00:02पूरे 28 साल का हो चुका था रिशब, लेकिन शादी करने को तयार ही नहीं था.
00:09माबाप पूरी तरह से परिशान हो चुके थे.
00:12जब भी किसी लड़की का रिष्टा रिशब के लिए लेकर आते, तो वो शादी करने से साफ मना करती था.
00:17चाहे लड़की कितनी भी सुन्दर, कितनी भी अच्छी क्यों नहीं हो.
00:21रिशब के माबाप को इसकी वज़स समझ में नहीं आ रही थी.
00:25अरे रिशब बेटा, अच्छी खासी नौकरे लग गई है. दिखता भी इतना अच्छा है. आखिर बात क्या है, तुझे शादी क्यों नहीं करने?
00:36देख तु हमारा इकलोता बेटा है. अगर तु शादी नहीं करेगा, तो कैसे काम चलेगा?
00:41लेकिन मैं शादी करना ही नहीं चाहता. मुझे कोई लड़की पसंद नहीं आती.
00:48अरे बेटा, अगर कोई लड़की तुझे पसंद हो, तो उससे शादी कर ले, हमें कोई एतरास नहीं है.
00:54हाँ, रिशब बेटा, अब देख तेरी माँ से भी काम नहीं होता. घर में एक बहु आ जाएगी, तो कम से कम घर का माहूल भी अच्छा होगा. और तेरी माँ को मतद भी मिल जाएगी.
01:06लेकिन ममी पापा कहा ना, मुझे लड़की पसंद ही नहीं आती.
01:09अरे, लड़की अपसंद नहीं आती, तो क्या लड़का पसंद आता है?
01:15वो तो वक्त आने पर ही पता चलेगा.
01:18रिशब की बाद सुनकर उसके माँ और पापा का सर चकरा जाता है.
01:23कुछ दिनों के लिए रिशब अपने आफिस की काम से, शेहर से बाहर जाता है,
01:26और जब लड़कर आता है, तो सामनी का नसारा देखकर, उसके माँ पापा बेहोश होते होते रह जाते हैं.
01:35अरे, ये क्या? ये तुम्हारे साथ कौन है?
01:39माँ ये दिपक है, मेरी पत्नी. हम दोनोंने शादी कर लिया है.
01:45दिपक, तुम्हारी पत्नी कैसे हो सकता है?
01:56मैंने आपको बताया था कि मुझे लड़किया पसंद नहीं आती.
02:00अरे, तो इसका मतलब ये थोड़ी है कि तुम दिपक को दिपका बना कर ले आओगे?
02:05मुझे बहु चाहिए बहु के रूप में ये आदमी नहीं.
02:08लेकिन मम्मी जी, मैं आपकी बेचे से बहुत प्यार करती हूँ.
02:15मेरा मतलब करता हूँ.
02:17अरे, इसको तो करता हूँ, करती हूँ का अंतर भी नहीं पता.
02:21लेका जाए से वापस.
02:23अगर आपने इसे घर से बाहर निकाला पापा तो,
02:26मा भी इसे के साथ चला जाऊँ.
02:28मैं रिशप के बिना जी नहीं सकती.
02:31मेरा मतलब जी नहीं सकता.
02:34हमारा जिन्दगी बर का साथ है, प्लीज.
02:36हमें आलग मत कीजिए, मम्मी जी, पापा जी.
02:39ए भगवान, ये तुने क्या दिद दिखाया?
02:43तेरे बेटे को थोड़ी अकल देते, लड़के को बहु बना कर घर में ले आया है.
02:49अब क्या होगा? हम दुनिया को क्या मूँ दिखाएंगे?
02:55मा बेकार में परिशान हो रही हो.
02:57दीपक आपके सारे काम करेगी, और एक अच्छी बहु की तरह आपके साथ रहेगी.
03:02देखना. पहले तुझ खुद तो क्लियर कर ले के यह कुछ करेगा या करेगी?
03:08बाद में हम सोचते हैं कि हम क्या करें?
03:11बहु की आने के बात क्या करते हैं? मूँ दिखाएं की रस्म. तो आप भी वही कर लीजे.
03:17आप चाहें तुम्हें पूरे महले में न्योता दे आती हूँ.
03:21अरे रहने दे. तेरी वज़़से बेज़दी और ज्यादा होगी.
03:27आई बड़ी. मेरा मतलब है आया बड़ा न्योता देने माला.
03:31अगले दिन सुबह के वक्त, दीपक बड़ी नजाकत से चलता हुआ सब के लिए चाय बना कर सुबह सुबह बालकनी में आ जाता है.
03:39प्रणाम ममी जी, प्रणाम पापा जी, ये देखे, चाय बिलकुल आपकी पसंद की है.
03:46मुझे रिशब ने सब कुछ बता दिया था, कि आपको क्या क्या पसंद है.
03:52ए बगवावन, ये सब क्या हो रहा है, ये क्या नौटंकी है?
03:59नौटंकी कहा है? मा देखे तो, मेरी, मेरा दीपक आपका किता ख्याल रख रहा है?
04:04लाओ अब जो भी है, जैसे पी है, चाय पीएंगे ही सही. थोड़ी दिर के बाद.
04:13वैसी दीपक, चाय तो तुमने बहुत अच्छी बनाई है. चलो, कुछ तो अच्छा हुआ. अगले दिन.
04:20अजी सुनते हैं, आज पैरों में बड़ा दर्द हो रहा है. लग रहा है घुटनों में, फिर से कुछ न कुछ प्राबलिम हो रही है.
04:30डाक्टर ने वो दवाई दी थी, उसकी मालिश करो न अपने घुटनों पर, आराम मिल जाएगा.
04:35वो क्या है ना, खुद के हाथों से ठीक से मालिश नहीं हो पाती.
04:41अरे मम्मी जी, आपको परिशान होने की क्या जरुरत है? मैं हो ना? लाइए, मैं आपके पैरों पर मालिश कर देता हूँ. मेरा मतलब कर देती हूँ.
04:52अरे रहने दे, रहने दे. घर में बहु होती तो सेवा करती. यहां तो आदमी बहु बन कर बैठा हुआ है.
05:00मम्मी जी, नराज मतो ये. एक बार मुझे मौका तो दीजिया आपकी सेवा करने का.
05:07अच्छा, चीक है, चीक है. यह ले दबाई लगाते हैं.
05:11दीपक बहुत अच्छे तरीके से घुटनों की मालिश करता है. थोड़ी दिर के बाद.
05:18इतना आराम मिल रहा है, क्या बताऊं? ऐसा लग रहा है, मेरे घुटनों में कभी तकलिफ थी ही नहीं.
05:25लगता है, तुम्हारी लड़का बनी हुई बहु तुम्हें पसंद आने लगी है?
05:31ऐसा कुछ भी नहीं है. वो तो बस इतने अच्छे से मालिश की, इसलिए मैंने इसकी तारीफ करती.
05:38मम्मी जी, पापा जी, आपस में लड़ाई नहीं करते.
05:42अच्छा, आप ये बताएं, शाम के खाने में क्या खाएंगे? पनीर, दाल, मखनी, पुलाओ, कुछ भी स्पेशल बता दीजिए.
05:52अरे भई, ये सारी चीज़े मुझे तो खाने में बहुत ही पसंद है.
05:56तुम क्या कोई औरत हो? जो पनीर, दाल, मखनी बनाओगी? अरे लड़का हो तो लड़के की तरह बिहेव किया करो ना?
06:07भले ही मैं लड़का हूँ तो क्या हुआ? अब तो मैं रिशब की पत्नी और आपके घर की बहुँ हूँ. तो मुझे उसी तरह से रहना पड़ेगा ना?
06:17आचा ठीक है ठीक है, जो तुम्हें पसंदे बरालो. आदमी रसोय में खाना बनाती हुए कैसे लगते हैं, जरा मैं भी तो लीकूं. शाम को दिपक सब के लिए अच्छा सा खाना बना कर डाइनिंग टेबल पर लगा देता है. रिशब आफिस से जब लोट कर आता है, सब �
06:47मेरा मतलब बनाते हो. तुम्हारी इसी अदा की वज़े से तो मुझे तुमसे प्यार हो गया. आरे बहुत हो गया, आदमी होकर आदमी से प्यार करते हुए. अलो लकिन कुछ भी कहो, जरा खाना खा कर तो देखो रिशब की मा, मज़ा हो जाएगा. हाँ, वैसे बात तो आ�
07:17देपी का होती.
07:47लंबे बाल थे और जिस साड़ी पहनी हुई थी. हाथ में चाई की ट्रे लेकर वहाँ आती है. आरे ये कौन है? रातो रात हमारा लड़का बहु, लड़की बहु बन गया क्या? मुझे लगता है कोई सपना देख रहा है. इतनी सुन्दर बहु तो हमने सपने में भी नहीं
08:17मुझे पहचाना नहीं? मैं दीपक नहीं दीपी का हूँ. इतने दिन से लड़की के कपड़े पहन कर आपकी घर में आपकी बहु बनी हुई थी.
08:23मा ये दीपक नहीं, दरसल ये दीपी का थी
08:27लेकिन इसे लड़कों की तरह रहने का शौक था
08:30और इसे लड़की की तरह रहना मन्सूर नहीं था
08:33इसलिए मैं इसे लड़के के रूप में आपकी बहु बना कर यहां ले आया
08:36तो फिर अचानक ये उसका रिदय परिवर्तन और रूप परिवर्तन कैसे हो गया
Be the first to comment