00:00किश्किन्धा कांड का अध्याय 64 अत्यंत रोमांचक, रहस्यमय और संघर्च से भरा हुआ है।
00:05इसमें दक्षिन दिशा में भेजे गए वानर दल, जिसका नेत्रित्व हनुमान, अंगद और जामबवान कर रहे थे, कठिन परिस्थितियों, भयानक
00:13जंगलों और रहस्यमय स्थानों से गुजरते हैं।
00:36कठिन मार्क की शुरुवात, जैसे जैसे वे आगे बढ़े, मार्क कठिन होता गया। घने और अंधकार मयवन, उचे उचे परवत
00:44और गहरी घाटियां, हर कदम पर नई चुनोती थी।
00:48भयानक जंगल, वन इतने घने थे कि सूरे का प्रकाश भी भीतर नहीं पहुच पाता था।
00:53चारों ओर अजीब आवाजें गूचती थें। कभी किसी जंगली पशू की गर्जना, तो कभी किसी अंजान पक्षी की तीखी चीख।
01:00वानरों के मन में भय उत्पन होने लगा।
01:02जल और भोजन की कमी
01:04जैसे जैसे यात्रा आगे बढ़ी, भोजन और पानी की कमी होने लगी।
01:09वानर ठकने लगे, उनकी गती धीमी हो गई।
01:12निराशा का आरंभ।
01:14अंगद ने चारों ओर देखा और कहा, हम बहुत दूर आ चुके हैं, लेकिन अभी तक सीता माता का कोई
01:19पता नहीं चला।
01:20कुछ वानर निराश होने लगे।
01:22जामबवान का धैर्य।
01:24तभी व्रिध और बुद्धिमान जामबवान ने कहा, वीरों धैरे मत खो।
01:28संकठी वीरों की पहचान कराता है।
01:31रहस्य मई गुफा
01:32आगे बढ़ते हुए उन्हें एक विशाल और अंधकार मई गुफा दिखाई दी।
01:37उस गुफा से ठंडी हवा आ रही थी।
01:39अंदर से जलकी हलकी धोनी सुनाई दे रही थी।
01:42गुफा में प्रवेश।
01:58धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे।
02:01अद्भुत द्रिश्य
02:01कुछ दूरी चलने के बाद अचानक प्रकाश दिखाई दिया।
02:05उन्होंने देखा गुफा के भीतर एक सुन्दर और अद्भुत स्थान था।
02:09वहां हर्याली थी, जल के स्रोत थे और फल फूल से भरे व्रिक्ष थे।
02:14तपस्विनी का दर्शन
02:16वहां एक दिव्य तपस्विनी बैठी थी।
02:18स्वयम प्रभा।
02:19उनका तेज अद्भुत था।
02:21स्वयम प्रभा की कृपा।
02:23उन्होंने वानरों को देखा और पूछा कि तुम कौन हो और यहां कैसे आए।
02:27हनुमान का उत्तर
02:28हनुमान ने विनम्रता से उत्तर दिया।
02:31हम श्री राम के दूत हैं और सीता माता की खोज में निकले हैं।
02:34अतिथी सत्कार
02:35स्वयम प्रभा ने उन्हें फल और जल प्रदान किया।
02:39उनकी ठकान दूर हो गई।
02:40गुफा का रहस्य।
02:41उन्होंने बताया कि ये स्थान मायावी है।
02:45यहां से बाहर निकलना आसान नहीं है।
02:47सहायता
02:47स्वयम प्रभा ने अपनी तपस्या के बल से सभी वानरों को गुफा के बाहर पहुचा दिया।
02:52समय की चिंता
02:53गुफा से बाहर निकल कर वानरों को एहसास हुआ कि बहुत समय बीच चुका है।
02:58सुग्रीव द्वारा दी गई समय सीमा समाप्थ होने वाली थी।
03:01Sankat ki gha'di.
03:03Angad ne gambhir swar me kaha,
03:05yadhi ham bina samachar ke lote,
03:06to hame dand mil ega.
03:08Varnroon ke chahre par bhai chha gya.
03:10Niraša aur nirnay.
03:12Kuch varnroon ne kaha,
03:13ab lotne ka koji lab nahi hai.
03:15Hame yahin pranhtyag dena chahe.
03:17Hanuman ka utsah.
03:18Lekin hanuman nne unhhe prerit kiya.
03:21Viro, haar mahnna humara dham nahi hai.
03:24Jab tak jeevan hai,
03:25prayas karna chahe.
03:26Antimasha.
03:27Sabhi nne nishchay kiya,
03:28vye antim prayas karenge.
03:30Samudr tatt par pahuncna.
03:32Ághe badhte huye,
03:33vye ek vishal samudr ke kinaare pahunche.
03:35Ye samudr atyant vishrit aur bhaiyavah tha.
03:38Naye chunauti.
03:39Ab unke sámane sabse badhi chunauti thi
03:41samudr ko pahar karna.
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