00:00एक समय में सिरिपूरम नामक एक गाव में राघव और चंद्रवती नामक पती पतनी रहते थे।
00:07उनका विराज नामक एक बेटा भी था।
00:10चंद्रवती का पती और उसका बेटा दोनों उसी गाव में काम करते थे।
00:15चंद्रवती बहुत ही कंजूस थी।
00:17उसे कभी भी पैसे खर्च करना अच्छा नहीं लगता था।
00:21इसलिए वो घर पे सिलाई करके पैसे कमाती थी।
00:25एक दिन उसके पती और बेटा दोनों काम के लिए जाते हुए
00:29चंद्रवती के पास जाकर पैसे पूछते हैं।
00:32मा मुझे अपने दोस्तों के साथ बाहर जाना है।
00:35मुझे 500 रुपए दीजे न।
00:37चंद्रवती मुझे भी आज 100 रुपए की जरूरत है।
00:41उन दोनों के ऐसे पूछने पर वो अंदर जाकर पैसे लेकर बाहर आती है।
00:46बेटा ये लो 100 रुपए और सुनिए ये लीजे 10 रुपए तुम दोनों ने पूछा इसलिए इतना तुभी पैसे मैंने दिया वरना मैं ये भी नहीं देती।
00:56तुम दोनों को पैसे बचाना सीखना होगा। ऐसे चंद्रवती उन दोनों से बात करती है।
01:02पापा आपने देखा। मैंने मा से 500 रुपए पूछा है। लेकिन वो मुझे 100 रुपए देखकर ये कह रही है कि मुझे पैसे खर्च करना सीखना होगा। देखा आपने।
01:13बेटा तुम्हारी मा के बारे में तो हम जानते ही हैं। उसने हमें पैसे दिया यही बड़ी बात है। तुम्हें तो वो कम से कम 100 रुपए दी है। मुझे देखो 10 रुपए दिया है उसने। ऐसे ही बाप बेटे दोनों हर रोज चंद्रवती के कारण किसी ना किसी बात प
01:43चंद्रवती की घर में तो सबी काम करते हैं। और इतना ही नहीं यह इतनी कंजूस है कि घर कोई आये भी तो उन्हें कॉफी तक नहीं देती है। इसे सिर्फ पैसे बचाना आता है, खर्च करना नहीं। इसलिए मुझे अपने बेहन की बेटी का रिष्टा यहां लाकर चं
02:13कमाती है। और इतना ही नहीं मेरी बेहन की बेटी ना बहुत अमीर भी है। अब उनका भी तो एक ही बेटी है। वो सोच रहे थे कि कोई अच्छे नौकरी करने वाले मर्द से उसका शादी हो जाए। और अब तुम्हारा बेटा भी तो अच्छी नौकरी ही कर रहा है, तो
02:43अच्छा ही होगा तो मैं ऐसे करती हूं सबसे पहले मैं उनके घर जाकर ये देखती हूं कि वो अमीर है कि नहीं और उसके तुरंत बात इन दोनों की शादी करवा दूंगी ठीक है सरला कल ही हम दोनों तुम्हारे बेहन के यहां जाकर बात करेंगे ये फैसला करके चंद्रव
03:13तुरंत बात कुछ ही दिनों में वो सरला की बेहन की बेटी कलपना से उसके बेटे का शादी करवा देती है अब क्यूंकि कलपना नई नवेली बहू थी चंद्रवती उसका बहुत अच्छा ख्याल लगती है ऐसे कुछ दिन बीच जाते हैं एक दिन चंद्रवती अपने ब
03:43सबजी मत काटो फिलाल तुम सिर्फ इंचान टमाटर को काट कर खाना पकाओ और उसमें मिर्ची पाउडर ज्यादा डालो और बस सभी के लिए ये ठीक रहेगा ऐसे कहकर वो उसके बहु के बगल में ही रहकर उसे सबजी बनवाती है इतने में बाहर से सबजी वाले को सुन
04:13इतना गाम है जी वो साट रुपए है भापरे क्या साट रुपए तो फिर तुम मेरे बहु को एक डसन मत दो दस रुपए में जितना आएगा उतना ही दो ऐसे कहकर वो सबजी बेशने वाले को सिर्फ दस रुपए देकर वहां से चली जाती है इसी कारण तो सबजी वाला क
04:43अरे क्या हुआ कलपना तुमने तो मेरा आना भी नहीं देखा इतना क्या सोच रही हो उसके पती के ऐसे पूछने पर जो कुछ भी हुआ वो उन्हें समझाती है अरे कलपना तुम मा के बारे में इतना सोच रही हो फिकर मत करो मा बचपन से ऐसे ही है वैसे मैंने सोचा कि त
05:13ज्यादा सोचो मत, बस मा की बात मान लो।
05:16तो इसका मतलब ये है कि मेरी सासुमा पैसों को ज्यादा गौरव देती है।
05:22मुझे कुछ भी करके उनको सबक सिखाना होगा।
05:25वरना ये भी हो सकता है कि वो मुझे एक नएक दिन घर से बाहर निकाल दे।
05:30इससे पहले मुझे उनका बरताव बदलना होगा।
05:33ये फैसला करके वो अगले दिन उसके सासुमा के आने से पहले ही खाने में ज्यादा सबजी और कम मिर्ची पाउडर डाल कर बनाती रहती है।
05:42अरे कलपना मैंने तुम्हे पहले ही बोला है कि मुझे ऐसे बताय बिना खाना मत पकाओ। तुम इतने सारे सबजी डाल कर खाना क्यों बना रही हो।
05:51सासुमा हमारे घर में खाना ऐसे ही बनता है।
05:54हम कम सबर्जी ढाल कर ज्यादा मिरची पाउडर डाल कर नहीं बनाते हैं और तो और सबर्जी जब हम खरीदे हैं
06:01तो सारे घर वालों के लिए खरीदते हैं ऐसे दस रुपए का सबसीर नहीं खरीदते हैं इतने में बाहर फल बेचने वाला आता है उसकी आवाज सुनते ही कलपना बाहर जाकर उसके सासुमा के सामने ही सारे प्रकार के फल को एक-एक किलो में लेती है चंद्रवती ये सब दे
06:31ये सोचकर चंद्रवती वहां से चली जाती है
06:34लेकिन कलपना तब से जान बूच कर उसके सासुमा के सामने
06:38आते जाते सारे लोगों से कुछ ना कुछ खरीदती रहती थी
06:42ऐसे कुछ दिन बीट जाते हैं
06:45एक दिन जब कल्पना धेर सारे सबजिया खरीद कर घर के अंदर जा रही थी, चंद्रवती उसे देख ऐसे कहती है, ये क्या है कल्पना, रोज रोज तुम्हारा खर्चा बढ़ी रहा है, मैंने सोचा अगर मैं चुप रहूंगी, तो तुम्हें खुद समझा जाएगा, लेक
07:15अच्छा खाना खाकर स्वस्त और तंदरुस्त रहना होगा, अगर हमारी तब्यत अच्छा है, तो ज्यादा पैसे कमा पाएंगे ना, सुनो कल्पना, सिर्फ स्वस्त रहने पर हम ज्यादा पैसे नहीं खरीद पाएंगे, हमें बचत करना होगा, ऐसे ही हम ज्यादा पैसे ह
07:45पैसे खर्च हो जाएंगे इसकी परेशानी नहीं होगी मगर उस व्यापार के निवेश के पैसे मैं मां से भी ले सकती हूं पर अगर लूंगी तो उन्हें ही लोटाना पड़ेगा पर अगर आप यह पैसे देंगे तो जो भी लाब होगा सिर्फ हमें मिलेगा बेटी तुम कह
08:15पैसे कलपना के हाथ में देती है लेकिन सासुमा सिर्फ इतने पैसे काफी नहीं होंगे हमें इस घर को गिर्वी रखके उन पैसों को भी मिलाकर व्यापार शुरू करना होगा चंद्रवती कलपना के ऐसे कहने पर आगे पीछे सोचे बिना उसके पती और बेटे को भी बता
08:45ही देती है ये देख चंद्रवती परेशान हो जाती है चंद्रवती कलपना के पास जाकर उसके पैसे पूछती है हां सासुमा आपने मुझे पैसे कप दिया हर आप मुझे भला देंगी भी क्यों कलपना के मूँ से ये बाते सुनकर चंद्रवती चौंग जाती है और उसके
09:15कर विराज उसके कमरे में जाकर सोच में पढ़ जाता है
09:18मेरी माँगर इतना दुखी है
09:20तो इसका मतलब यही है
09:22कि मेरी बीवी ने उनसे पैसे लिया ही होगा
09:25लेकिन मेरी बीवी तो अमीर है
09:27वो मां से भला पैसे क्यों लेगी
09:29कलपना से पूछ कर भी कोई फैदा नहीं है
09:31इसलिए मुझे ही उसके बारे में सच पता करना होगा
09:34ये फैसला करके वो शहर में रह रहे हैं
09:38उसके बीवी के रिश्तेदारों के पास जाकर
09:40सच का पता लगाता है
09:42तब उसे ये पता चलता है कि उसकी बीवी अमेर ही नहीं है
09:46कलपना के माबाप ने उसकी माच अंद्रवती से जूट कहा था
09:50ये सुनकर विराज दंग रह जाता है
09:53और घर आते ही उसके मा के सामने ही कलपना का सच पूरा बाहर निकाल देता है
09:59क्या तुम अमीर नहीं हो
10:02देखो कलपना तुम अमीर नहीं हो ठीक है
10:05लेकिन तुमने मेरे पास जो पैसे लिया है वो तो लोटा दो
10:09सासु मा मुझे माफ कीजिए
10:11जो पैसे आपने निवेश के लिए दिया था
10:14उससे मैंने व्यापार शुरू तो किया
10:16लेकिन मुझे नुकसान भुकतना पड़ा
10:18और अब मेरे पास कोई पैसे नहीं है
10:20मुझे पता नहीं चल रहा था
10:22कि आपको मैं ये कैसे बताऊं
10:24इसलिए मैंने जूट कह दिया
10:26कि आपने मुझे पैसे ही नहीं दिया
10:28कलपना की इन सारे बाते सुनकर
10:31चंद्रवती आशेर चकित हो जाती है
10:33और इसी बारे में सोच सोच कर सोच सोच कर
10:36वो बीमार पड़ जाती है
10:39चंद्रवती को ऐसे देख
10:41विराज अस्पताल से डॉक्टर घर लेके आता है
10:43और वो डॉक्टर
10:45चंद्रवती का जाच परताल करके
10:47यही बताता है
11:01पैसों से उसकी मा की दवाया खरीद कर उनके लिए सारे प्रकार के फ़ल खरीद कर उन्हें किलाते हुए उनकी देखबाल करते हुए dispost
11:09पास ही रहता है ऐसे कुछ दिन बीच जाते हैं एक दिन चन्द्रवती उसके बेटे को दवायों के लिए पैसे
11:16करना देख बहुत निराश होती है उसको ऐसे निराश देख विराज उनके पास जाकर ऐसे पोच्छता है मा आप अब भी पैसों के बारे में सोच रही है नहीं बेटा मैं अपनी सेहत को खराब करके तुमसे ऐसे पैसे खर्च करवा रही हूं मा मुझे इन पैसों से बढ़कर
11:46का चिंता करना छोड़ दीजे मा तुम सही कह रहे हूं बेटा जब मेरे पास पैसे थे मैंने उन्हें कभी खर्च नहीं किया और मैंने बहुत कंजूसी किया है और आज जब मेरा सेहत खराब हो गया है मैं अब भी पैसे खर्च नहीं कर पा रही हूं क्यूंकि मेरे पास कु
12:16पड़ा उसके लिए मुझे माफ कर दो बेटा मैं आइंदा से कभी नहीं करूंगी उसकी ये सारी बाते कलपना वही रहकर सुनती है मुझे माफ कीचे सासुमा मुझे पता है कि आपने मेरी शादी आपकी बेटे से इसलिए करवाई है क्योंकि मैं अमीर हूँ लेकिन मेरे अम
12:46मैंने ये सच अब तक किसी को नहीं बताया और आपको ऐसे दुख पहुचाया मेरा इरादा ये नहीं था मेरा इरादा सिर्फ आपको बदलना था आज से आप खुश रह सकती है क्योंकि आपके दिये पैसों को मैंने खर्च नहीं किया है बेटी मेरे ही कारण और मेरे बरता
13:16आपसे मैं किसी को भी अपनी कंजूसी से ऐसे दुख नहीं पहुचाऊंगे।
13:20ये वादा करके चंद्रवती उसके बरताव में बदलाव लाती है और उसके घर और परिवारवासी सारे खुश रहते हैं।
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