00:00सुन्दर कांड का अध्याय 68, अत्यंत रहस्यमई, रोमान्चक और गूड घटनाओं से भरा हुआ है.
00:07यहां हनुमान लंका में गुप्त रूप से प्रवेश करते हैं और पहली बार राक्षसी शक्ती से सामना करते हैं.
00:13लंकिनी
00:14यह अध्याय केवल प्रवेश का वर्णन नहीं, बलकि धैर्य, बुद्धी और साहस का अध्याय 68, लंका में हनुमान का प्रवेश
00:26और लंकिनी से सामना.
00:28समुद्र को लांधने के बाद हनुमान अब लंका के निकट पहुँच चुके थे. उनके सामने एक अध्भुद रिश्य था. स्वण
00:35से बनी, उचे-उचे महलों से सजी, दीपों की रोशनी से चमकती हुई एक भव्य नगरी, लंका.
00:42लंका का प्रथम दर्शन. हनुमान ने उचाई से पूरी लंका को देखा. वो नगरी अत्यांत समृद्ध और सुद्रिड थी. चारों
00:51और उची दीवारे, विशाल द्वार, राक्षसों की चौकसी, हर और शक्ती और वैभव का प्रदर्शन था.
00:58सावधानी का निर्णै. हनुमान ने सोचा कि ये कोई साधारन स्थान नहीं है. यहां हर कदम सोच समझ कर रखना
01:05होगा. चोटा रूप धारन. उन्होंने अपना विशाल रूप त्याग दिया और एक छोटे वानर का रूप धारन कर लिया. अब
01:13वेक साधारन जीव की तरह �
01:14दिख रहे थे. रात का समय. हनुमान ने लंका में प्रवेश के लिए रात का समय चुना. चारों और अंधकार
01:21था, लेकिन लंका दीपों से जगमगा रही थी. लंका के द्वार पर. जब हनुमान लंका के मुख्य द्वार के पास
01:28पहुँचे, तभी एक भयानक राक्षसी �
01:30उनके सामने प्रकट हुई. वो थी लंकिनी. लंकिनी का स्वरूप. लंकिनी अत्यंत विशाल और भयावह थी. लाल आखें, विकराल रूप,
01:40भयंकर आवाज. वो लंका की रक्षक थी. चुनौती. लंकिनी ने गर्जना करते हुए कहा, कौन है जो बिना अनुमती लंका
01:49मे
01:49प्रवेश करना चाहता है. हनुमान का उत्तर. हनुमान ने शांत स्वर में कहा, मैं केवल इस नगरी को देखने आया
01:56हूँ. लंकिनी क्रोधित हो गई. उसने कहा, ये राक्षसों की नगरी है, यहां बिना अनुमती कोई प्रवेश नहीं कर सकता.
02:04आक्रमन. ये कहकर लंकिनी
02:17ने बार-बार आक्रमन किया, तो हनुमान ने हलका सा प्रहार किया. लंकिनी का गिरना. हनुमान के उस एक ही
02:24प्रहार से लंकिनी भूमी पर गिर पड़ी. वो घायल हो गई. रहस्य का खुलासा. भूमी पर गिर कर लंकिनी ने
02:31कहा, आज मुझे एक भविश्यवानी याद आ �
02:35ब्रम्हा का वर्दान. उसने कहा, मुझे ब्रम्हा ने वर्दान दिया था, कि जिस दिन कोई वानर मुझे पराजित करेगा, उसी
02:42दिन लंका का विनाश आरंभ होगा. संकेत. लंकिनी ने हनुमान को प्रणाम किया और कहा, तुम वही वानर हो. अब
02:50रावर का अंत निकट है
02:52आशीरवाद. लंकिनी ने हनुमान को आशीरवाद दिया. तुम अपने कारे में अवश्य सफल होगे. प्रवेश. अब हनुमान बिना किसी बाधा
03:01के लंका में प्रवेश कर गए. लंका के भीतर. हनुमान धीरे-धीरे लंका के भीतर घुमने लगे. उन्होंने देखा भव
03:23४४४४४
03:39अब लंका के भीतर उनकी खोज शुरू हो चुकी थी
Comments