00:00अरण्यकांड का अध्याय सतावन, रामायन की कथा में अत्यंत आध्यात्मिक, रहस्य मही और प्रेरणा दायक प्रसंग है।
00:07इसमें राम और लक्षमण की मुलाकात भयानक राक्षस कबंद से होती है, जिसका वद करने के बाद वे महान भक्त
00:14शबरी से मिलते हैं।
00:16ये अध्याय भक्ती, मुक्ती और सच्चे प्रेम का अध्याय सतावन, कबंद वद और शबरी से भींट, सीता के वियोग में
00:26व्याकुल राम और लक्षमण वन के भीतर भटक रहे थे, उनकी आखों में चिंता और हिर्दय में गहरा दुख था,
00:33वे हर दिशा में सीता की खोज
00:34कर रहे थे, वन का भया वहरूप, जैसे जैसे वे आगे बढ़ते गए, वन और भी घना और भया वहोता
00:41गया, उचे उचे व्रिक्ष, गहरी छाया और अजीब ध्वनिया वातावरण को रहसे मई बना रही थी, कबंद का प्रकट होना,
00:49अचानक उनके सामने एक भयानक द्र
01:04तुरंद अपने लंबे हाथों से राम और लक्षमन को पकड़ लिया, उसने उन्हें अपनी और खीचना शुरू कर दिया, युद्ध,
01:11राम और लक्षमन ने तुरंद अपनी तलवारे निकाली, उन्होंने कबंद के दोनों हाथ काट दिये, कबंद की मुक्ती, जैसे ही
01:18उ
01:33देशी के शाप के कारण उसे ये भयानक रूप मिला था, उसने कहा, आपके हाथों मारा जाना ही मेरी मुक्ती
01:40का मार्ग था, मार्ग दर्शन, मरने से पहले कबंद ने राम को सलाह दी, आप रिश्यमूक परवत की ओर जाएं,
01:47वहां आपको सुग्रीव नामक वानर मिलेगा
01:49वो आपकी सहायता करेगा
01:51शबरी के आश्रम की ओर
01:53कबंद की बात सुनकर राम और लक्षमन आगे बढ़े, कुछ दूरी पर उन्हें एक शांत और पवित्र आश्रम दिखाई दिया,
02:00ये आश्रम था शबरी का
02:02शबरी की प्रतीक्षा
02:03शबरी एक व्रिद्ध भक्त थी, वे वर्षों से राम की प्रतीक्षा कर रही थी
02:08उनके गुरु ने कहा था, कि एक दिन राम तुम्हारे आश्रम में आएंगे
02:12जब राम और लक्षमन आश्रम में पहुँचे, तो शबरी अत्यंत प्रसन्न हो गई
02:16उनकी आखों से आसु बहने लगे, उन्होंने राम के चरणों में प्रणाम किया
02:21शबरी की भक्ती, शबरी ने प्रेम पूर्वक राम का स्वागत किया
02:25उन्होंने उन्हें बेर अर्पित किये, वो हर फल को पहले चक्ख कर देखती थी
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