00:00अरण्य कांड का अध्याय 51, रामायन की कथा में अत्यंत निरनायक मोड लाता है. इस अध्याय में रावण सीता हरण
00:07की योजना बनाने के लिए राक्षस मारीच से मिलता है. ये योजना अंततह सीता के अपहरण का कारण बनती है,
00:13जबकि उस समय राम और लक्षमन वन पंच�
00:21रावण और मारीच की भेंट तथा स्वर्ण म्रिग की योजना. खर और दूशन के वद के बाद शूरपनखा ने रावण
00:28को जो बाते बताई थी, वे रावण के मन में गहराई से बैठ चुकी थी. सीता के सौंदर्य का वर्णन
00:34उसके मन में बार-बार गूंज रहा था. र
00:48राम साधारण मनुष्य नहीं है. खर और दूशन जैसे शक्तिशाली राक्षसों को राम ने अकेले ही मार दिया था. इसलिए
00:55रावण को समझ आ गया कि सीथे युद्ध करके सीता को ले जाना आसान नहीं होगा. उसे कोई चाल चलनी
01:01होगी.
01:02मारीच की याद
01:03तभी रावण को एक पुराने राक्षस की याद आई. वो था मारीच. मारीच पहले भी राम से युद्ध कर चुका
01:10था और राम के पराक्रम से भली भाटी परिचित था. अब वो समुद्र के किनारे एक आश्रम जैसा स्थान बना
01:17कर रहता था. मारीच के पास जाना.
01:19रावण तुरंत अपने रत पर सवार हुआ और मारीच के निवास थान की ओर चल पड़ा. कुछ समय बाद वो
01:26वहाँ पहुँच गया. मारीच ने जब रावण को आते देखा, तो वो आश्चर्य चकित हो गया. उसने सम्मान पूर्वक रावण
01:33का स्वागत किया.
02:00रावण का उद्देश्य।
02:29रावण का उद्देश्य।
02:33जब सीता उस सुंदर मृण को देखेंगी, तो वो राम से उसे पकड़ने के लिए कहेंगी. राम उस मृण के
02:40पीछे चले जाएंगे. फिर मैं अवसर पाकर सीता का हरण कर लूँगा.
02:44मारीच की दुविधा
02:46मारीच समझ गया कि ये योजना बहुत खतरनाक है. उसे पता था कि राम से टकराने का परिणाम मृत्यू ही
02:53होगा. लेकिन रावण के क्रोध से भी बचना कठिन था.
02:56अंतिम निर्ने
02:58अंततह मारीच ने सोचा. यदि मरना ही है तो राम के हाथों मरना बहतर है. इसलिए उसने रावण की योजना
03:06मान ली. यात्रा की तैयारी
03:08अब दोनों राक्षस पंचवटी की ओर चल पड़े. रावण अपने मन में सीता को लंका ले जाने की योजना बना
03:15चुका था. उसे ये नहीं पता था कि यही योजना उसके विनाश का कारण बने की.
Comments