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  • 3 months ago

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Transcript
00:00बंजारन बहू
00:01कमला एक बहुत स्वार्थी महिला है
00:04उसने पैसों के लिए एक ऐसे इंसान से शादी की
00:07जो पहले से शादी शुदा और एक बच्चे का पिता भी था
00:11कमला के पते को मरे हुए एक अर्सा बीट गया है
00:14अब वो अपने साथले बेटे वैभा के साथ रहती है
00:18वैभा के दिल में अपनी मा को लेकर इतना डर है
00:21कि वो अपनी मा के सामने एक शब्द नहीं बोल पाता
00:25उसकी मा जो कहती है उसको सर जुका कर वही मानना पड़ता है
00:29वैबाव तुमने अभी तक घर का काम क्यों नहीं किया
00:33तुमसे कितनी बार कहा है कि सूरज निकलने से पहले तुम घर की साफ सफाई पूरी कर दिया करो
00:39वैबाव कुछ नहीं बोलता
00:41चुपचाब सर जुकाई अपनी मा की बात सुनता रहता है
00:45तभी पास में खड़ा नौकर सुखराम कहता है
00:48मालकिन वैबाव बाबा को राज से तेज बुखारे
00:53इसलिए वो सुबह जल्दी उठ नहीं पाए
00:56उनके बदले मैं घर की साफ सफाई कर देता हूँ
01:00इसे कोई बुखार बुखा नहीं है
01:02मैं इसे अच्छी तरह से जानती हूँ
01:04ये सब काम ना करने के बहाने है
01:06सुखराम काका बोल दो इसे
01:08सारे घर का काम यहीं करेगा
01:11और इससे समय पर अपना काम पूरा नहीं किया
01:14तो इससे आज का खाना भी नहीं मिलेगा
01:17मगर मालकिन वैभव बाबा की सच में ही तब्यत खराब है
01:22आप एक बार देख तो लीजिए
01:24कमला बिना कुछ बोले वहां से चली गई
01:27और बेचारा वैभव तेज बुखार में भी काम करता रहा
01:31कमला वैभव की शादी एक ऐसी लड़की से कराना चाती थी
01:35जो अनपड़ हो
01:36और कमला से इसी तरह डरे जिस तरह वैभव डरता है
01:40ताकि वैभव की सारी जायदाद और धन दौलत उसकी मुठी में रहे
01:45लेगिन आज की जमाने में ऐसी लड़की मिलना मुश्किल है
01:48कमला कार में यही सब कुछ सोचती जा रही थी कि तबी रास्ते में
01:53अरे ड्राइवर तुमने कार क्यों रोक दी और ये इतना शोर कैसा
01:57बड़म आगे कुछ बंजारों का खेल चल रहा है
02:01इसलिए भीड लगी है
02:02मैं अभी भीड को साइड में करवा कर कार निकालता हूँ
02:05ड्राइवर भीड को साइड करके कार निकालने की कोशिश करने लगा
02:09कि तब ही कमला की नजर रसी पर चल रही एक फुलवा नाम की बंजारन पर पड़ी
02:15क्यों न मैं इस बंजारन की शादी भैभों से करा दूँ
02:20ये तो अनपड लग रही है
02:22मेरे पैरों तले दब कर भी रहेगी
02:25मुझे अभी इसके माबाप से बात करनी हो लो
02:28ये सोचकर कमला ने उन बंजारों से बात की
02:32और उन्हें शाम को अपनी घर बुलाया
02:34फुल्वा की माता पिता वहाँ से लेकर आ गए
02:37उन्होंने इतना आलीशान गर पहले कभी नहीं देखा था
02:41अच्छा हुआ आप लोग आ गए
02:43देखे मुझे घुमा फिरा कर बात करने की आदत नहीं है
02:46इसलिए सीधे सीधे मुद्दे पर आती हूँ
02:49मुझे आपकी बेटी बहुत पसंद है
02:51मैं आपने इकलावते बेटे की शादी
02:53आपकी बेटी फुल्वा से कराना चाहती हूँ
02:56इसके बदले में आप जो चाहो वो ले सकती है
02:59तब भी फुल्वा की मा कहती है
03:02ये का कह रही है मैं साब
03:05कहीं आप हमारी गरीबी का मजाग तो नहीं उड़ा रही ही न
03:08आप मेरे बेटे से मिल लो
03:10अगर आपको मेरा बेटा पसंद आता है
03:13तो मैं कल से ही शादी की तैयारी शुरू कर दूँगी
03:15सुखराओ, सुखराओ
03:18बैबो को लेकर आओ
03:19फुलवा अपनी मा के कान में फुस फुसाती है
03:23मा, कहीं इस बेम साप कच्छूर अपागल तो ना है
03:28फुलवा अपनी मा से बात कर रही ही होती है कि वैबो वहां आता है
03:32फुलवा उसे देखती ही रह जाती है
03:34और उसके माता पिता उसकी शादी तैय कर देते हैं
03:37शादी वाले दिन किसी को फुलवा और वैभो की बेमेल विवा की बात समझ में नहीं आती। फिर भी एक औरत कमला से पूछी लेती है।
04:07अब कमला को समझ में नहीं आ रहा था कि इस बात का क्या जवाब दे। वो कुछ देर चुप रही और सूच समझ कर कहती है।
04:37कमला की ये बाते सुखराम भी सुन रहा था। उसनी ये सारी बाते वैभो को जाकर बता दी।
04:45काका मैं तो फुलवा को जानता भी नहीं फिर मा मेरे बारे में जूट क्यूं कह रही है।
04:51अरे बेटा तुम कितने भोले हो तो मैं कुछ भी नहीं पता।
04:57तुम्हारे पिता अपनी सारी संपती तुम्हारे नाम करके गए है।
05:01तुम्हारी मा नहीं चाहती कि ये संपती तुम्हें मिले।
05:05इसलिए उन्होंने तुम्हारी अनपड़ लड़की से शादी करवाई।
05:10ताकि तुम्हारी तरह वो भी अपने हक के लिए आवाज ना उठा सके।
05:15सुखराम काका मैं क्या करू आप ही बताओ।
05:18मा के सामने आते ही मेरे हाथ पैर कांपने लगते हैं।
05:22वे दुनों बात कर ही रहे थे कि अचानक कमला वहा गई।
05:28कमला को देख कर दोनों घबरा गए।
05:31तुम दोनों फिर कभी बाते कर लेना। अभी फेरों का समय हो गया है। चलो जल्दी आओ।
05:37इस तरह फुलवा और वैभव की शादी हो गई।
05:39अगले दिन कमला ने फुलवा को बुलाया और उसे नसीहत देने लगी।
05:43देख बंजारन, तुझे मैंने अपनी बहु बना तो लिया है।
05:48लेकिन तुझे इस घर में आग, कान, मुँ बंद करके रहना होगा।
05:52घर का काम कर और अपने पती से मतलब रख समझी।
05:57कमला का ऐसा रवया फुलवा को बिल्कुल समझ में नहीं आया।
06:00उसने वैभो से इस बारे में बात की।
06:03सुनिये न, माजी ने जिस तरह मुझसे बात की, मुझे अच्छा नहीं लगा।
06:08शादी से पहले तो वो मुझसे बहुत अच्छे से बात कर रही थी।
06:12लेकिन शादी के बाद उन्हें का हो गया।
06:15तुम ज्यादा मत सोचो, जैसा मा कहती है वैसा ही करो।
06:19ये कहकर वैभो वहां से चला गया।
06:21आगले दिन वैभो को घर के नौकरों की तरह काम करता देख, फुलवा को बहुत हैरानी हुई।
06:27फुलवा ने इस बारे में सुख्राम काका से बात की, तो सुख्राम काका ने फुलवा को सारी बात बता दी।
06:33अब फुलवा को समझ में आ गया कि उसकी सास ने एक बंजारन को बहु क्यों बनाया।
06:38एक दिन वैबो घर का काम कर रहा था, तब ही उससे काज की प्लेट टूट गई।
06:44वैबो को वहां खड़ा देख, कमला ने छड़ी से उसे मानना शुरू कर दिया।
06:52उसके पैर में काज चुब गया और खून बहने लगा।
06:56लेकिन फिर भी कमला उसे मारे जा रहे ही थी, मारे जा रहे ही थी।
07:00ये देख कर फुलवा ने कमला के हाथ से छड़ी छीन ली और तोड़ कर फैंग दी।
07:05बंजारन तेरी इतनी हिम्मत तुने मेरे हाथ से छड़ी छीनी।
07:11कमला फुलवा को थपड मानने ही वाली थी कि फुलवा उसका हाथ पकड़ लीती है।
07:16आज की बाद मेरे या वैबो जी के उपर हाथ उठाने की सोच यू भी ना, समझी ससुमा।
07:33ये कहकर फुलवा वैबो को लेकर वहाँ से चली गई।
07:37उसने वैबो के पैर पर पट्टी बान दी, उसके आंसू पूँचे।
07:40वैबो ने पहली बार किसी के दिल में अपने लिए इतना प्यार महसूस किया।
07:45अब फुलवा वैबो का हर काम में हाथ पटाती। उसका बहुत खयाल रखती।
07:50इस तरह दोनों बहुत ज्यादा नजदी का गए।
07:53वहीं दूसरी और कमला सारी जायदात अपने नाम करने की साज़िश करने लगी।
07:58और एक दिन।
08:00वैबो वैबो जल्दी बाहर आओ।
08:03कमला की आवाज सुनकर वैबो और फुलवा अपने कमरे से बाहर आगे।
08:08जीमा आपने बुलाया।
08:10ये ले, इन कागजों पर साइन कर दे।
08:14वैबो कागजों पर साइन करने ही वाला था कि फुलवा वैबो के हाथ से पैंच शिन कर कहती है।
08:21ना वैबो जी, आप इस पर हस्ताक्षन नहीं करेंगे।
08:26आओ बंजारन, मैं तुझसे बात नहीं कर रही।
08:30ये बात मेरे और मेरे बेटे के बीच की है, जब चाप पैंदे दे, नहीं तो तेरी खाल उधर लूगी।
08:38आओ ससुमा, बंजारन की खाल इतनी भी धीली ना होवे के कोई भी उधर लेवे।
08:46जो यकीन आता हो, तो देख ले उतार की।
08:50और हाँ, बंजारन जरूर हूँ, पर अनपढ़ना हूँ, मनने भी पता है कि किसी भी कागज पर साइन करने से पहले उसे अच्छी तरह पढ़ लेवें।
09:02देन देती है या नहीं।
09:04यह कहकर कमला फुलवा को मारने आई, तो फुलवा ने कमला को धक्का दे दिया और वो नीचे गिर गई।
09:11कमला डर कर वहां से भाग गी।
09:13अब फुलवा ने वो कागज उठाए, और वैभो के साथ सीधा वकिल के पास चली गई।
09:19वकिल ने वो कागस देखिया और फुलवा को बताया
09:21वैबो के पिता की सारी जायदाद और संपती वैबो के नाम है
09:26लेकिन वैबो की सौतेली मा इस संपती को अपने नाम कराना चाहती है
09:31इसलिए इन कागस उपर वो साइन करा रही थी
09:34तो अब हमें का करना चाहिए वकिल साब?
09:38वकिल ने फुलवा और वैभो को सब कुछ अच्छी तरह से समझा दिया
09:42अब दोनों घर पर पुलिस को लेकर पहुँचे
09:45खमला पुलिस को देख कर खबरा गई
09:47पुलिस ने कहा
09:48आपके नाम की कंप्लेंट हुई है
09:51आपको हमारे साथ थाने चलना होगा
09:53कंप्लेंट? कैसे कंप्लेंट?
09:59आप अपने साथेले बेटे पर बहुत अत्याचार करती हो
10:01धोखे से सारी जायदाद अपने नाम करा रही है
10:05अब नहीं इंस्पेक्टर साहब
10:08जरूर ये मेरी बहु की कोई साजिश है
10:10इस तरह गलत कंप्लेंट की है
10:13माडम शिकात आपकी बहुने नहीं बलके आपकी बेटे वैभाओ ने की है
10:17कमला वैभो का नाम सुनकर दंग रही
10:21जिस बेटी ने कभी उसके सामने सर नहीं उठाया था
10:24आज वही बेटा उसके सामने पुलिस को लिया आया है
10:27बैबाओ, तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम पुलिस को लिया है
10:31हाँ मा, मैं लाया हूँ पुलिस को
10:35और मेरे अंदर इतनी हिम्मत कभी ना आती अगर फुलवा मेरा साथ ना देती
10:40आपने बंजारन बहु को लाकर अपने ही पैर पर कुलाड़ी मारी है मा
10:45मेडाम, अपकी बात खत्म हो गई हो तो चलो हमारे साथ
10:49वाइबाओ, मुझे माफ कर दो, मुझे थाने मत बेजो
10:54आज की बात मैं तुम्हें कभी नहीं मारूँगी, तुम्हें कभी परिशार नहीं करूँगी, मुझे माफ कर दो
10:59वाइभव अपनी कम्प्लेंट वापस ले लेता है और पुलिस महां से चली जाती है
11:04वाइभव अपनी सौतेली महां से कहता है
11:07मैंने पुलिस को वापस तो भेज दिया है लेकिन मैं आपको माफ नहीं कर सकता
11:12आपने बचपन से आज तक कभी मेरे सर पर हाथ नहीं रखा
11:17हमेशा मुझे मारती रही
11:19नौकरों की तरह बरताओ करती रही
11:21आप इस घर में नहीं रह सकती
11:23चली जाएए यहां से
11:25कमला घर छोड़ कर चली गई
11:28और सड़क किनारे खड़ी होकर सोचने लगी
11:31काश मैंने बैभो को मा की तरह प्यार किया होता
11:36तो आज मैं इस तरह से बे सहरा ना हो जाती
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