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रामायण: किष्किंधा कांड — अध्याय 63l Ramayana: Kishkindha Kanda — Chapter 63.
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00:00किशकिन्धा कांड का अध्याय 63, कथा में रणनीती, संगठन और उदेश्य की सपष्ट दिशा का अध्भुत उधारन प्रस्तुत करता है।
00:08अब समय आ चुका है कि राम अपनी प्रिय सीता की खोज के लिए विशाल अभ्यान आरंभ करें।
00:14इस अध्याय में सुग्रीव अपनी वानर सेना को संगठित कर चारों दिशाओं में भेजता है।
00:44उसने उचे परवत पर खड़े होकर पूरी वानर सेना को संबोधित किया।
00:48हे वीरों, अब समय आ गया है कि हम अपने धर्म और मित्रता का पालन करें।
00:52उद्देश्य की घोष्णा।
00:54सुग्रीव ने स्पष्ट कहा, हमारा लक्ष केवल एक है, माता सीता की खोज।
01:15पश्चिम दिशा, पश्चिम की ओर भी एक शक्तिशाली दल भेजा गया, उन्हें समुद्र तटों और दूरस्थ द्वीपों की खोज करनी
01:22थी।
01:23उत्तर दिशा, उत्तर दिशा में भीजे गए वानरों को हमाले और बर्फीले क्षेतरों की खोज करनी थी।
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01:58जब तुम सीता से मिलो, तो ये उन्हें देना. इससे उन्हें विश्वास होगा कि तुम मेरे दूत हो.
02:03हनुमान की भक्ती. हनुमान ने अंगूठी को अपने मस्तक से लगाया. उनकी आखों में भक्ती और संकल्प की जोती थी.
02:10उन्होंने कहा प्रभू, मैं आपकी आज्या का पालन अवश्य करूँगा.
02:13समय सीमा. सुग्रीव ने सभी दलों को एक समय सीमा दी. एक महीने के भीतर लोट कर समाचार देना होगा.
02:20जो समय पर नहीं लोटेगा, उसे दंड मिलेगा. यात्र का आरंभ. सभी वानर्दल अपने अपने मार्ग पर निकल पड़े. वनों,
02:27परवतों, नदियों और समुद
02:40निक्षा कर रहे थे. उनकी आखों में आशा थी.
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