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रामायण: अरण्य कांड - अध्याय 52 ।Ramayana: Aranya Kanda – Chapter 52.
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00:00आरन्य कांड का अध्याय बावन, रामान की कथा का अत्यंत निर्नायक और रोमांचक प्रसंग है. इसमें राक्षस मारीच स्वन्ण मृक
00:08का रूप धारन करके पंचवटी में आता है. उसकी अध्भुत चमक और सुन्धरता देखकर सीता मोहित हो जाती हैं और
00:14राम से उसे प
00:28प्रकट होना और राम का उसका पीछा करना. पंचवटी का वन उस दिन भी शांत और सुन्धर दिखाई दे रहा
00:34था. सुभा की हलकी धूप व्रिक्षों की शाखाओं से चंकर धर्ती पर गिर रही थी. पक्षियों की मधुर्ध्वनी पूरे वन
00:41में गूंज रही थी. राम
00:54प्रकशस मारीच, जो रावन की योजना का हिस्सा बन चुका था, अपने मायावी रूप की तयारी कर रहा था. कुछ
01:00हिक्षणों में उसने अपना भयानक राक्षसी रूप छोड़ दिया और एक अद्भुत स्वन म्रिक का रूप धारन कर लिया. स्वन
01:07म्रिक का अद्भु
01:26स्वन म्रिक धीरे धीरे पंच्वटी की और बढ़ा, वो राम की कुटिया के आसपास घूमने लगा, कभी वो व्रिक्षों के
01:32पीछे छिप जाता, कभी खुले स्थान में आकर चमकने लगता. सीता की द्रिष्टी
01:37कुछ समय बाद सीता की द्रिष्टी उस म्रिक पर पड़ी. उन्होंने आश्चरय से कहा, प्रभु ये कैसा अद्भुत म्रिक है?
01:44सीता उस म्रिक की सुन्दर्ता देखकर अत्यंत मोहित हो गई. सीता का अनुरोध
01:50सीता ने राम से कहा, प्रभू, मैंने ऐसा सुंदर म्रिग पहले कभी नहीं देखा, यदी संभव हो तो इसे पकड़
01:56कर मेरे लिए ले आईए, उन्होंने आगे कहा, यदी ये जीवित पकड़ा जा सके तो बहुत अच्छा होगा, और यदी
02:02नहीं तो इसकी स्वर्निम तवच
02:03भी अत्यंत सुंदर होगी, लक्षमन की शंका, लक्षमन ने उस म्रिग को ध्यान से देखा, उनके मन में संदेह उत्पन
02:10हुआ, उन्होंने कहा, भाईया, ये साधारन म्रिग नहीं हो सकता, ये अवश्य किसी राक्षस की माया है, राम का निर्ने,
02:18राम ने भी उस म्रिग को
02:32सीता की रक्षा करना, लक्षमन ने गंभीरता से सिर जुका दिया, म्रिग का पीछा, राम धनुष और बान लेकर उस
02:39स्वन म्रिग के पीछे चल पड़े, म्रिग धीरे धीरे आगे बढ़ता गया, कभी वो पास आता, कभी दूर भाग जाता,
02:46मारीच की चाल, मारीच जानता
02:48था कि उसे राम को दूर ले जाना है, इसलिए वो उन्हें धीरे धीरे पंचवटी से दूर ले जाने लगा,
02:53वन के भीतर वो बार बार चल करता रहा, गहरा वन, कुछ समय बाद राम बहुत दूर वन के भीतर
03:00पहुँच गए, अब पंचवटी बहुत पीछे चूट चुट
03:02राम समझ गए कि ये वास्तव में कोई साधारन म्रिग नहीं है, अंतिमक्षन, अंतताह राम ने अपना धनुष उठाया, उन्होंने
03:10एक तेज बांड चलाया, वो बांड सीधे म्रिग के शरीर में लगा, मारीच का असली रूप, बांड लगते ही म्रिग
03:17गिर पड़ा, और
03:18उसी क्षन उसका मायावी रूप समाप्त हो गया, अब वहां राक्षस मारीच अपने असली रूप में दिखाई दे रहा था,
03:24अंतिम छल, मरने से पहले मारीच ने एक अंतिम छल किया, उसने जोर से पुकारा, हा सीते, हा लक्षमन, उसकी
03:32आवाज बिलकुल राम की आवाज
03:34जैसी थी, आने वाले संकट की शुरुवात, मारीच की ये पुकार दूर पंचवटी तक पहुचने वाली थी, और यही पुकार
03:42आगे चल कर एक बहुत बड़ी घटना को जन देने वाली थी, सीता हरंड
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