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रामायण बाल कांड – अध्याय 1lRamayana Bala Kand – Chapter 1
#Ramayan

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Transcript
00:00Rāmāyana ke Bāl Kāndh ka pahla adhyāy, pūri rām kathā ki shuruwaat hai.
00:04Is mein Maharshi Vālmi ki, aur Devarshi Nāradh ke bīc iek athiyant mehtwapoon saamvād hootas hai.
00:10Isi saamvād se, Bhagwān Rām ki mahan kathā ka bīc boya jata hai.
00:15Nīče is adhyāy ka bhoat vistrit aur vistar pūrn varnan dya gya hai.
00:20Bāl Kāndh, adhyāy 1
00:23Vālmi ki, aur nāradh ka saamvād, vistrit varnan
00:27बहुत प्राचीन Kāl ki bāt hai.
00:29उस समय पृतvī पर अनेक रिशी मुनी तप और साधना में लीन रहते थे.
00:33वे जंगलों में आश्रम बना कर रहते थे और अपना जीवन ग्यान, तपस्या और धर्म के पालन में बिताते थे.
00:41ऐसे ही महान रिशियों में से एक थे महर्शी वाल्मी की.
00:44उनका आश्रम घने वन के बीच एक शांत और पवित्र स्थान पर स्थित था.
00:48आश्रम के चारों ओर उचे उचे व्रिक्ष थे, जिनकी शाखाओं पर पक्षी मधुर्स्वर में गाते रहते थे.
00:54पास ही एक निर्मल नदी बहती थी, जिसका जल अत्यंत पवित्र और शीतल था.
00:59आश्रम का वातावरण अत्यंत शांत और अध्यात्मिक था.
01:03वहां हर समय वेदों की ध्वनी गुंचती रहती थी.
01:06कई शिश्य वहां रहेकर वेद, उपनिशद और धर्मशास्त्रों का अध्यन करते थे.
01:10महर्शी वालमीकी स्वयम, अत्यंत महान तपस्वी, विद्वान और करुणा मेरिशी थे.
01:16उन्होंने अपने जीवन को सत्य, धर्म और ज्ञान की खोज में समर्पित कर दिया था.
01:21वालमीकी का चिंतन
01:23एक दिन प्राता काल का समय था.
01:26सूर्य की किरणे धीरे धीरे जंगल के व्रिक्षों के बीच से निकल कर धर्ती को प्रकाशित कर रही थी.
01:32महर्शी वालमीकी अपने आश्रम के बाहर बैठे थे.
01:35उनका मन गहरे विचारों में डूबा हुआ था.
01:37वे संसार के बारे में सोच रहे थे.
01:42उन्होंने अपने जीवन में अनेक प्रकार के लोगों को देखा था.
01:45कुछ बहुत वीर थे, कुछ अत्यंत ग्यानी थे,
01:48कुछ दयालू थे और कुछ धर्म के मार्क पर चलने वाले थे.
01:51लेकिन उनके मन में एक प्रश्न बार-बार उठ रहा था.
01:54वे सोच रहे थे, क्या इस संसार में कोई ऐसा मनुष्य है,
01:58जिसमें सभी श्रेष्ट गुण एक साथ हूँ?
02:01उन्होंने सोचा, क्या कोई ऐसा व्यक्ती है जो सत्यवादी हो,
02:05जो धर्म का पालन करने वाला हो,
02:07जो कृतग्य हो और दूसरों की भलाई चाहता हो,
02:10जो शक्तिशाली और वीर हो, लेकिन फिर भी विनम्र हो.
02:13महर्शी वाल्मी की जानते थे कि ऐसे गुण अलग-अलग लोगों में मिल सकते हैं,
02:17लेकिन क्या कोई ऐसा मनुष्य है, जिसमें ये सभी गुण एक साथ हो?
02:21ये प्रश्ण उनके मन में गहराई से बैठ गया था.
02:25नारद का दिव्य आगमन
02:27उसी समय अचानक आकाश में एक मधुर ध्वनी सुनाई दी.
02:30वो वीना की ध्वनी थी. अत्यंत मधुर, शांत और दिव्य.
02:35ये ध्वनी देवर्शी नारद की थी.
02:37देवर्शी नारद तीनों लोकों में भ्रमन करने वाले महान रिशी थे.
02:40वे देवताओं, रिशियों और मनुष्यों के बीच संदेश पहुँचाते थे और भगवान का नाम गाते हुए संसार में घूमते रहते
02:47थे.
02:48उनके हाथ में वीना रहती थी और उनके मुख पर सदैव प्रसन्नता और दिव्यता जलकती थी.
02:53धीरे धीरे वे वालमीकी के आश्रम की ओर उतरने लगे.
02:56जब महर्शी वालमीकी ने उन्हें आते देखा, तो वे तुरंट उठ खड़े हुए.
03:00उन्होंने बड़े आदर और सम्मान के साथ नारत का स्वागत किया.
03:04अतिथी सतकार
03:07वालमीकी ने नारत को आश्रम में अमंत्रित किया.
03:09उन्होंने उन्हें एक पवित्र आसन दिया और उनके चरणों का सम्मान पूर्वक्स पर्ष किया.
03:14फिर उन्होंने शिश्यों से कहा कि वे अतिथी के लिए जल और फल लेकर आएं.
03:17नारत बड़े प्रेम से मुस्कुराते हुए आसन पर बैठ गए.
03:21वालमीकी ने विनम्रता से कहा,
03:23हे देवर्षी, आपका हमारे आश्रम में स्वागत है.
03:26आपके आगमन से ये स्थान धन्य हो गया है.
03:29नारत ने उत्तर दिया,
03:31हे महर्षी, आपका आश्रम स्वयम ही पवित्र है.
03:34यहाँ धर्म और ज्ञान का वास है.
03:37दोनों रिशी कुछ समय तक धर्म, ज्ञान और संसार के विशयों पर चर्चा करते रहे.
03:42वालमीकी का महान प्रश्न
03:43कुछ समय बाद वालमीकी ने अपने मन में उठ रहे प्रश्न को नारत के सामने रखा.
03:49उन्होंने कहा,
03:50हे देवर्षी, आप तीनों लोकों में ब्रह्मन करते हैं.
03:54आप देवताओं, रिशियों और मनुष्यों के बारे में सब जानते हैं.
03:58इसलिए मैं आप से एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछना चाहता हूँ.
04:02नारत ने मुस्कुराकर कहा,
04:04पूछिये महर्शी,
04:06तब वालमीकी ने कहा,
04:07क्या इस संसार में कोई ऐसा मनुष्य है,
04:10जो सभी श्रेष्ट गुणों से युक्त हो,
04:13फिर उन्होंने एक-एक करके उन गुणों का वर्णन किया.
04:16क्या कोई ऐसा व्यक्ति है जो सत्यवादी हो,
04:20धर्म का पालन करने वाला हो,
04:22कृतग्य हो,
04:24द्रिड संकल्प वाला हो,
04:25प्रजा के हित की चिंता करने वाला हो?
04:28वालमीकी ने आगे पूछा,
04:30क्या कोई ऐसा पुरुष है जो विद्वान हो,
04:33सुन्दर हो,
04:34आत्म सन्यमी हो,
04:36क्रोध को जीत चुका हो,
04:37और दूसरों के प्रति दयालू हो,
04:40उनका प्रश्ण वास्तव में एक आदर्श मानव की खोज था.
04:44नारद का उत्तर,
04:46वालमीकी के प्रश्ण को सुनकर,
04:48नारद कुछ क्षण तक शान्त रहे.
04:50फिर उन्होंने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा,
04:53हे महर्शी,
04:54आपने जिन गुणों का वर्णन किया है,
04:57वे सभी गुण किसी एक मनुष्य में मिलना अत्यंत दुरलब है.
05:01लेकिन प्रित्वी पर एक ऐसा पुरुष है,
05:03जिसमें ये सभी गुण विद्ध्यमान है.
05:06वालमीकी की आँखों में उत्सुकता चमक उठी.
05:09उन्होंने तुरंथ पूछा,
05:11वह कौन है?
05:12तब नारद ने कहा,
05:13वह पुरुष एक श्वाकु वंच में जन्मा है और उसका नाम है राम.
05:18राम के गुणों का वर्णन
05:20इसके बाद नारद ने राम के गुणों का विस्तार से वर्णन किया.
05:25उन्होंने कहा,
05:26राम अत्यंत तेजस्वी, पराक्रमी और धर्मात्मा है.
05:31उनका शरीर बल्वान है और उनकी भुजाएं लंबी हैं.
05:34उनका चेहरा चंद्रमा की तरह शांत और तेजस्वी है.
05:38वे वेदों और शास्त्रों के महान ग्याता हैं.
05:42उन्हें युद्धकला, राजनीती और धर्म का गहरा ग्यान है.
05:46राम अपने पिता की आज्या का पालन करने वाले आदर्श पुत्र हैं.
05:50वे अपने भाईयों से अत्यंत प्रेम करते हैं और अपनी प्रजा का पालन एक पिता की तरह करते हैं.
05:56राम कभी क्रोध के वश में नहीं होते.
05:59वे अत्यंत धैर्यवान और दयालू हैं.
06:02Rām कथा का संग्षेप
06:04इसके बाद नारद ने Rām की जीवन की पूरी कथा का संग्षेप में वर्णन किया
06:09उन्होंने बताया कि कैसे Rām का जन्म अयोध्या में हुआ
06:13कैसे उन्होंने अपने पिता की आज्या का पालन करते हुए
06:17वनवास स्विकार किया
06:19ROKSHAS RAJAH RAVANH nэ nэ unki PATNi Sita kaa APAHARN kia
06:22aur Ant may Rau nэ Rau nэ Rau nga VADH kardke
06:25DHARM kki Sthapna ki
06:28VALM Hindi kyi ye kathah sun kar Atiyanth Prabhavith huyay
06:30Unnke Hriday mein Rau ke mahán Chariitr kете Perti
06:34Ghehrasamman aur bhakti utpann ho gai
06:37RAMAYAN ki prerana
06:39Jab NARAD wahaan se chalay gai
06:40tab VALM Hindi ki lamday samey tak
06:42usi vishay mein soseosh de raha
06:44Rau ka Aadarsh Chariitr
06:46unnke man man ghehrai se bhas gaya tha
06:48They can claim that they will be recognized as an example of the ugly
06:53So they will be known as the rages of the rages of the rages
06:57These thinking of the fire seems to be called ramyan
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