00:00किशकिंधा कांड का अध्याय 61, कथा में भावनात्मक शान्ती, प्रकृती की सुंदर्ता और प्रतीक्षा का गहरा चित्र प्रस्तुत करता है।
00:08इसमें सुग्रीव का राज्या भिशेक होता है, जबकि राम वर्शा रितु में सीता की खोज के लिए प्रतीक्षा करते हैं।
00:15ये अध्याय प्रकृती वर्णन और विरह भाव का अध्भुत संगम है।
00:20किशकिंधा कांड अध्याय 61, सुग्रीव का राज्या भिशेक और वर्शा रितु का वर्णन।
00:27बाली के वद के बाद किशकिंधा नगरी में एक नया अध्याय शुरू हुआ।
00:31राज्य अब अपने नए राजा की प्रतीक्षा कर रहा था।
00:35सुग्रीव का राज्या भिशेक सभी वानरों और मंत्रियों की उपस्थिती में सुग्रीव का विधिवत राज्या भिशेक किया गया।
00:43पूरे किशकिंधा में उत्सव का वातावरन था।
00:46नगाडे बज रहे थे, वानर हर्शो लास से जूम रहे थे।
00:50तारा और अंगद का सम्मान
00:52बाली के पत्नी तारा को सम्मान दिया गया।
00:55बाली के पुत्र अंगद को युवराज बनाया गया।
00:58राम का विराग
01:00उधर राम और लक्षमन किशकिंधा के बाहर एक परवत पर रहने लगे।
01:04राम ने राजमहल में रहने से इंकार कर दिया.
01:07उन्होंने कहा, मैं वनवासी हूँ, मुझे वन में ही रहना उचिद है.
01:12वर्षा रितू का आगमन
01:14कुछी समय बाद वर्षा रितू का आगमन हुआ,
01:17आकाश में घने काले बादल छा गए,
01:19बिजली चमकने लगी,
01:20गर्जन की आवाज पूरे आकाश में गूजने लगी,
01:24प्रकृती का अद्भुत रूप,
01:26वन हर्याली से भर गया,
01:28नदियां उफान पर आ गई,
01:30परवतों से जलप्रपात बहने लगे,
01:32मोर नाचने लगे, मेंधक तर्राने लगे,
01:35वर्षा का सौंधर्य,
01:37बारिश की बूंदे धर्ती को भिगो रही थी,
01:40हवा में ठंडक और ताजगी थी,
01:42ये द्रिश्य अत्यंत मनमोहक था,
01:44लेकिन इस सुन्दर्ता के बीच राम का हरिदय दुख से भरा था,
01:48उन्हें हर क्षण सीता की याद आ रही थी,
01:51उन्होंने कहा,
01:52ये वर्शा रितु मुझे और भी अधिक व्याकुल कर रही है,
01:56प्रकृती में सीता का स्मरण,
01:58राम को हर द्रिश्य में सीता की याद आने लगी,
02:02बिजली की चमक में उनका तेज,
02:03वर्शा की बूंदों में उनकी कोमलता,
02:06और हर्याली में उनकी सुन्दरता,
02:08लक्ष्मन का धैर्य,
02:10लक्ष्मन ने राम को सांत्वना दी,
02:12उन्होंने कहा,
02:13भाईया धैर्य रखें,
02:15वर्शा रितु समाप्त होते ही हम सीता की खोज शुरू करेंगे,
02:19उधर किशकिंधा में सुग्रीव अपने राज्य और सुखों में व्यस्थ हो गया,
02:23वो अपने वचन को कुछ समय के लिए भूल गया,
02:26राम की प्रतीक्षा,
02:28राम शांत भाव से प्रतीक्षा कर रहे थे,
02:31उन्होंने समय की मर्यादा को समझा,
02:34वर्शा रितु में युद्ध और यात्रा करना कठिन था,
02:37समय का प्रवाह,
02:39दिन बीठते गए,
02:40वर्शा रितु धीरे धीरे अपने अंत की ओर बढ़ने लगी,