00:00अरन्यकांड का अध्याय पचास, रामायन की कथा में एक अत्यंत निरनायक मोड लाता है।
00:05इस अध्याय में, राक्षसी शूर्पनखा अपने अपमान और अपने भाईयों की मृत्यू से क्रोधत होकर रावन के पास जाती है।
00:40और उसे सीता की अध्भुत सौंदरे के बारे में बताती है।
00:41जिसके हृदय में क्रोध की ज्वाला शांत नहीं हुई थी। वो थी शूर्पनखा, अपमान की याग।
01:40जल पड़ी।
01:41उसमें क्रोधिस होकर पूछा, ये किस ने किया।
01:44शुर्पनखा ने रोते हुए कहा, भाईया, मेरे साथ भयानक अपमान हुआ है।
01:49राम का वर्णन।
01:50शुर्पनखा ने राम और लक्ष्मन के बारे में बताया।
01:53उसने कहा, वन में दो मनुष्य रहते हैं, राम और लक्ष्मन। उन्होंने मेरे साथ ये किया।
01:58रावण ने आश्चरे से पूछा, क्या वे इतने शक्तिशाली है।
02:01सीता का वर्णन।
02:02अब शुर्पनखा ने एक और बात बताई।
02:05उसने कहा, उनके साथ एक स्त्री भी रहती है। उसका नाम सीता है।
02:09फिर उसने सीता के सौंदर्य का अत्यंत अध्भुद वर्णन किया।
02:12अध्विती ये सौंदर्य।
02:13शुर्पनखा ने कहा, ऐसी सुन्दर्स्त्री मैंने कभी नहीं देखी, उसकी सुन्दर्ता स्वर्ग की अपसराओं से भी अधिक है, उसने रावन
02:20के मन में लोब उत्पन करने के लिए सीता की प्रशमसा और भी बढ़ा चड़ा करकी, रावन का आकर्शन, सीता
02:26के सौंदरिका
02:27वर्नन सुनकर, रावन के मन में एक नहीं इच्छा जाग उठी, उसके मन में सीता को पाने की लालसा उत्पन
02:32हो गई, उसकी आखों में हेंकार और इच्छा का मिश्रण दिखाई देने लगा, बदले की योजना, शुर्पनका ने रावन से
02:39कहा, यदि तुम सच में शक्ति�
02:52आने वाली योजना, रावन के मन में एक योजना बनने लगी, उसने निश्चे किया कि वो छल से सीता का
02:57हरन करेगा, ये निर्णय आगे चलकर रामायन की सबसे बड़ी घटना बनने वाला था
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