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रामायण: अरण्य कांड - अध्याय 53 ।Ramayana: Aranya Kanda – Chapter 53.
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00:00अरण्यकांड का अध्याय तरेपन रामायन की क्रथा में अत्यंत निर्नायक और भावनात्मक मोड लाता है। इस अध्याय में राक्षुस मारीच
00:08मरते समय राम की आवाज में पुकारता है, जिससे सीता अत्यंत चिंतित हो जाती हैं और लक्षमन को राम की
00:15सहायता के लिए भ
00:17प्रसंग में प्रसिद लक्षमन रेखा का उल्लेखाता है, जो आगे होने वाले सीता हरण की भूमिका बनता है। अरण्यकांड अध्याय
00:25तरेपन मारीच की पुकार, सीता की चिंता और लक्षमन रेखा का प्रसंग। पंचवटी का वन उस समय शांत था। चारों
00:35और व्र
00:47प्रसंग में हलकी चिंता थी क्योंकि राम स्वर्णिम्रिक का पीछा करते हुए वन के भीतर जा चुके थे। कुटिया के
00:53पास लक्षमन धनुषबांड लेकर पहरा दे रहे थे। मारीच की भयानक पुकार। इसी बीच अचानक वन के भीतर से एक
01:01जोरदार आवाज सुना
01:15सीता की घबराहट।
01:45सीता की बढ़ती चिंता। लेकिन सीता का मन अभभय से भर चुका था। उन्हें बार-बार वही पुकार सुनाई दे
01:51रही थी। उन्होंने व्याकुल होकर कहा। लक्षमन यदि राम को कुछ हो गया तो मैं जीवित नहीं रहूंगी।
01:58सीता के कठोर शब्द
01:59जब लक्षमन जाने को तयार नहीं हुए तो सीता अत्यंत व्याकुल हो गई। उन्होंने भावावेश में कुछ कठोर शब्द कह
02:07दिये।
02:07उन्होंने कहा, लक्षमन, क्या तुम चाहते हो कि राम किसी संकट में पड़े? क्या तुम राम के साथ कोई अनिष्ठ
02:14चाहते हो? ये शब्द सुनकर लक्षमन अत्यंत दुखी हो गए।
02:18लक्षमन का निर्णय
02:20लक्षमन जानते थे कि राम को वास्तव में कोई खत्रा नहीं है, लेकिन सीता की व्याकुलता देखकर उन्होंने निर्णय लिया
02:26कि उन्हें राम के पास जाना ही होगा।
02:29लक्षमन रेखा
02:30जाने से पहले लक्षमन ने अपनी धनुष की नोक से धर्ती पर कुटिया के सामने एक दिव्य रेखा खींच दी।
02:36उन्होंने सीता से कहा, माता, आप इस रेखा के बाहर मत जाना, जब तक आप इस रेखा के भीतर रहेंगी,
02:43कोई भी राक्षस आपका अनिष्ट नहीं कर सकेगा।
03:09आने वाले संकट की छाया, दूर कहीं व्रिक्षों के पीछे कोई छिपकर ये सब देख रहा था, वो था लंका
03:17का राजा रावन, वो उसी अवसर की प्रतीक्षा कर रहा था, अब उसकी योजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होने
03:25वाला था।

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