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भगवद गीता – अध्याय 41 गुणत्रय विभाग योग।Bhagavad Gita – Chapter 41 Gunatray Vibhag Yoga.
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Transcript
00:00अयोध्या कांड का अध्याय 41
00:02अयोध्या कांड का अत्यंत प्रेणा दायक और भावपूर्ण समापन प्रसंग माना जाता है।
00:08इसमें भारत अपने बड़े भाई राम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लोटते हैं और स्वयम राजा ना बनकर तपस्वी की
00:15तरह जीवन बिताने का निर्णे लेते हैं।
00:17ये प्रसंग त्याग, विनम्रता और सच्चे धर्म का महान उधारन प्रस्तुत करता है।
00:47ये उनके प्रेम और भक्ती का प्रमान था।
00:51भावुक विदाई
00:52जब विदाई का शन आया, तो भरत ने एक बार फिर राम के चरणों में प्रणाम किया।
00:58उनकी आँखों से आंसु बह रहे थे।
01:00उन्होंने कहा, भाईया, मैं चौधे वर्षों तक आपकी प्रतीक्षा करूंगा।
01:05अयोध्या आपका ही राज्य है।
01:07राम ने प्रेम से भरत को उठाया और उन्हें गले लगाया।
01:11चित्रकूट से प्रस्थान।
01:13इसके बाद भरत ने गुरुजनों और माताओं के साथ चित्रकूट से वापस अयोध्या की और यात्रा शुरू की।
01:19उनके साथ अयोध्या की विशाल सेना और प्रजा भी थी।
01:22लेकिन अब यात्रा का उद्देश्य अलग था।
01:25वे राम को वापस लाने नहीं, बलकि उनकी पादुकाओं को राज्य का प्रतीक बना कर लोट रहे थे।
01:33जब ये विशाल समुहू वापस अयोध्या पहुँचा, तो लोगों की आँखों में आसू थे।
01:37उन्हें पता चल गया कि राम अभी 14 वर्षों तक वापस नहीं आएंगे, लेकिन उन्हें यह भी संतोश था कि
01:44भरत राम के नाम पर राज्य चलाएंगे।
01:49राज सभा में एक विशेश समारो आयोजित किया गया।
01:52उस समारो में भरत ने राम की पवित्र पादुकाओं को सिनहासन पर स्थापित किया।
01:57यह द्रिश्य अत्यंत अध्भुप था।
01:59सिनहासन पर पादुकाएं थी और भरत स्वयम उनके सेवक के रूप में खड़े थे।
02:04नंदी ग्राम का निर्ने।
02:05भरत ने एक और महान निर्ने लिया।
02:08उन्होंने कहा, मैं अयोध्या के राजमहल में नहीं रहूंगा।
02:11इसके बजाए, वे नंदी ग्राम में रहने लगे।
02:15तपस्वी जीवन
02:16नंदी ग्राम में भरत ने राजकुमार की तरह नहीं, बलकि एक तपस्वी की तरह जीवन बिताया.
02:21उन्होंने साधारन वस्त्र पहने, वे भूमी पर सोते थे.
02:25उनका जीवन पूरी तरह से राम की सेवा और प्रतीक्षा में बीतने लगा.
02:29चौधे वर्षों की प्रतीक्षा, हर दिन भरत राम की वापसी की प्रतीक्षा करते थे, उनके मन में केवल एक ही
02:36विचार रहता, जब चौधे वर्ष पूरे होंगे, तब राम वापस अयोध्या आएंगे.
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