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रामायण: किष्किंधा कांड — अध्याय 65l Ramayana: Kishkindha Kanda — Chapter 65.
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00:00किश्किन्धा कांड का अध्याय 65, कथा का एक अत्यंत रहस्यमय और निर्नायक मोड है।
00:06यहां दक्षन दिशा में खोज कर रहे वानर दल गहन निराशा में डूब जाते हैं।
00:11लेकिन उसी निराशा के बीच उन्हें एक ऐसा सूत्र मिलता है, जो उन्हें सीधे सीता माता तक पहुँचने का मार्ग
00:18दिखाता है।
00:19इस अध्याय में हनुमान, अंगद और जामबान के साथ एक नई और महत्वपूर्ण पात्र संपाती का प्रवेश होता है।
00:27किशकिंधा कांड, अध्याय पैसट, समुद्र तट पर निराशा, संपाती से भेट और लंका का रहस्य दक्षन दिशा का वानरदल, लंबी
00:38और कठिन यात्रा के बाद एक विशाल समुद्र के किनारे पहुँच चुका था।
00:42उनके सामने अथा जलराशी फैली हुई थी, अंतहीन, गहरी और भयावः।
01:12जीव हमें दंड देगा, हमारा जीवन यहीं समाप्थ हो जाएगा। धीरे धीरे निराशा ने पूरे दल को घेर लिया।
01:42त्यंत गंभीर और करुण हो गया।
01:45अचानक एक आवाज।
01:47तभी पास की एक चटान से एक भारी और करुण आवाज आई।
01:51कौन हो तुम जो यहां मृत्यू का वरण कर रहे हो।
01:55संपाती का प्रकट होना।
01:57वो आवाज एक विशाल और व्रिध पक्षी की थी।
02:00संपाती।
02:01वो जटायू का बड़ा भाई था।
02:04जटायू का नाम सुनकर।
02:05जब वानरों ने जटायू का नाम लिया तो संपाती की आखों में आशू आ गए।
02:10उसने पूछा।
02:11मेरे भाई जटायू का क्या हुआ।
02:14जटायू की कथा।
02:16हनुमान ने संपाती को जटायू की वीर गाथा सुनाई।
02:19कैसे उसने रावन से युद्ध किया।
02:21और सीता माता की रक्षा करते हुए अपने प्रान त्याग दिये।
02:25संपाती का दुख।
02:27ये सुनकर संपाती अत्यन्त दुखी हुआ।
02:30उसने कहा
02:31मेरा भाई महान था।
02:34दिव्यद्रिष्टी
02:56वानरों में आशा
03:05उनकी आखों में फिर से उत्साह चमकने लगा
03:08दूरी की चुनोती
03:09संपाती ने बताया
03:11लंका यहां से बहुत दूर है
03:13सैक्णो योजन दूर
03:14वहां पहुँचने के लिए समुद्र को पार करना होगा
03:17नई समस्या
03:19अब वानरों के सामने नई समस्या थी
03:22इतने विशाल समुद्र को कौन पार करेगा
03:25हनुमान की ओर दृष्टी
03:26सभी वानरों की नजर धीरे-धीरे हनुमान की ओर गई
03:30जामवान का स्मरण
03:31तभी जामवान ने हनुमान को उनके बल की याद दिलाई
03:35हनुमान, तुम अपनी शक्ती को भूल गए हो
03:38तुम में असंभव को संभव करने की क्षमता है।
03:42हनुमान का जागरण
03:43जामवान के शब्दों ने हनुमान के भीतर सोई हुई शक्ति को जगा दिया।
03:47उनके शरीर में उर्जा का संचार होने लगा।
03:50आत्म विश्वास
03:51हनुमान ने द्रड स्वर में कहा।
03:54मैं इस समुद्र को पार कर सकता हूँ।
03:56नई शुरुआत।
03:58अब निराशा पूरी तरह समाप्थ हो चुकी थी।
04:01बानर दल में नया उत्साह और विश्वास भर गया।
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