00:00किशकिन्धा कांड का अध्याय 66, अत्यंत प्रेर्णा दायक, वीर्ता से परिपूर्ण और आत्म विश्वास के जागरण का महान प्रसंग है.
00:08यहां निराशा से उबर कर वानर दल एक निरनायक मोड पर पहुँचता है, जहां जामवान अपने ग्यान से हनुमान को
00:16उनकी भूली हुई शक्ती का स्मरण कराते हैं. यही वो क्षण है जहां एक साधारन प्रतीत होने वाला सेवक असाधारन
00:23नायक में परिवर्तित होता है.
00:25किशकिंधा कांड, अध्याय 66. जामवान द्वारा हनुमान को शक्ती स्मरण और समुद्र लांगने की तैयारी. समुद्र तट पर खड़ा वानर
00:35दल अब एक नई चुनौती के सामने था. समुद्र विशाल था, अथा, असीम और भयावे है. लेकिन अब उन्हें ये
00:55भी ग
00:55अपनी क्षमता बताने लगे. कोई बोला, मैं दस योजन तक छलांग लगा सकता हूँ. दूसरा बोला, मैं पचास योजन तक
01:02जा सकता हूँ. लेकिन कोई भी इतना सक्षम नहीं था कि समुद्र को पार कर सके. अंगद की सीमा. अंगद
01:09ने कहा, मैं समुद्र पार तो कर सकत
01:39।
01:45जामवान ने हनुमान को उनके बच्पन की कथा सुनाई
01:48जब तुम छोटे थे तब तुमने सूरे को फल समझ कर निगलना चाहा था
01:52तुमने आकाश में उडान भरी थी
01:54देवताओं का वर्दान
01:56उन्होंने आगे कहा तुम्हें देवताओं ने अद्भुद शक्तियां प्रदान की हैं
02:00तुम असीम बल और बुद्धी के स्वामी हो
02:02श्राप का स्मर्ण
02:04जामवान ने बताया तुम्हें एक श्राप मिला था
02:07कि तुम अपनी शक्ती को भूल जाओगे
02:09जब तक कोई तुम्हें याद न दिलाए
02:11शक्ती का जागरण
02:12जामवान के शब्द सुनकर हनुमान के भीतर
02:15उर्जा का प्रवाह होने लगा
02:17उनकी आँखों में तेज जमक उठा
02:19उनका शरीर विशाल और प्रभावशाली होने लगा
02:22आत्म विश्वास का उदै
02:40जामवान का आशिरवाद
02:41हनुमान ने जामवान को आशिरवाद दिया
02:44तुम्हें इस कारे में अवश्य सफल होगे
02:46तैयारी
02:47हनुमान ने समुद्र तट पर खड़े होकर ध्यान लगाया
02:50उन्होंने अपने शरीर को परवत के समान विशाल बना लिया
02:53पर्वत पर चढ़ना
02:55हनुमान एक उंचे पर्वत पर चढ़ गए
02:57उन्होंने चारों दिशाओं में द्रिष्टी डाली
02:59अंतिम प्रणाम
03:01हनुमान ने मन ही मन राम का स्मरन किया
03:03उन्होंने कहा प्रभू मुझे इस कारे में सफलता दे
03:07महान छलांग
03:08फिर उन्होंने एक जोरदार गर्जना की
03:10और आकाश की ओर उचल पड़े
03:12उनकी चलांग इतनी शक्तिशाली थी
03:14कि पर्वत हिल उठा
03:15पेड उखड गए और समुद्र में लहरे उठने लगी
03:18नई यात्रा का आरंभ
03:20हनुमान अब आकाश में उड़ रहे थे
03:22लंका की ओर सीता माता की खोज में
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