर की माल किन हो, और उसकी सास हो, वो वही करे जो तुम कहोगी
04:14अरे आप बेकार में ही गुसा हो रहे हैं, बहु युए से की है, यहां नहीं नहीं आई है, उसको यहां के तौर तरीके नहीं पता
04:23और वो मुझे अपनी मा मांती है, तब ही तो अपने नकर दिखा रही है, वैसे भी ना बहु बेटी दोनों बरावरी होती है
04:31माधवी कौन सी बेटी अपनी मा से ऐसे बात करती है जैसे तुम्हारी बहु कर रही है
04:36मैं बस तुम्हारे कहने पर चुपूँ वरना मैं अपने बहु बेटों को आज ही घर से निकाल देता
04:43ये कहकर रमिषवां से चला जाता है ऐसे ही कुछ दिन बीच जाते हैं
04:48और ग्रेटी अपनी बेचारी भूली भाली साज पर अत्यचार करती रहती है
04:53ग्रेटी अपना सारा काम अपनी साज से करवाती और उसी को भला बरा सुनाती
04:58ऐसे ही एक दिन मादवी कपड़े धो रही होती है
05:00और ग्रेटी मादवी को सताने के लिए अपने सारे कपड़े लाकर उसे देती है
05:05और कहती है
05:06मॉम्स ये मेरे कुछ कपड़े हैं जरा इने भी धोडो
05:11इतना बोलकर ग्रेटी तयार होकर घर से जाने लगती है
05:14तब इमादवी उसे कहती है
05:16बहु आज तुम्हारे ससुर के दोस्त के घर में एक छोटी सी पार्टी है
05:21उन्होंने सह परिवार बुलाया है
05:23मैं चाती हूँ कि तुम और अजे भी आज हमारे साथ वहाँ चलो
05:27और आज ना साड़ी पहनना
05:29माम आभी मैं खलब जा रही हूँ
05:32रात को मुझे टाइम मिलेगा तो अपके साथ चली जाओंगी
05:36पर साड़ी बारी नहीं पहनूंगी
05:38ये कहकर ग्रेठी वहाँ से चली चाती है
05:41शाम हो जाती है
05:42सब ग्रेठी के घर आने का इंतिजार करते हैं
05:45और इस वज़े से कोई भी पार्टी में नहीं जा पाता।
05:48इंतिजार करते करते रात के बारा बज जाते हैं।
05:51बारा बजे रात को ग्रिटी, नशी की हालत में जखमी घर आती है।
05:56अपनी बहु की सर और हाथ पर लगी चोड देखकर माधी परिशान हो जाती है
06:00और जल्दी से फोल स्टेट का बॉक्स लाकर अपने बहु की सर पर पट्टी करती है।
06:05एक मा की तरह प्यार करते हुए वो अपनी बहु से कहती है।
06:09बहु, तुझे चोड के से लग गई बेटा?
06:12मैं घर आ रही थी, एक बाइक फाले से मेरी चकर हो गई।
06:17कोई बात नहीं बिटा, कल सुबह होते ही तुझे अपने फैमिली डॉक्टर के पास ले जाओंगी।
06:22अच्छा, अब तुना आराम कर, मैं तेरे लिए अभी हल्दी वाला दूद लेकर आती हूँ।
06:27मादवी, मैं न तुम्हें पहले ही समझाया था, ये अंग्रेजन हमारे घर के लिए ठीक नहीं है, पर तुमने मेरी एक नहीं मानी, अब देख लो, आज इस अंग्रेजन बहु की वज़ा से सारे महले में हमारी नाक कट गई है, आज सब हम पर हसते हैं, और ये सब कुछ त
06:57ग्रेटी को लेकर अपने फैमिली डॉक्टर की पास जाती है, जहां ग्रेटी देखती है कि उस डॉक्टर की बहुने साड़ी पैनी है, और एक संसकारी बहु की तरह घर में पूजा पाठ करके अपने सास ससुर के पैर चूकर उनका सुबह सुबह आशिरवात लेती है, ड�
07:27ये सब देखकर ग्रेटी को पश्चाताप होता है और कुछ दिर बाद वो दोनों दवाई लेकर घर आती है, जब मादवी ग्रेटी को दवाई खिलाने के लिए उसके पास जाती है तो…
07:57आपकी हालत में चट खाकर घर आई तो भी आपने मुझे से कोई सवाल नहीं किया, उल्चा अपने मेरा साथ दिया, मेरी सीवा की, और जब मैंना डॉक्टर की बहु को देखा, घर का काम करते हुए, अपने सास ससुर की सीवा करते हुए, तब ज़कर मुझे एसास हुआ की
08:27बेटा अक्सर बच्चों से गलतिया हो जाती है, ऐसे भी सुबा का भूला अगर शाम को घर आ जाए, तो उसे भूला नहीं कहते बहु, और मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ये देख कर कि मेरी अंग्रेजन बहु कितनी समझदार हो गई है।
08:57अपने सास ससुर की बहुत अच्छे से दिल से सेवा करती है।
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