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  • 2 days ago
रामायण: किष्किंधा कांड — अध्याय 56 l Ramayana: Kishkindha Kanda — Chapter 56.

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00:00आरण्यकांड का अध्याय 56, रामायन की कथा का अत्यम्त करुण, हिर्दय विदारक और भावनात्मक प्रसंग है. इस अध्याय में राम
00:08और लक्षमन कुटिया लोटते हैं, जहां उन्हें सीता नहीं मिलती. व्याकुल होकर वे उन्हें खोजते हैं और अंतताह घायल जटाय
00:26उसे अंतिम भेट. वन के भीतर दूर तक स्वन म्रिक का पीछा करने के बाद, जब राम ने उसे मार
00:32गिराया, तब उन्हें कुछ अशुप संकेत मिलने लगे. मारीच की अंतिम पुकार, हा सीते, हा लक्षमन, उनके कानों में गूंज
00:41रही थी. राम के हरदय में अचानक च
00:54चैनी थी. उन्हें बार-बार सीता का स्मरण हो रहा था. लक्षमन से भेट. मार्ग में उन्हें लक्षमन मिल गए.
01:01राम ने आश्चरे से पूछा, लक्षमन, तुम यहां क्यूं आए? सीता अकेली कुटिया में है. लक्षमन का उत्तर. लक्षमन ने
01:09सिर जुका कर कहा, भह
01:10या, मैंने आपकी पुकार सुनी थी. माता सीता बहुत व्याकुल हो गई थी. उन्होंने मुझे आपके पास आने के लिए
01:16बाद धिकिया. राम की चिंता बढ़ना. ये सुनकर राम की चिंता और बढ़ गई. उन्होंने कहा, ये अवश्य किसी राक्षस
01:23की माया है. सीता अक
01:38पुछे तो कुटिया का दृष्य देखकर स्तब्ध रह गए. कुटिया खाली थी. चारो और सन्नाटा पसरा हुआ था. सीता वहा
01:46नहीं थी. राम का दुख. सीता को ना देखकर राम का हिरदय तूट गया. उन्होंने व्याकुल होकर पुकारा. सीते. हे
01:53प्रिय सीते. लेकि
02:08पुष्पन भी अत्यंत दुखी थे. उन्होंने अपने आपको दोश देना शुरू कर दिया. उन्होंने सोचा, यदि में कुटिया नहीं छोड़ता,
02:15तो ये सब नहीं होता. खोज की शुरुआत. दोनों भाई सीता की खोज में निकल पड़े. वे वन के हर
02:21कोने में खोज क
02:33देखकर. राम ने आभूशन उठाए, उनकी आखों में आसु आ गए. उन्होंने कहा, ये सीता के ही आभूशन है. जटायू
02:41का मिलना. आगे बढ़ते हुए उन्हें एक विशाल पक्षी घायल अवस्था में पड़ा हुआ दिखाई दिया. वे थे जटायू. उनका
02:48शरीर �
02:49लत्फत था. राम का करुण भाव. राम तुरंत उनके पास गए. उन्होंने जटायू को गोद में उठा लिया. उन्होंने कहा,
02:57हे वीर पक्षी, ये क्या हुआ? जटायू ने धीमी आवाज में कहा, हे राम, रावन सीता को ले गया. उन्होंने
03:04पूरी घटना बताई. कैसे
03:05उन्होंने रावन को रोका, कैसे युद्ध किया और कैसे वे घायल होकर गिर पड़े. राम का दुख और सम्मान. ये
03:12सुनकर राम की आँखों से आसू बहने लगे. उन्होंने कहा, हे जटायू, आपने मेरे पिता के समान मेरा साथ दिया.
03:19आपने धर्म के लिए अपने प्र
03:35ये उनके प्रेम और कृतग्यता का महानुधारण था.

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