00:00किशकिन्धा कांड का अध्याय 58 रामायन की कथा का अत्यंत महत्वपून, प्रेरणा दायक और दिव्य प्रसंग है. इसी अध्याय में
00:09पहली बार राम और उनके परम भक्त हनुमान का मिलन होता है. ये केवल एक भेंट नहीं, बलकि भक्ती, सेवा
00:16और दिव्य संबंध की श�
00:29बढ़ रहे थे. उनकी आखों में पीडा थी, पर उनके हिरदय में द्रड संकल्प भी था. किसी भी प्रकार से
00:36सीता को ढूंड़ना है.
00:38रिश्य मूख परवत की ओर
00:41कबंध के मार्ग दर्शन और शबरी के आशीरवात के बाद वे रिश्य मूख परवत की ओर बढ़े. ये स्थान वानरों
00:48का क्षेत्र था. यहीं पर वानर राज सुग्रीव अपने कुछ विश्वासी साथियों के साथ रह रहा था. सुग्रीव का भै
00:55सुग्रीव अपने भाई बाली से भैभीत था. बाली ने उसे राज्य से निकाल दिया था और उसकी पतनी को भी
01:02छीन लिया था. इसलिए सुग्रीव हर अजनबी से डरता था. राम और लक्षमन को देखना. एक दिन सुग्रीव ने दूर
01:10से दो तेजस्वी पुरुषों को
01:11आते देखा. वे थे राम और लक्षमन. उनके हाथों में धनुषबान थे और उनके चहरे पर दिब्य आभा थी. सुग्रीव
01:19की चिंता. सुग्रीव घबरा गया. उसने सोचा, ये दोनों अवश्य ही बाली के भेजे हुए योद्धा है. हनुमान को भेजना.
01:28सुग्रीव �
01:29अपने सबसे बुद्धिमान और विश्वास पात्र सेवक हनुमान को बुलाया. उसने कहा, हनुमान, तुम जाकर पता करो कि ये कौन
01:36है. यदि ये शत्रु हैं, तो हमें सावधान रहना होगा. हनुमान का रूप परिवर्तन. हनुमान अत्यंत बुद्धिमान थे. उन्हों
01:58हैं. आपका तेज असाधारण है. आप इस घनेवन में किस उद्धेश्य से आए हैं? हनुमान की वानी. हनुमान की वानी
02:06अत्यंत मधुर और ज्यान पूर्ण थी. उनकी भाशा शुद्ध, स्पष्ट और प्रभावशाली थी. राम उनके शब्दों से अत्यंत प्रभावि
02:26हैं. हनुमान का हरिदय परिवर्तन. राम के शब्द सुनते ही हनुमान का हरिदय भक्ती से भर गया. उन्होंने तुरंत पहचान
02:34लिया. ये कोई साधारण मनुष्य नहीं है. असली रूप में आना. हनुमान ने अपना साधू रूप त्याग दिया और अपने
02:41वानर रूप
02:41में आ गये. उन्होंने राम के चरणों में गिरकर प्रणाम किया. भक्ती की शुरुवात. हनुमान ने कहा, प्रभू, मैं आपका
02:49सेवक हूँ. आपकी सेवा करना ही मेरा धर्म है. राम का सनेह. राम ने हनुमान को उठा कर गले लगा
02:56लिया. ये क्षण अत्यंत भावुक औ
03:10आपकी सहायता कर सकते हैं. वे भी अपने भाई बाली से पीडित हैं. राम की सहमती. राम ने हनुमान का
03:17प्रस्ताव स्वेकार किया. अब वे सुग्रीव से मिलने के लिए तयार थे. नई मित्रता की शुरुवात. इस प्रकार राम और
03:25हनुमान की पहली भेट हुई. ये के�
03:27किवल एक मिलन नहीं था. ये भक्ती और भगवान के बीच एक अटूट संबंध की शुरुवात थी.
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