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रामायण: अरण्य कांड - अध्याय 42।Ramayana: Aranya Kanda – Chapter 42.
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Transcript
00:00अरन्य कांड का अध्याय 42 रामायन की कथा में एक नई और रहस्य में शुरुआत करता है। अब तक की
00:06कथा में हम देख चुके हैं कि राम, उनकी पत्नी सीता और उनके भाई लक्षमन वनवास के दोरान अनेक स्थानों
00:13से होते हुए आगे बढ़ते हैं। अब उनकी यात्रा
00:15उन्हें विशाल और भयावह वन दंड कारण्य तक ले आती है। ये अध्याय वन के रहस्य, रिशियों की तपस्या, राक्षसों
00:23के अत्याचार और राम के धर्म रक्षक रूप की शुरुआत का वर्णन करता है। अरन्य कांड अध्याय 42 दंड कारण्य
00:31में राम का प्रव
00:43और पक्षियों की मधुर्ध्वनी उनके जीवन का हिस्सा बन चुकी थी। लेकिन राम जानते थे कि वनवास का उद्देश केवल
00:51वन में रहना नहीं था। ये एक धर्म यात्रा थी, एक ऐसा मार्ग जिसमें उन्हें अनेक कष्टों का सामना करना
00:57था। चित्रकूट से आ
01:13ये धर्म की रक्षा का संकल्प था। घने वन का मार्ग। राम, सीता और लक्ष्मन चित्रकूट से आगे बढ़ने लगे।
01:20जैसे जैसे वे आगे भढ़ते गए, वन और अधिक घना और रहस्य मही होता गया। उंचे-उंचे व्रिक्ष आकाश को
01:27ढख लेते थे, कहीं-कह
01:28सूर्य की किरणे मुश्किल से धर्ती तक पहुच पाती थी। चारों और वन ने जीवों की आवाजें सुनाई देती थी।
01:34वन का रहस्य। वन में चलते समय सीता ने धीरे से राम से पूछा, प्रभू, ये वन कितना विशाल और
01:42रहस्य मैं है। राम मुस्कुराए और बो
01:57राक्षस अकसर रिशियों के यग्य और तपस्या को नश्ट कर देते थे। इसी कारण रिशी अत्यंत दुखी थे। आश्रम का
02:05द्रिश्य। कुछ दूर चलने के बाद उन्हें एक आश्रम दिखाई दिया। वहां कुछ रिशी ध्यान और तपस्या में लीन थे।
02:11उनके �
02:12शरीर दुबले थे और चहरे पर तपस्या का तेज दिखाई दे रहा था। राम को देखते ही वे अत्यंत प्रसन
02:18हुए।
02:42पीडा थी। राम का वचन। राम ने उनकी बाद ध्यान से सुनी। फिर उन्होंने द्रड स्वर में कहा।
03:12सीता और लक्षमन भी राम के इस संकल्प में उनके साथ थे। लक्षमन ने कहा भाईया मैं आपके साथ हर
03:18परिस्थती में रहूंगा। सीता ने भी मुस्कुरा कर राम की ओर देखा उनकी आखों में विश्वास था। वन का नया
03:24अध्याय। इस प्रकार दंड कारण में र
03:27राम के प्रवेश के साथ रामायन की कथा एक नए चरण में प्रवेश करती है। अब वन में अनेक घटनाय
03:32होने वाली थी, राक्षसों से युद्ध, रिशियों की रक्षा और अनेक रहस्यमय प्रसंग।

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