00:00रामायन के बालकांड का अध्याय 9, भगवान राम के जीवन का पहला बड़ा युद्ध प्रसंग है, ताड का वद.
00:07इसी घटना में राम पहली बार धर्म की रक्षा के लिए राक्षसी शक्ती का अंत करते हैं.
00:12उनके साथ उनके भाई लक्षमन और महान रिशी विश्वामित्र भी होते हैं.
00:16नीचे इस प्रसंग का विस्तृत कथावर्णन दिया गया है.
00:20बालकांड, अध्याय 9, ताड का वद.
00:23अयोध्या से प्रस्थान करने के बाद राम और लक्षमन रिशी विश्वामित्र के साथ वन मार्ग से आगे बढ़ रहे थे.
00:29चारों और घना वन था, उँचे उँचे व्रिक्ष, जाडियों और वन्य जीवों की आवाजों से वातावरण भरा हुआ था.
00:35रिशी विश्वामित्र दोनों राजकुमारों को मार्ग में अनेक पवित्र स्थलों के बारे में बताते जाते थे और उन्हें धर्म तथा
00:43नीती की शिक्षा भी देते थे.
00:44राम और लक्षमन ध्यान पूर्वक उनकी बातें सुनते और आगे बढ़ते जाते.
00:48वन का बदलता स्वरूप
00:50कुछ दूर चलने के बाद वन का स्वरूप अचानक बदलने लगा.
00:54जहां पहले पक्षियों का मधुर स्वर सुनाई देता था, वहां अब एक अजीब सी भयावह नीरवता चा गई थी.
01:01व्रिक्ष सूखे और टेढ़े मेढे दिखाई देने लगे, भूमी पर अनेक स्थानों पर हड्डियां और तूटे हुए व्रिक्ष पड़े थे.
01:07राम ने यह दृष्य देखकर रिशी विश्वामित्र से पूछा, गुरुदेव, ये वन इतना भयावह क्यों दिखाई दे रहा है?
01:14ताड़का की कथा.
01:15रिशी विश्वामित्र ने कहा, राम इस वन में एक भयानक राक्षसी रहती है, जिसका नाम ताड़का है.
01:22फिर उन्होंने ताड़का की पूरी कथा सुनाई.
01:24ताड़का पहले एक सुन्दर यक्षिनी थी, उसका विवाह एक शक्तिशाली असुर से हुआ था, लेकिन एक शाप के कारण वो
01:31और उसका पुत्र राक्षस बन गए.
01:33अब ताड़का इस वन में रहती है और आने जाने वाले लोगों को मार देती है. उसके भई से ये
01:39पूरा शेत्र उजाड़ हो गया है.
01:41राम को आदेश
01:42रिशी विश्वमित्र ने राम से कहा, राम इस राक्षसी का अंत करना आवश्चक है. यदि इसे नहीं रोका गया, तो
01:49ये निर्दोष लोगों को कष्ट देती रहेगी.
01:51राम ने कुछ ख्षण विचार किया. उन्होंने कहा, गुरुदेव, वो एक स्त्री है, क्या उसे मारना उचित होगा?
02:21उसकी आखें लाल थी, दात बाहर निकले हुए थे और उसका स्वर भयानक था. युद्ध का प्रारंब. ताड़का ने राम
02:28और लक्ष्मन को देख कर क्रोध से गर्जना की. उसने विशाल पत्थर उठा कर उनकी ओर फेकना शुरू कर दिया.
02:36राम ने तुरंद अपना धन
02:51अक्रमन करती. लेकिन राम अत्यंत कुशल धनुर धर्खे. उन्होंने ताड़का की हर आक्रमन का उत्तर दिया. रिशी विश्वामित्र दूर खड़े
02:59होकर इस युद्ध को देख रहे थे. नेनायक शन. जब ताड़का का क्रूध और बढ़ गया, तब राम ने एक
03:05शक्त
03:18रिजना के साथ ताड़का भूमी पर गिर पड़ी. कुछ ही क्षणों में उसका अंत हो गया. उसके मरते ही वन
03:24का वातावरन बदलने लगा. पक्षियों की आवाजें फिर से सुनाई देने लगी. व्रिक्षों में जीवन लोट आया. रिशी विश्वमित्र की
03:31प्रसन्नता
03:32ताड़का के वद के बाद रिशी विश्वमित्र अत्यंत प्रसन्न हुए. उन्होंने राम को आशिरवाद दिया. उन्होंने कहा, राम आज तुमने
03:39धर्म की रक्षा की है और इस वन को मुक्त किया है. फिर उन्होंने राम और लक्षमन को कई दिव्य
03:45अस्त्र शस्त्रों क
03:47Rām का पहला धर्मियुद्ध.
03:49ताड का वद Rām का पहला बड़ा धर्मियुद्ध था.
03:52इस घटना से ये स्पष्ठ हो गया कि Rām केवल एक राजकुमार नहीं है.
03:56वे धर्म की रक्षा के लिए जन्मे है.
Comments