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रामायण: युद्ध कांड - अध्याय 81 l Ramayana: Yuddha Kanda — Chapter 81.
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Transcript
00:00युद्ध कांड का अध्याय 81, अत्यंत निर्णायक, वीरता से परिपून और धर्म की विजय की दिशा में एक बड़ा कदम
00:08है.
00:08यहां मेघनात का अंतिम युद्ध होता है और अंततह लक्षमन द्वारा उसका वध किया जाता है.
00:14यह अध्याय केवल एक युद्धा की हार नहीं, बलकि अहंकार, माया और अधर्म के पतन का प्रतीक है.
00:22युद्ध कांड अध्याय इक्यासी मेघनात का अंतिम युद्ध और लक्षमन द्वारा उसका वध कुम्भकर्ण के वध के बाद लंका में
00:31शूक और भाय का वातावरण था.
00:34रावन के मन में क्रोध की अगनी और भी प्रज्वलित हो गई थी.
00:37रावन का निर्णै. रावन ने सूचा, अब मेरे पास केवल एक ही आशाशेश है. मेघनाद. मेघनाद का संकल्प. मेघनाद अपने
00:48पिता के सामने आया. उसकी आखों में क्रोध और प्रतिशोध की ज्वाला थी. उसने कहा, मैं इस युद्ध का अंत
00:56कर दूँगा. यग्
01:05का महत्व. यदि ये यग्य पून हो जाता, तो मेघनाद अजेय हो जाता. विभीशन की सूचना. ये बात विभीशन को
01:14पता चल गई. राम को सूचना. विभीशन ने तुरंत राम को ये जानकारी दी. योजना. राम ने कहा, इस यग्य
01:22को किसी भी स्थिती में पूरा नही
01:24होने देना है. लक्षमन का चयन. इस कारे के लिए चुना गया लक्षमन को हनुमान का साथ. लक्षमन के साथ
01:32हनुमान और विभीशन भी गए गुप्त स्थान. वे सभी उस स्थान पर पहुँचे, जहां मेघनाद यग्य कर रहा था. यग्य
01:40में विग्ण. जैसे ही लक्षम
01:53अब वहां एक भयंकर युद्ध आरंब हुआ. लक्षमन और मेघनाद आमने सामने थे. मायावी युद्ध. मेघनाद ने अपनी माया का
02:03प्रयोग किया. अद्रिश्य होकर आक्रमन, भ्रमुत्पन करना, अनेक रूप धारण करना. लक्षमन का धैर्य. लेकिन लक्षमन ने
02:22दूर रखा. विभीशन का मार्गदर्शन. विभीशन ने मेघनाद की कमजोरियां बताई, जिससे लक्षमन को सहायता मिली. निरनायक युद्ध. अब युद्ध
02:32अपने चरम पर था. बानों की वर्षा, गर्जनाएं और तीव्र आक्रमन, मेघनाद की शक्ति. मेघनाद �
02:40पूरी शक्ति लगा दी. लेकिन अब उसका यग्य अधूरा था. लक्षमन का प्रहार. लक्षमन ने एक शक्तिशाली बान चलाया. अंत.
02:50वो बान सीधा मेघनाद को लगा. और उसका वध हो गया. युद्ध का प्रभाव. मेघनाद की गिरते ही राक्षस सेना
02:59में भय फैल
03:00गया. वानर सेना में उत्साह जा गया. रावन का दुख. जब रावन को अपने पुत्र की मृत्यू का समाचार मिला,
03:07तो वो शोक और क्रोध से भर गया. अंतिम संघर्ष की तैयारी. अब ये स्पष्ठ था. अंतिम युद्ध निकट है.
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