00:00सुन्दरकांड का अध्याय सरसट, रामाण का सबसे रोमांचक, प्रेणादायक और दिव्य प्रसंगों से भरा हुआ भाग है.
00:08यहां से कथा एक नहीं उचाई पर पहुँचती है, जहां हनुमान अपनी अध्धुत शक्ती, बुद्धी और भक्ती का परिचय देते
00:16हैं.
00:30समुद्र तट पर खड़े वानरों के बीच अब एक नई आशा जन्म ले चुकी थी. अभी कुछ ही क्षण पहले
00:36तक जहां निराशा और हताशा थी, अब वहां उत्साह और विश्वास का वातावरण था. इस परिवर्तन का कारण थे हनुमान.
00:52हनुमान का दिव विरूप
00:58उनकी आँखों में तेज चमक रहा था और उनकी वानी में अद्भुत आत्मविश्वास था.
01:04संकल्प
01:05हनुमान ने आकाश की ओर देख कर कहा, मैं इस समुद्र को पार करूँगा. मैं लंका पहुँचकर माता सीता का
01:13पता लगाऊंगा और प्रभु राम का कार्यपूर्ण करूँगा.
01:17राम का स्मरण
01:18उन्होंने मन ही मन राम का स्मरन किया
01:21राम का नाम लेते ही उनके भीतर शक्ती का संचार और भी बढ़ गया
01:27महान चलांग
01:28हनुमान एक उचे परवत पर चड़ गए
01:30उन्होंने अपने शरीर को और भी विशाल बना लिया
01:33फिर एक जोरदार गरजना की और आकाश की ओर उचल पड़े
01:38प्रकृती की प्रतिक्रिया
01:40उनकी चलांग इतनी शक्तिशाली थी कि परवत हिल उठे
01:44व्रिक्ष उखड गए
01:45समुद्र में विशाल लहरे उठने लगी
01:48जैसे प्रकृती स्वयम उनके इस महानकारी की साक्षी बन रही हो
01:53आकाश में उड़ान
01:54हनुमान अब आकाश में उड़ रहे थे
01:57नीचे अथा समुद्र
01:58उपर अनंत आकाश
02:00और बीच में एक वीर योध्धा
02:02जो अपने लक्ष की ओर बढ़ रहा था
02:05मैनाक परवत का प्रकट होना
02:07कुछ दूरी तै करने के बाद
02:09समुद्र के भीतर से
02:10एक स्वर्णिम परवत उपर उठा
02:12मैनाक परवत
02:13विश्राम का प्रस्ताव
02:15मैनाक परवत ने कहा
02:17हे हनुमान तुम महान कार्य पर निकले हो
02:20Kripiya kuch saumee vishraam karo
02:22Hanuman ka uttar
02:24Hanuman nne venambrata se kaha
02:26Aapka prastau sammaman niyye hai
02:28Lekin main teb teb teb vishraam nnehi kar saakta
02:31Jib teb prabhu raam ka kaare poonh nne hao jaye
02:34Ágye badaona
02:35Ye kahkar Hanuman bina rukye ágye bada gaye
02:39Sursa ka sámna
02:40Ágye badaate huye
02:42Eek vishal rahaqshasi unke saamne prakatt huyi
02:45Sursa
02:45Chunoti
02:47Sursa ne kaha
02:49देवताओं ने मुझे आधेश दिया है कि मैं तुम्हें निगल जाओं।
02:53बुद्धी का प्रयोग
02:54हनुमान ने समझ लिया कि ये एक परीक्षा है।
02:57उन्होंने अपने शरीर को विशाल कर लिया।
03:00सुर्सा ने भी अपना मुख और बढ़ा कर लिया।
03:03चतुराई
03:03अचानक हनुमान ने अपना आकार छोटा कर लिया।
03:07और तुरंत सुर्सा के मुख में प्रवेश करके बाहर निकलाए।
03:11आशीरवाद
03:12सुर्सा प्रसन्न हो गई।
03:14उसने कहा तुमने बुद्धी और बल दोनों का परिचे दिया है।
03:18तुम अपने कारे में सफल होगे।
03:21सिम्हिका का आक्रमन
03:22आगे बढ़ते हुए एक और भयानक राक्षसी प्रकट हुई।
03:26सिम्हिका
03:27चाया पकड़ना
03:28सिम्हिका ने हनुमान की चाया पकड़ ली।
03:31हनुमान की गती रुख गई।
03:34युद्ध
03:34हनुमान ने तुरन समझ लिया कि ये शत्रु है।
03:37उन्होंने सिम्हिका का वध कर दिया।
03:40आगे की उडान
03:41अब कोई बाधा नहीं थी।
03:44हनुमान तेजी से लंका की ओर बढ़ने लगे।
03:47लंका का दर्शन
03:48कुछ समय बाद उन्हें दूर एक स्वरणिम नगरी दिखाई दी।
03:52लंका
03:53वो अत्यंत सुन्दर और भव्य थी।
03:56हनुमान का विचार
03:57हनुमान ने सोचा
03:59यही वो स्थान है जहां सीता माता है।
04:02लंका के पास पहुँचना
04:04हनुमान धीरे धीरे लंका के पास पहुँचे
04:06अब उन्हें सावधानी से कारे करना था
04:09छोटा रूप धारन करना
04:11उन्होंने अपना विचाल रूप त्याग दिया
04:14और एक छोटे वानर का रूप धारन कर लिया
04:16नई योजना
04:17हनुमान ने निश्चे किया
04:20अब मुझे गुप्त रूप से लंका में प्रवेश करना होगा
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