00:00अरण्यकांड का अध्याय 48 रामायन की कथा में एक अत्यंत नाटकिये मोड लाता है।
00:06इसी प्रसंग से आगे चलकर वो घटनाय शुरू होती हैं, जो अंततह रावन और राम के महान युद्ध तक पहुंचती
00:12हैं।
00:12इस अध्याय में शूर्पन खा का आगमन होता है और उसका सामना राम तथा लक्षमन से होता है, जबकि सीता
00:18भी इस घटना की साक्षी बनती हैं।
00:20ये सब घटनाय वनस्थली पंचवटी में घटित होती हैं।
00:24अरण्यकांड अध्याय 48 शूर्पन खा का आगमन और राम लक्षमन से उसका सामना।
00:30पंचवटी का वन उस समय अत्यंत शांत और सुन्दर दिखाई देता था।
00:34गोदावरी नदी के किनारे स्थित यह स्थान प्रकृती की अध्भुत सुन्दरता से भरा हुआ था।
00:39चारों ओर हरे भरे व्रिक्ष थे जिन पर रंग बिरंगे पक्षी चहकते रहते थे।
00:44वहीं एक साधारन कुटिया में राम, सीता और लक्षमन अपना वनवास व्यतीत कर रहे थे।
00:49उनका जीवन अत्यंत सरल और शांत था।
00:52सुभ होते ही राम नदी के तटपर सनान करते।
00:54सीता वन से फूल और फल एकत्र करती।
00:57और लक्षमन कुटिया की विवस्था तथा सुरक्षा में लगे रहते।
01:00कुछ समय तक उनका जीवन इसी प्रकार शांती से चलता रहा।
01:04लेकिन वन के अंधकार में एक ऐसी घटना छिपी हुई थी,
01:07जो जल्द ही इस शांती को भंग करने वाली थी।
01:39राक्षसी शूर्पन खा।
02:02राक्षसी होने के कारण वो अपने रूप को बदल सकती थी।
02:05रूप परिवर्तन।
02:06कुछी क्षणों में उसने अपना कुरूप रूप त्याग दिया और एक सुन्दर स्त्री का रूप धारन कर लिया।
02:11अब वो अत्यंत आकर्षक दिखाई दे रही थी।
02:13वो धीरे-धीरे राम के पास पहुँची।
02:16राम से प्रस्ताव।
02:17शूरपन खाने मुस्कुराते हुए राम से कहा।
02:20हे सुन्दर पुरुष आप कौन है।
02:22राम ने शांत स्वर में उत्तर दिया।
02:24मैं अयोध्या के राजा दशरत का पुत्र राम हूँ।
02:27फिर राम ने सीता की ओर संकेत करते हुए कहा।
02:30ये मेरी पतनी सीता है।
03:16लक्षमन के पास जाना।
03:46लक्षमन का प्रहार।
03:47प्रिशेश रूप से रावन से आने वाले तूफान की शुरुवात।
03:51शूर्पन खाके इस अपमान ने आगे चलकर रामायन की सबसे बड़ी घटनाओं को जन दिया।
04:02लक्षमन की शुरुवात।
Comments