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रामायण: सुंदर कांड -अध्याय 69 l Ramayana: Sundara Kanda – Chapter 69.
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00:00सुन्दरकांड का अध्याय 69 अत्यंत रहस्यमय, भव्य और सूक्ष्म निरीक्षण से भरपूर प्रसंग है.
00:07यहां हनुमान लंका के भीतर गहराई से प्रवेशकर हर स्थान की खोज करते हैं और अंततह रावन के महल तक
00:14पहुँचते हैं.
00:15यह अध्याय केवल खोज नहीं, बलकि वैराग्य, विवेख और लक्ष पर अडिग रहने का अध्भुत उदारण है.
00:23सुन्दरकांड अध्याय 69 लंका में हनुमान की खोज और रावन के महल का अध्भुत वर्णन
00:30लंका में प्रवेश करने के बाद हनुमान अत्यंत सावधानी से आगे बढ़ रहे थे.
00:36रात का समय था, चारों और शान्ती थी, लेकिन उस शान्ती में भी एक रहस्य में भय छिपा हुआ था.
00:43लंका की भव्यता
00:44हनुमान ने देखा, लंका कोई साधारण नगरी नहीं थी.
00:48सोने से बने महल, रतनों से सजी दीवारें, चांदी के द्वार और हर ओर अपार वैभव.
00:54ये नगरी मानो स्वर्ग से भी अधिक सुन्दर प्रतीत होती थी.
00:58राक्षसों का जीवन
00:59उन्होंने देखा, राक्षस विभिन्द प्रकार के थे.
01:03कुछ विशाल और भयानक, कुछ छोटे और विचित्र, कुछ अत्यंत बल्शाली.
01:08हर ओर भोग विनास और शक्ति का प्रदर्शन था.
01:11हनुमान का सैयम
01:13इतनी भविता देख कर भी हनुमान का मन विचलित नहीं हुआ.
01:17उनका लक्ष स्पष्ट था.
01:18सीता माता की खोज.
01:20खोज की शुरुवात
01:21हनुमान एक-एक महल में प्रवेश करते हुए आगे बढ़ रहे थे.
01:26वे हर स्थान को ध्यान से देख रहे थे.
01:28बगीचे, महल, कक्ष.
01:31लेकिन कहीं भी सीता का पता नहीं चला.
01:33रावन के महल की ओर.
01:35धीरे-धीरे हनुमान एक विशाल और अत्यंत भव्य महल के पास पहुँचे.
01:40ये था रावन का राजमहल.
01:42महल का वैभव.
01:44रावन का महल अद्भुत था.
01:45सोने के स्तंभ, हीरों से जड़ी दीवारें, सुगंधित पुष्पों की महक और चारों ओर पहरा.
01:52ये महल उसकी शक्ती और वैभव का प्रतीक था.
01:55महल में प्रवेश.
01:57हनुमान ने सावधानी से महल में प्रवेश किया.
01:59वे अत्यंत छोटे रूप में थे, ताकि कोई उन्हें देख न सके.
02:04आंतरिक कक्ष.
02:05महल के भीतर उन्होंने अनेक कक्ष देखे, जहां राक्षसियां और राक्षस विश्राम कर रहे थे.
02:11रावन का दर्शन.
02:12अन्तताहा हनुमान उसका क्ष तक पहुँचे, जहां रावन विश्राम कर रहा था.
02:17रावन का स्वरूप.
02:19हनुमान ने देखा, रावन अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली था.
02:23विशाल शरीर, दस सिर, अद्भुत तेज.
02:26वो सो रहा था, लेकिन उसके भीतर अपार शक्ती स्पष्ट जलक रही थी.
02:31मंदोदरी का ब्रह्म.
02:33हनुमान ने एक सुन्दर स्त्री को देखा, और क्षण भर के लिए सोचा, क्या ये सीता माता हैं?
02:38लेकिन तुरंत ही उन्होंने समझ लिया, नहीं, ये सीता नहीं हो सकती, वो थी मंदोदरी.
02:44विवेक, हनुमान ने अपने मन को सैयमित रखा, उन्होंने कहा, सीता माता यहां नहीं हैं.
02:50आगे की खोज, हनुमान महल के अन्य भागों में भी गए, लेकिन कहीं भी सीता का पता नहीं चला.
02:57चिंता, अब हनुमान चिंतित होने लगे. उन्होंने सोचा, यदी सीता माता यहां नहीं हैं, तो वे कहां हैं?
03:03धैर्य, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, उन्होंने निश्चे किया, मुझे और खोच करनी होगी
03:10लक्षे पर ध्यान, हनुमान का मन पूरी तरह अपने लक्षे पर केंद्रित था
03:14न तो भव्विता उन्हें आकरशित कर सकी, नहीं भय उन्हें रोक सका
03:19नई दिशा, अब उन्होंने महल से बाहर निकल कर अन्य स्थानों की और जाने का निर्णे लिया

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