00:00नाखून खाने वाली बहू
00:02सुशिला जी बड़ी उदास होकर घर के बाहर बैठी हुई थी
00:06तब ही उनकी पडोसन कांता वहाँ पर आ गई
00:09अरे क्या बात है सुशिला बहन, आज इतनी उदास क्यों हो?
00:14अरे क्या बताओं कांता बहन, जब से घर में बहू आई है तब से आफ़त आ गई है
00:19अरे ये आप क्या करें है, आप तो इतना खुश होकर अपने बेटे की शादी करके बहू घर लेकर आई थी
00:26अब क्या हुआ, बहू ने कोई तमाशा खड़ा कर दिया क्या?
00:31नहीं नहीं बहन जी, तमाशा तो कोई खड़ा नहीं किया
00:34फिर क्या बात है? क्या बहू ठीक से काम नहीं करती?
00:39या फिर आपको उल्टे सीधे जवाब देती है?
00:42ऐसी भी कोई बात नहीं, मेरी बहू तो घर के सारे काम खुद अकेले ही निप्टा देती है
00:48और मुझसे तो बड़े प्यार से बात करती है
00:50अरे बहन जी, जब आपकी बहू सारे काम इतने अच्छे से करती है
00:56आपसे जगडा नहीं करती, फिर आप परिशान क्यूं है?
01:01अब क्या बताऊं?
01:03मेरी बहू को नाखुन चबाने की आदत है
01:06जब देखो तब नाखुन चबाती रहती है
01:08परिशान हो कई हूँ इस वज़े से मैं
01:11अरे तो इसमें आपको क्या परिशानी?
01:14चबाती है तो चबाने दो
01:16अरे बहन जी, शर्म आती है
01:18घर पर कोई महमान या मिलने वाला आ जाए
01:21और वो बार बार उमसे पूछे
01:23कि आपकी बहु इस तरह नाखुन क्यों खा रही है
01:25अब आप ही बताईए
01:27क्या जवाब दे उनको?
01:29अरे तो फिर आप अपनी बहु को समझाने की कोशिश कीजिए
01:32कि इस तरह के हरकत ना किया करे?
01:35क्या करूँ?
01:36वो कहती है कि उसकी बज़पन की आदत है
01:39छुड़ाना बहुत मुश्किल है मम्मी जी
01:41मेरी तो कुछ समझ में नहीं आता
01:44चलिए मैं आपकी बहु को समझाने की कोशिश करते हूँ
01:48आईए आईए अंदर आईए
01:50इसी बहाने बहु से भी मिल लीजे
01:52क्या पता आपकी बात उसकी समझ में आ जाए
01:55सुशिला और कांता दोनों घर के अंदर चले जाते हैं
02:00बहाँ पर सुशिला की बहु प्रिया घर का कुछ काम कर रही थी
02:03कांता को देखते ही प्रिया उनकी पास आ जाती है
02:06नमस्ते अंटी जी कैसी है आप?
02:08मैं तो बिल्कुल ठीक हूँ बेटा
02:10खुब खुश हो भगवान तुम्हे लंबी उम्र दे
02:14अंटी मैं आपके लिए चाय नाश्ता लेकर आती हूँ
02:17आप तब तक बैठ कर ममी जी से बाते करें
02:20आरे बेटा चाय की क्या जल्दी है
02:22यहाँ आओ मेरे पास बैठो
02:23सारा दिन काम में लगी रहती हो
02:26कभी हम लोगों के पास बैठ कर बाते भी किया करो
02:30जी अंटी जी
02:31मैं आप लोगों के पास बैठ जाती हूँ बैस
02:34कुछ ही देर बाद बाते करते करते
02:37प्रिया अपने नाखुन चबाने लगती है
02:39ये देखकर कांता ने उससे कहा
02:42अरे प्रिया बेटा ये तुम क्या कर रही हो
02:45इतनी पढ़ी लिखी, सुन्दर और समझदा लड़की होकर
02:48इस तरह नाखुन चबाना अच्छा नहीं लगता
02:51सारी अंटी जी वो क्या है ना
02:55मुझे पता ही नहीं चलता कि मैं कब अपने नाखुन चबाने लग जाती हूँ
02:58अरे जिर्ण दिखाओ तो तुम्हारे नाखुन
03:01ये देखिए
03:02देखा आपने, प्रिया ने अपने नाखुन चबा चबा कर पूरी तरह गायब कर दिये हैं
03:08अब कौन समझाए इसे?
03:10अरे कोई बात नहीं
03:12लेकिन बेटा, तुम्हें इस तरह नाखुन नहीं खाने चाहिए
03:15देखो, अगर तुम्हें इस तरह के कोई भी हरकत करोगी न
03:19तो कोई तुम्हारी अच्छाईयों को नहीं देखेगा
03:22सब तुम्हारा मजाग बनाएंगे
03:24आपकी बात सही आणटी, लेकिन मैं क्या करूँ
03:27मेरा अपनी जादत पर बिल्कुल कंट्रोल नहीं है
03:30लेकिन बेटा, मैंने भी तुम्हें कितनी बार कहा है
03:35तुम्हें कोशिश तो करनी चाहिए न
03:37अच्छा-च्छा, कोई बात नहीं प्रिया
03:40अगले दिन, सुशिला जी अपनी बहु प्रिया के साथ कांता के गर
03:56पूजा करने के लिए जाती है
03:58प्रिया महले की औरतों के साथ बैठी हुई थी
04:01तभी अचानक से महले की एक औरत सीमा की चिलाने की आवाज आई
04:06अरे ये देखो, सुशिला जी के बहु मेरा हाथ बकड़कर मेरे नाखुन खा रही है
04:11है? ये क्या कह रही हो?
04:14आपको क्या लगता है? मैं जूट बोल रही हूँ
04:16ये देखिए, आपकी बहु मेरे बाजु में बैठी थी
04:19अरे मैं तो भगवान के ध्यान में इतनी मस्त थी
04:22इसने मेरा हाथ उठाया और लगी मेरे नाखुन खाने
04:26क्यों प्रिया बहु? तुमने सीमा के हाथ के नाखुन भी खाये क्या?
04:32मुझे माफ कर दीजी मम्मी जी
04:34मेरे हाथ के नाखुन पूरी तरह खत्म हो गयते
04:37इसलिम मुझे लगा
04:39अरे चुप करो
04:40बहु आज तुमने सारे महले वालों के सामने मेरा मजाग बना कर रख दिया
04:45अरे प्रिया बेटा
04:47मैंने तुम्हें कल ही तो समझाया था
04:49कि तुम्हें इस तरह के हरकत नहीं करनी चाहिए
04:51इसमें मेरी कोई गलती नहीं है
04:54मुझे पता ही नहीं चला
04:56क्या अपने नाखुन खाते खाते कब मैं
04:58सीमा अंटे के नाखुन चबाने लग गई
05:01अरे कैसी पागल बहु है आपकी
05:03इसका कुछ इलाज क्यों नहीं करवाते
05:05अरे ऐसा भी कोई होता है क्या
05:07इंसान अपने नाखुन छोड़कर
05:09सीमा की बाद सुनकर
05:13महले की सारी औरते हसने लग जाती है
05:16ये देखकर
05:17सुशिला जी को बिलकुल अच्छा नहीं लगता
05:19और वो प्रिया पर नाराज होती है
05:21और उसे घर ले आती है
05:23पूरे महले के सामने
05:25आज तुमने हमारा मजाग बनवा कर रख दिया
05:27मम्मी जी मुझे माफ कर दीजिये
05:30मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई
05:31बहु आखिर तुम अपनी आदत छोड़ क्यों नहीं देती
05:36मैं कोशिश करूँगी मम्मी जी
05:39कुछ दिन और इसी तरह बीच जाते हैं
05:42लेकिन प्रिया की नाखुन खाने की आदत
05:44अभी तक खत नहीं हुई
05:45तभी एक दिन प्रिया के पेट में जोरों से दर्द होता है
05:49मम्मी जी मेरे पेट में बहुत जोर से दर्द हो रहा है
05:54अरे क्या हुआ
06:00कुछ देर पहले तक तो तुम बिलकुल जीक थी
06:02पता नहीं मम्मी जी बहुत दर्द हो रहा है
06:06मुझे डॉक्टर के पास ले चलिए न
06:08अच्छा अच्छा ठीक है ठीक है
06:13मैं तुम्हें डॉक्टर के पास ले चलती हूँ
06:15सुशिला जी आपकी बहु के पेट में नाखुनों का गुच्छा बन गया है
06:20और इसे आपरेशन से ही बहार निकाला जा सकता है
06:24क्या? ओपरेशन? ये क्या कह रहे हैं आप डॉक्टर साब?
06:29मुझे ओपरेशन से बहुत डर लगता है
06:31अब डरने से क्या होगा प्रिया जी?
06:34आप जिस स्पीट से नाखुन खाती हैं उससे ये सब तो होना यह था
06:37ए बगवाद, ये क्या हो गया?
06:40मेरे नाखुन खाने की आदत की वज़े से मुझे ये सब सेना पढ़ रहे
06:45पहु, अगर तुमने वक्त रहते मेरी बात मान ली होती
06:50तो आज तुम्हारे साथ ये सब ना हुआ होता
06:52दो दिन बाद आप मेरे होस्पिटल वापस आ जाना
06:55मैं आपके पेट का ओप्रेशन करके सारा गुच्छा बहार निकाल दूगा
06:59डॉक्टर साब, क्यों इसका और कोई इलाज नहीं है?
07:03महीं, और कोई इलाज नहीं है
07:05और हाँ, अगर एक बार ओप्रेशन होने के बाद आपने फिर से नाखुन खाना शुरू किया
07:11तो अगली बार ओप्रेशन करना भी मुश्किल होगा
07:13फिर तो सीधा भगवान जी ही इसका इलाज करेंगे
07:17नहीं, नहीं, डॉक्टर साब, मुझे इतने जल्दे भगवान के पास नहीं जाना
07:21दो दिन के बाद सुशिला जी अपनी बहु प्रिया को डॉक्टर के पास लेकर जाती है
07:25प्रिया को हॉस्पिटल में एड्मिट करने के बाद उसे ओप्रेशन थिएटर में ले जाया जाता है
07:31एक गंटे के बाद जब प्रिया होश में आती है
07:33ममी जी मेरा ओप्रेशन ठीक से तो हो गया ना मुझे कुछ होगा तो नहीं न
07:39क्यों तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा क्या
07:42नहीं नहीं ममी जी ऐसे कोई बात नहीं है लेकिन मुझे पता है डॉक्टर ने मेरा पेट काट कर नाखून का गुच्छा बहार निकाला होगा और अब मुझे कई दिनों तक एक बिस्दर पर पड़े रहना होगा
07:55प्रिया की बात सुनकर डॉक्टर और सुशिला दोनों जोर-जोर से हसते लगते हैं ये देखकर प्रिया हैरान रह जाती है और पूछती है
08:04अरे ये क्या बात हुई मेरा ओप्रेशन हुआ है और आप लोगों को हसी आ रही है
08:09नहीं प्रिया जी अपका कोई और आपरेशन नहीं हुआ है
08:15तो फिर मैं बेहोश क्यों थी और मुझे हॉस्पिटल में एडमिट क्यूं किया गया
08:20तुम्हें डराने के लिए और किस लिए? इतनी बार तुम्हें समझाया कि तुम्हें नाखुन नहीं खाने चाहिए, नहीं खाने चाहिए, लेकिन तुम्हें समझ में ही नहीं आता था, मुझे लगा कि यही एक सही तरीका है
08:34लेकिन उस दिन पे तो डॉक्टर साब ने कहा था कि मेरे पेट में दर्द नाखुनों के गुच्छी की वज़े से है
08:41वो मैंने आपसे इसलिए कहा था क्योंकि आपकी सासुमा ने मुझे ऐसा करने के लिए कहा
08:46अगर मैं और आपकी सासुमा आपको डराते नहीं तो आपकी नाखुन खाने की अदत कभी नहीं जाती
08:52तु क्या मैं बिल्कुल ठीकूँ? मेरा पेट कटा नहीं है?
08:56जी नहीं बिल्कुल भी नहीं आप एक दम छेका बस थोड़ी दिर के लिए आपको बेहोशी का इंजेक्शन दे दिया गया था
09:04और वो भी तुम्हें डराने के लिए बहू लेकिन ध्यान रखना अगर आगे से नाखुन खाए तो सच मुझ तुमारा अपरेशन करवा दूंगी
09:12अपनी सास की बात सुनकर प्रिया जोर-जोर से हसने लगी और साथ ही उसने मन ही मन ये निश्चित भी कर लिया था
09:22कि वो कभी अपने या किसी और की नाखुन नहीं खाएगी
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