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  • 1 week ago
रामायण अयोध्या कांड — अध्याय 34 l Ramayana: Ayodhya Kanda — Chapter 34.

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00:00अयोध्या कांड का अध्याय 34 अत्यंत भावनात्मक और भक्त से भरा हुआ प्रसंग है. इसमें भरत अपने बड़े भाई राम
00:08को वापिस अयोध्या लाने के लिए चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं. उनके साथ पूरी अयोध्या की प्रजा, मंत्री, गुरु
00:16और वि
00:29स्थान और विशाल सेना का साथ. राजा दश्रत के दिहांत के बाद अयोध्या नगरी शोक में डूबी हुई थी. लोगों
00:37के हरदय में केवल एक ही इच्छा थी. राम वापिस अयोध्या लोटाएं. जब लोगों को ये पता चला कि भरत
00:45स्वयम वन जाकर राम को वापिस �
00:47लाने वाले हैं, तो पूरे राज्य में आशा की किरन जाग उठी. भरत का द्रढ निश्चय. भरत ने राजसभा में
00:54उपस्थित सभी मंत्रियों और गुरुजनों के सामने कहा. अयोध्या का सिंगासन केवल राम भाईया का है. मैं उन्हें वापिस लाने
01:03के लिए स्वयम �
01:04चित्रकूट जाऊंगा. उनकी आवाज में द्रढ और प्रेम दोनों जलक रहे थे. गुरु वशिष्ट का समर्थन. अयोध्या के महान गुरु
01:13वशिष्ट भी वहाँ उपस्थित थे. उन्होंने भरत की बात सुन कर कहा. पुत्र, तुम्हारा विचार धर्म के अनुकूल
01:20है. उन्होंने पूरी सभा को भरत के साथ जाने का आदेश दिया. यात्रा की तैयारी. कुछ ही समय में अयोध्या
01:28में यात्रा की तैयारी शुरू हो गई. हाथियों, घोलों और रथों की लंबी कतारें तैयार होने लगी. मंत्री, सैनिक, सेवक
01:37और नागरिक सब इस यात्र
01:50और उन्हें वापिस लाने की आशा से भरत के साथ चल पड़ी. विशाल यात्रा. कुछ ही समय में एक विशाल
01:58यात्रा अयोध्या से निकल पड़ी. आगे आगे भरत और उनके छोटे भाई शत्रुगन चल रहे थे. उनके पीछे हाथियों, घोडों
02:06और रथों की लंबी प
02:20के लिए चल पड़ी. लेकिन इस यात्रा का उदेशी युद्ध नहीं था. ये यात्रा प्रेम और भक्त की यात्रा थी.
02:28भरत का मन. यात्रा के दौरान भरत का मन बार-बार राम को याद कर रहा था. वे सोचते, राम
02:35भाईया इस समय वन में कैसे रह रहे होंगे? सीता भा�
03:04अशा की किरण
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