00:00अयोध्या कांड का अध्याय 38 रामायंड के सबसे मार्मिक और भावनात्मक प्रसंगों में से एक है। इस अध्याय में भरत
00:09और उनके बड़े भाई राम का चित्रकूट में अत्यंत भावुक मिलन होता है। ये मिलन केवल दो भाईयों का मिलन
00:16नहीं, बलकि प्रेम, धर्म औ
00:19और त्याग की महान गाथा का प्रतीक है। अयोध्या कांड अध्याय 38 भरत और राम का भावनात्मक मिलन वन की
00:29शांत वादियों में उस दिन भातावरण कुछ अलग था। चारों ओर हर्याली फैली हुई थी और चित्रकूट के परवत सूरे
00:37की किर्णों से चमक रहे थे।
00:39इसी पवित्र स्थान पर एक छूटी सी कुटिया में राम, सीता और लक्षमण निवास कर रहे थे। कुछ दूरी पर
00:47अचानक एक विशाल समूह के आने की आहट सुनाई देने लगी। लक्षमण की शंका। सबसे पहले इस आहट को लक्षमण
00:55ने सुना। उन्होंने दू
01:09कहा, कहीं ये भरत तो नहीं जो अयोग्या का राज्य सुरक्षित करने के लिए हमें मारने आ रहा हो।
01:39उनका हृदय भावनाओं से भर गया। उन्होंने दूर से ही राम को देखा। वन के साधारन वस्त्रों में राम खड़े
01:46थे। भरत का विलाप। राम को देखते ही भरत स्वयम को संभाल नहीं पाए। वे दोड़ते हुए राम की ओर
01:53बढ़े और उनके चरणों में गिर प
02:09उनकी आखें भी आसुओं से भर गई। उन्होंने कहा भरत इसमें तुम्हारा कोई दोश नहीं है। तुम सदैव धर्म के
02:16मार्ग पर चलने वाले हो। भाईयों का मिलन। दोनों भाईयों का ये मिलन इतना भावुक था कि वहां उपस्थित सभी
02:23लोग रो पड़े। शत्
02:38पिता का सम्मान। राम की पतनी सीता ने भी सभी माताओं के चरण स्पर्ष किये। माताओं ने उन्हें आशीरवात दिया।
02:46कुछ समय बाद भरत ने राम को ये दुखत समाचार दिया कि पिता दशरत अब इस संसार में नहीं रहे।
02:53ये सुनकर राम अत्यंत दुखी हो ग�
02:55उनकी आखों से आसू बहने लगे।
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