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रामायण अयोध्या कांड — अध्याय 36 l Ramayana: Ayodhya Kanda — Chapter 36.
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00:00अयोध्याकांड का अध्याय 36, अत्यन्त भावनात्मक और भक्ती से भरा हुआ प्रसंग है. इसमें भरत अपने बड़े भाई राम की
00:09खोज में गंगा नदी को पार करके आगे चित्रकूट की ओर बढ़ते हैं. ये अध्याय, प्रेम, पश्चाताप और भाईचारे की
00:17गहरी
00:18भावनाओं से भरा हुआ है. अयोध्याकांड, अध्याय 36, भरत का गंगा पार करना और चित्रकूट की ओर आगे बढ़ना. वन
00:28के शांत वातावरण में सुभह का समय था. गंगा का पवित्र जल सूर्य की किरणों से चमक रहा था. ये
00:36वही स्थान था जहां कुछ समय पहल
00:38राम, सीता और लक्ष्मन ने गंगा पार की थी. अब उसी स्थान पर भरत अपनी विशाल, सेना और अयोध्या की
00:45प्रजा के साथ पहुँचे थे. भरत का व्याकुल हिर्दै भरत का हिर्दै अत्यंत व्याकुल था. हरक्षन उनके मन में यही
00:54विचार आता कि राम भहिया इ
01:08निशाद राजगुह की सहायता
01:09राम की प्रियमित्र निशाद राजगुह भी भरत के साथ थे. उन्होंने भरत से कहा, राजकुमार, राम इसी मार्क से आगे
01:18गए थे. मैं आपको वही रास्ता दिखाऊंगा.
01:49गंगा पार करने की तैयारी
01:51हे मा गंगा, मुझे अपने भाई राम से मिलवा दीजिये. मुझे उनके चरणों में गिरकर क्षमा मांगनी है.
02:11गंगा पार
02:12पूरा दल गंगा के दूसरे तट पर पहुँच गया.
02:15वन की ओर यात्रा
02:17गंगा पार करने के बाद यात्रा और कठिन हो गई. अब मार्ग घने जंगलों और पहाडियों से होकर गुजरता था.
02:24लेकिन भरत का मन केवल एक ही लक्ष पर केंद्रित था. राम से मिलना.
02:31रास्ते में स्मृतियां
02:32रास्ते में कई स्थान ऐसे आये जहां राम पहले ठहरे थे.
02:37निशाद राजगुह उन स्थानों को दिखाते हुए कहते.
02:40यहां राम ने विश्राम किया था.
02:42यहां उन्होंने सीता और लक्षमन के साथ भोजन किया था.
02:46यह सुनकर भरत का हिर्दय और भी दुख से भर जाता.
02:50चित्रकूट की ओर
02:51जैसे जैसे वे आगे बढ़ते गए,
02:53चित्रकूट के परवत धीरे-धीरे दिखाई देने लगे.
02:56वो स्थान जहां राम, सीता और लक्षमन इस समय निवास कर रहे थे.
03:01भरत का हिर्दय तेजी से धड़कने लगा.
03:04उन्हें लगा कि अब वो क्षण दूर नहीं जब वे अपने प्रिय भाई से मिलेंगे.
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