00:02अजित एक चोटे कस्बे में रहने वाला सीधा साधा लड़का था
00:06उसकी शादी दिल्ली के रहने वाली सामया के साथ हो गई
00:10सामया बहुत ही fashionable लड़की थी
00:12अजित की नौकरी चोटे कस्बे में होने की कारण
00:16सामया भी अजित के साथ चोटे शहर में रहने के लिए आ गई
00:19सामया तुम्हारा ड्रेस कुछ ज्यादा चोटा है
00:24इसे पहन कर यहां बाहर मत निकलना
00:27हारे तुम्हें पता नहीं मैं दिल्ली की मॉडल लड़की हूँ
00:32और मैं तो हमेशा ऐसे ही कपड़ पहनती हूँ
00:46सामया मुझे तुम्हारे कपड़ों से कोई परिशानी नहीं है
00:50लेकिन अगर तुम ऐसे बाहर जाओगी तो लोग तुम्हें अजीब धंग से देखेंगे
00:54अच्छा ठीक है अब तुम आफिस जाओ तुम्हारा आफिस जाने का वक्त हो गया है
00:58अजीद को लगता है कि शायद सौमया ने उसकी बात मान ली है
01:03वो अफिस चला जाता है थोड़ी दिर बाद सौमया अपना शौट ट्रेस पहन कर घर से बाहर सबजी लेने के लिए जाती है
01:10हाई या आदा किलो टामाटर दीना
01:13मडम जी कहीं बाहर से आई लगते हो पहले बार सहर में आई हो का तुमसे क्या मतलब और तुम मुझे ऐसे घूर घूर के क्यूं देख रहे हो
01:25अरण नए नए ऐसे कोई बात नहीं है बस आपके कपड़ों को द्यक कर लग मेरा क्या आप सहर की रहने वाली है
01:33तुम अपने काम से काम रखो मैं चाहिए कुछ भी पहनू तुम्हें उससे क्या
01:37साम्या सबसी लेकर अपने घर चली जाती है शाम को अजित घर वापस आता है
01:43सौम्या, कल मम्मी पापा आ रहा है
01:45देखो, तुम ना उनके सामने साड़ी पहन कर रहना
01:49वनना मम्मी बुरा मान जाएंगे
01:51हरी यार, तुम भी ना जाब देखो
01:55तब मेरे कपड़ों को लेकर परिशान रहते हूं
01:57अरे, बस दो दिन के तो बात है सौम्या
02:00उसके बाद तो मम्मी पापा वापस घर चले जाएंगे
02:03अच्छे, ठीक है, ठीक है
02:05अगले दिन अजित आफिस चला जाता है
02:08और पीछे से सौम्या के सास ससुर घर पर आते हैं
02:11लेकिन अजित के घर पर ना होने की वज़़ज़ से
02:14सौम्या ने साड़ी नहीं पहनी थी
02:16और वही छोटे कपड़ों में वो अपनी सास के सामने आ जाती है
02:20नमस्ते ममी जी, पापा जी, कैसे हैं आप?
02:24अरे मैं तो आखे बंद कर लेता हूँ
02:26ये बहु ने कैसे कपड़े पहने हुए हैं?
02:29राम राम राम राम
02:29अरे बहु तुमको जरा भी शेर्म नहीं आती
02:33अपने सास सुर के सामने इतना छोटा अड्रेस पहन कर घूम रही हो
02:38क्यो जितने तुमको बताया नहीं? क्यो हम लोग तुमसे मिलने आ रहे हैं?
02:43बताया तो था, लेकिन वो क्या है न मम्मी जी, पापा जी
02:47मुझे तो ऐसे ही कपड़ पहननी के आदत है
02:49जरा मेरे साथ चल, मैं तुझे सिखाती हूँ कैसे कपड़े पहनते हैं
02:55सौमया की सास सौमया का हाथ पकड़ कर उसे कमरे में ले जाती है
02:59और उसकी शौट ब्रस की ऊपर जबरदस्ती साड़ी पहना देती है
03:03साड़ी पहनने के बाद सौमया जैसे ही घर का काम करना शुरू करती है
03:07बार-बार जमिन पर गिर पड़ती है
03:09ये भगवान, ये क्या मुसिबत है?
03:12ये पांच मिटर के साड़ी पहन कर काम करना?
03:16मेरे लिए तो बहुत मुश्किल है
03:17क्यों बहु? आप पता चलाना कैसे कप्ड़ पहनने चाहिए
03:22तो मम्मी जी, आपके कहने का मतलब है कि
03:26आप लोगों के साड़ी मुझे साड़ी पहननी चाहिए
03:29हाँ बहु, तुमारी सास के कहने का यही मतलब है
03:34अब आगे से ध्यान रखना
03:36शाम को जब अजीत आफिस से लट कराता है
03:39तो साड़ी में बेहाल देखकर उसे बहुत हसी आती है
03:43लेकिन अगली सुबह जब साड़ी में सो कर उठती है
03:46तो उसके कपड़े देखकर अजीत और उसके माबाप का सर घूमने लगता है
03:50अरे सुम्या तुमने ये क्या पहना है
03:55आपकी मम्मी ने साड़ी पहनने के लिए कहा था
03:59तो मैंने साड़ी पहन ली
04:00लेकिन सुम्या तुमारी साड़ी तो घुटनों तक उची है
04:04जैसे ये साड़ी ना हो कोई मिनिस कटो
04:07वो क्या है ना बेबी
04:09तुम्हारी मम्मी ने मुझे सर्फ साड़ी पेनने के लिए कहा था
04:12उसकी लंबाई नहीं बताई थी
04:14ये भगवान ये कैसे बहु पल्ले पड़ी है
04:18अरे ये क्या अजुबा बन कर गूम रही है
04:20लगता है मुझे फिर से आखे बन करके ही रहना पड़ेगा
04:24अरे पापाजी आप एक बार आँके बंद करी लीजिए
04:28बार बार डायलोग मारते रहते है
04:30ये तुमने क्या हुल्या बना लिया है सौम्या
04:33अजित के मम्मी और पापा अपने बहु की हरकतों से परिशान होकर वापस चले जाते हैं
04:39अजित सौम्या को समझाने की कोशिश करता है लेकिन वो उसकी कोई बात नहीं सुनती
04:44एक दिन सौम्या को ज्यादा ही फैस्टेबल कपड़े पहन कर घर से बाहर निकलती है
04:49उस छोटे से कस्बे की लोगों ने उस तरह के कपड़े कभी देखे ही नहीं थे
04:53अर बहान का बात है तुम्रे पास पहनने को कपड़े नहीं का लगता है बहुत गरीब हो जलो मेरे साथ मैं तुम्हें अपनी पुरानी साड़ी दे दूंगी हाँ
05:04पागल हो गई ये क्या ये आजकल का फैशन है फैशन सौम्या जैसे ही थोड़ा आगे बढ़ती है अरे देखो बिचारी कितनी गरीब है इसके कपड़े भी फटे हुए है लो ये दस रुपे रख लो हाँ कोई बात नहीं
05:20अरे मैं कोई भिखारी थोड़ी ना हूँ कितनी अजीब लोग है यहां के इनको फैशन का मतलब भी नहीं पता थोड़ा आगे जाने के बाद कुछ बच्चे सौम्या को देख कर जोर-जोर से हस्ते लगते हैं अब तुम लोगों को क्या प्राब्लम है क्यों हस रहे हो ऐसे
05:50कपड़े बैन कर गली-गली में घूंगता है और लोगों से पैसे मंगता है तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है मैं कोई बहुर प्या नहीं हूँ लेकिन आपकी आलत देखकर तो ऐसा ही लग रहा है तब ही वहां पर एक आउरत आती है आरा बच्चो यह तो कोई पागल �
06:20मेरे फैशन को नजाने क्या समझ बैठे है और सौमया अपने घाल लाटाती है और जोर-जोर से रोने लगती है सौमया को इस तरह रोता देखकर अजित को कुछ समझ नहीं आता और क्या हुआ सौमया तुम इतना क्यों रो रही हो किसे ने कुछ कहा क्या इस शेयर के लोग �
06:50पर जोर-जोर से खट-कटाने की आवाज आती है बाहर जाकर देखते हैं तो दो-तिन ओरते वहां पर खड़ी हुई थी कौन है आप लोग और क्या हुआ अरे आपकी घर में एक आरत रहती है ना फटे हुए कपड़े पहन कर घुमती है हम उसे ले जाने आये हैं कहां ले ज
07:20है ना आप ऐसा नहीं कर सकते लेकिन क्यों भाई साहब क्योंकि वो कोई पागल औरत नहीं मेरी छोटे कपड़ों वाली बीवी है और उसका दिमाग बिल्कुल ठीक है बस कपड़े थोड़े कम है
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