00:00अरण्यकांड का अध्याय उन्चास, रामायन के सबसे रोमांचक युद्ध प्रसंगों में से एक है।
00:06इसमें राक्षसी शूर्पनखा अपने अपमान का बदला लेने के लिए अपने भाईयों, खर और दूशन को उकसाती है।
00:13इसके बाद उनका सामना राम से होता है। ये सब घटनाएं वनस्थली, पंचवटी और दंड कारण्यक्षेत में घटित होती हैं,
00:22जहां लक्षमन और सीता भी इस संघर्ष के साक्षी बनते हैं।
00:26अरण्यकांड अध्याय उन्चास, खर दूशन का क्रोध और राम से भयानक युद्ध। पंचवटी का शांतवन अचानक एक भयानक घटना के
00:36कारण अशांत हो गया था।
00:38राक्षसी शूर्पनखा जिसकी नाक और कान लक्षमन ने काट दिये थे, अपमान और पीडा से व्याकुल होकर जंगल में भागती
00:45जा रही थी।
00:46उसकी आखों में क्रोध की आग जल रही थी। उसका हिर्दय बदले की भावना से भड़ चुका था।
01:18शूर्पनखा ने कहा, वन में दो मनुष्य रहते हैं, राम और लक्षमन, उन्होंने मेरा अपमान किया और लक्षमन ने मेरी
01:25नाक और कान काट दिये।
01:27खर का क्रोध ये सुनते ही खर का चहरा क्रोध से लाल हो गया। उसने जोर से गर्जना की। उसने
01:35तुरंट अपने राक्षस सैनिकों को बुलाया।
01:36राक्षसों की सेना
01:38खर ने अपने 14 भयानक राक्षसों को आदेश दिया। जाओ और उन मनुष्यों को तुरंट मार डालो। वे राक्षस अत्यंत
01:47शक्तिशाली और क्रूर थे। वे तुरंट पंचवटी की ओर चल पड़े।
01:51पहला युद्ध
01:52कुछी समय बाद वे राक्षस राम के सामने पहुँच गए। राम उस समय शांत भाव से खड़े थे। उन्होंने देखा
01:59कि भयानक राक्षस उनकी ओर बढ़ रहे हैं।
02:22भुथा राक्षस एक एक करके धर्ती पर गिरते गए। शूर्पनखा का फिर क्रोध। जब शूर्पनखा ने ये देखा कि उसके
02:30भेजे हुए राक्षस मारे गए हैं। तो वे और भी क्रोधित हो गई। वे फिर खर के पास गई। खर
02:37और दूशन की सेना। इस बार खर �
02:39अपने भाई दूशन और विशाल राक्षस सेना को बुलाया। अब 14,000 राक्षस युद्ध के लिए तैयार हो गए। उनकी
02:47सेना अत्यंत भयानत दिखाई दे रही थी। युद्ध का आरंभ। जब वो विशाल सेना पंचवती पहुची तो धर्ती कांप उठी।
02:56आकाश म
02:59की गर्जना पूरे वन में गूंजने लगी। राम अकेले युद्ध में। राम ने लक्षमन से कहा। लक्षमन तुम सीता को
03:06सुरक्षित स्थान पर ले जाओ। लक्षमन सीता को लेकर एक सुरक्षित स्थान पर चले गए। अब राम अकेले उस विशाल
03:13सेना के सामने ख�
03:44राम
03:47वे बान सीधे खर के हिर्दय में लगा
03:50खर भी धर्ती पर गिर पड़ा
03:52राक्षसों का विनाश
03:54राम के बानों से
03:5514,000 राक्षसों की सेना नश्ठ हो गई
03:58वन फिर शान्त हो गया
04:00देवताओं की प्रशंसा
04:02आकाश से देवताओं ने ये द्रिश्य देखा
04:04वे राम की वीरता की प्रशंसा करने लगे