00:00Now we will start with the Uttar-Kandka-Charmotkarsh, Adhyaay 88.
00:04This is the Uttar-Kandka-Antim-Vanwas-Tapasya,
00:08Raam-Ka-Adarsh-Nitrtv, Antim-Satya-Nyay,
00:12Jannataka-Anubhav,
00:13Rama-Ka-Bhaagwána-Vishnu-RooP-MemeloTna.
00:15This is the Uttar-Kandka-Antim-Vanwas-Tapasya-Ram-Ka-Adarsh-Vishnu-RooP-MemeloTna.
00:20This is the Uttar-Kandka-Adhyaay 88,
00:23Uttar-Kandka-Adhyaay 88,
00:41।
01:00आध्यात्मिक साधना
01:01दिन रात यग्य, प्रार्थना और ध्यान में व्यतीत
01:04उनका हरिदय केवल राम, धर्म और सत्य में लगा रहा
01:08कठिनाईयों और अकेलेपन के बावजूद उनका आत्मबल अडिक था
01:13जनता और समाज का प्रतीक
01:15उनकी तपस्या केवल व्यक्तिगत परिक्षा नहीं थी
01:18ये सत्य, धर्म और आदर्ष जीवन का संदेश पूरे समाज के लिए था
01:22राम का आदर्ष नेत्रित्व
01:24राम अयोध्या में शासन करते हुए लगातार धर्म और न्याय की स्थापना में लगे रहे
01:29जनता की जरूरतों को पूरा करना, सैनिकों और वानर सेना का सम्मान, सामाजिक समरस्ता और नीती का पालन
01:36कठिन निर्णे लेने में भी हमेशा सत्य और प्रीम को सर्वोच रखना
01:40राम का आदर्श ने तृत्व ये दिखाता है कि सत्ता का सही उप्योग केवल समाज और धर्म की भलाई के
01:47लिए होना चाहिए
01:48जनता का अनुभव
01:49अयोध्या की जनता ने इस समय दो भावनाओं का अनुभव किया
01:53आनंद और गर्व
01:54राम राज्य की स्थापना ने उन्हें सुरक्षा और सम्रिद्धी दी
01:57युद्ध और संघर्ष का अंत होने के बाद शांती ने नगर को खुश्यों से भर दिया
02:02शोक और चिंता
02:04सीता का वनवास और कठिन परिस्थ दिया
02:06उनके प्रती समाज में मिश्रित भावनाएं
02:09जनतार राम के निर्णय को समझने की कोशिश कर रही थी
02:12रिशियों और तपस्वियों का मार्गदर्षन
02:14वन में कई रिशी और तपस्वी रहते थे
02:17उन्होंने सीता की तपस्या और धर्म प्रियता का सम्मान किया
02:21उनका मार्गदर्शन केवल वनवास के लिए नहीं, बलकि आध्यात्मिक और सामाजिक आदर्श का प्रतीक बन गया।
02:27रिशियों ने सीता को जीवन के उच्चितम सिधानतों और तपस्या के मार्ग पर प्रेरित किया।
02:32सीता का अंतिम संगष। सीता ने वन में अनुभव किया। अकेलापन और प्राकृतिक बाधाएं। भूकंप, तूफान और जंगली जीवों की
02:41चुनोतिया। कठिन परिस्थितियों में भी उनका मन अडिग रहा। उनकी तपस्या और भक्ती इस बात का प्रतीक थी कि सच्�
02:48धर्म और सत्य कभी नश्ट नहीं होता। राम का दिव्यद्रिष्टि कोण। राम ने ये देखा कि उनका जीवन केवल व्यक्तिगत
02:55प्रेम का नहीं, बलकि समाज, धर्म और आदर्श का प्रतीक है। उन्होंने सीता के वनवास को समझा और उसके प्रती
03:01असीम प्रेम और स
03:14पस्या और राम के आदर्श नेतरित्व की कथा को जन मानस में प्रचारित किया। ये केवल कथा नहीं, बलकि धर्म,
03:20सत्य और नियाय का शिकुर।