00:00अरण्य कांड का अध्याय पच्पन, रामायन का अत्यंत वीर, करुण और प्रेर्णा दायक प्रसंग है.
00:06इसमें महान पक्षी राज जटायू, लंका के राजा रावन से अकेले युद्ध करके सीता को बचाने का प्रयास करते हैं.
00:13ये प्रसंग वीर्ता, धर्म और त्याग का महान उधारण माना जाता है.
00:19आरण्य कांड, अध्याय पच्पन, जटायू और रावन का भयानक युद्ध, जब रावन सीता को बल पूर्वक अपने रथ में बैठा
00:27कर, आकाश मार्ग से लंका की ओर ले जा रहा था, तब सीता अत्यंत दुखी और व्याकुल थी, वे बार
00:34-बार पुकार रही थी.
00:56जटायू का क्रोध, जब जटायू ने देखा कि रामन सीता को बल पूर्वक ले जा रहा है, तो उनका हर्दय
01:04क्रोध से भर गया,
01:05उन्होंने तुरंत रावन को ललकारा, हे रावन, तुम एक स्त्री का अपहरण कर रहे हो, ये अधर्म है, जटायू की
01:13चेतावनी, जटायू ने रावन से कहा, मैं आयोध्या के राजा दशरत का मित्र हूँ, सीता राम की पतनी है, उन्हें
01:20तुरंत छोड़ दो, रावन का �
01:22अहंकार, रावन ने जटायू की बात सुनकर उपहास किया, उसने कहा, तुम एक बूढ़े पक्षी हो, तुम मेरा क्या बिगार
01:30सकते हो, युद्ध की शुरुवात, जटायू ने बिना देर किये रावन पर आक्रमन कर दिया, उन्होंने अपने विशाल, पंखों और
01:37तीख
01:52जटायू बार बार रावन पर हमला कर रहे थे, रावन भी अपने अस्त्रों से जटायू पर प्रहार कर रहा था,
01:58जटायू की वीरता, हालाकि जटायू व्रिध थे, लिकिन उनका साहस अद्भुत था, उन्होंने पूरी शक्ती से रावन का सामना किया,
02:06उन्होंने कई बार
02:07Ravan ko ghaial bhi kar diya
02:08Ravan ka kroodh
02:10Ab Ravan atyant kroodhit ho gaya
02:12Usne aapni talwar nikali
02:13Usne jatayu pere ek bhyan kar prahar kiya
02:16Jatayu ke pank kut jana
02:18Ravan ki talwar se jatayu ke pank kut gaya
02:21Vhe ghaial hokar dharti pere gir pade
02:23Sita ka duch
02:25Jatayu ko ghaial dhekkar
02:26Sita atyant duchhi ho gai
02:27Unhhone rote huye kaha
02:29Hey veer pakshi
02:30Aapne meeri raksha ke liye
02:32Aapne pran dao pere laga diya
02:34Ravan ka aagye bada
02:36Jatayu bhumi pere ghaial pade thay
02:38Unka shariir lahu luhan tha
02:40Lekin unke man meek santoš tha
02:42Unhhone dharm ki raksha ke liye
02:44Aapna karthab bhi nibhaya tha
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