00:06इसमें राम और सुग्रीव के बीच मित्रता स्थापित होती है और बाली के वध की प्रतिग्या ली जाती है।
00:11इस अध्याय में हनुमान की भूमिका भी अत्याय वध की ओर बढ़ रहे थे।
00:27उनके मन में आशा की एक नई किरन जाग उठी थी।
00:31सुग्रीव से भेंट रिश्यमूक परवत पर पहुँचकर हनुमान ने राम और लक्षमन का परिचय सुग्रीव से कराया।
00:37सुग्रीव पहले तो संकोच में था लेकिन जब उसने राम के तेज और विनमरता को देखा तो उसका भय धीरे
00:43धीरे दूर हो गया।
00:46सुग्रीव ने विनमरता से कहा।
01:15ये राम, आप इतने दुखी क्यूं है।
01:17राम ने सीता के हरण की पूरी कथा सुनाई।
01:20आभूशनों की पहचान।
01:22सुग्रीव ने कहा, मैंने आकाश में एक राक्षस को एक स्त्री को ले जाते हुए देखा था।
01:27उस त्री ने कुछ आभूशन नीचे गिराए थे।
01:29प्रमाण
01:30सुग्रीव ने वे आभूशन राम को दिखाए।
01:33राम ने उन्हें पहचान लिया।
01:34उन्होंने भावुख होकर कहा, ये सीता के ही आभूशन है।
01:38लक्ष्मन की पहचान
01:39लक्ष्मन ने कहा, मैं केवल उनके पायल को पहचान सकता हूँ,
01:43क्योंकि मैंने कभी उनके चहरे की और नहीं देखा।
01:45ये सुनकर सभी भावुख हो गए।
01:48मित्रता का प्रस्ताव
01:49अब राम और सुग्रीव दोनों ने एक दूसरे की सहायता करने का निर्ने लिया।
01:53हनुमान ने अगनी को साक्षी मान कर उनकी मित्रता कराई।
01:57अगनी साक्षी मित्रता
01:58दोनों ने अगनी के सामने प्रतिग्या की,
02:01राम सुग्रीव की सहायता करेंगे,
02:03शुग्रीव राम की साहयता करेगा
02:05राम की प्रतिग्या
02:06राम ने द्रण स्वर में कहा
02:08मैं बाली का वध करूँगा और तुम्हें तुम्हारा राजय वापस दिलाओंगा
02:12सुग्रीव की आशा
02:13ये सुनकर सुग्रीव के हिरदै में आशा जाग उठी
02:16उसे विश्वास हो गया कि अब उसका दुख समाप्थ होगा
02:20संदेह
02:20फिर भी सुग्रीव के मन में एक शंका थी
02:23उसने सोजा
02:24क्या राम सच में बाली को हरा सकते हैं?
02:27राम की शक्ती का प्रमान
02:29सुग्रीव ने राम की शक्ती की परीक्षा लेने का निश्चे किया
02:46युध की तैयारी
02:47राम और सुग्रीव ने बाली के विरुध युध की योजना बनाई
02:51नई शुरुवात
02:52इस प्रकार एक नई मित्रता और एक बड़े संगरश की शुरुवात होई
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