00:00Here is the question of Yudh Kandka's Adhyaya 84, Ramka's Ayodhya-Lotna and Rajabhishek,
00:07Atiyanth-Vistrit, Bhaavnath-Mak and Gehen-Vivran ke saath.
00:11This is the question of Yudh Kandka's Adhyaya 84, Ramka's Ayodhya-Lotna and Rajabhishek.
00:22Lanka के विनाश, रावन का वध, मेघनात और कुम्भकर्ण के पराक्रम का अंत और सीता की अगनी परीक्षा के बाद
00:30राम और उनकी सेना अयोध्या की ओर लोट रहे थे.
00:33ये केवल एक यात्रा नहीं थी, बलकि धर्म की विजय, न्याय की प्रतिष्ठा और आदर्ष नेत्रित्व की स्थापना की ओर
00:41एक एतिहासिक कदम था.
00:44अयोध्या की तैयारी
00:46अयोध्या की नगरवासी और राजा के मंत्री सभी अपने प्रिय राजा की प्रतिक्षा में थे.
00:51नगर के द्वारों पर फूलों से सजावट, संगीत और धोलक की गूंज,
00:56सभी लोग राम के स्वागत के लिए उत्साहित, युवाओं और बच्चों के चहरों पर आनंद और गर्व की चमक थी.
01:03भरत की प्रतिक्रिया
01:04भरत जो अब नंदिग राम में तपस्या कर रहे थे, ने भी अपने मन में निर्णे लिया.
01:09मैं राम की चरण पादुका को लेकर राज्य संभाल रहा था, लेकिन अब राम के आने का समय आ गया
01:15है.
01:16भरत अपने रत में बैठे और अयोध्या की ओर चल पड़े.
01:20वानर सेना का उत्सव
01:21वानर सेना, जिन्होंने राम के साथ लंका तक संघर्ष किया, अब अयोध्या की ओर लोट रही थी.
01:27अंगद और हनुमान अपनी वीर्ता का वर्णन कर रहे थे.
01:31सभी वानर उत्सा और गर्व से भरे हुए थे.
01:33हर दिशा में जैकार और जैश्री राम के उद्गोश.
01:37राम का प्रवेश
01:38राम, लक्ष्मन और सीता के साथ अयोध्या पहुँचे.
01:42उनके कदमों की धोनी से नगर गूंज उठा.
01:45लोगों की आखों में आसू थे, लेकिन हर्ष और आनंद के.
01:49राम के शांत, दार्शनिक और दिव्वे स्वरूप को देख कर सभी मंत्र मुग्ध थे.
01:55जनता का स्वागत
01:56नगर के सभी लोग, पुरुष, महिलाएं, बच्चे, सजधज कर निकले.
02:00फूल बरसाए गए, ढोल नगाडों की आवाज से अयोध्या का वातावरन दिव्वे हो गया.
02:05राम की आखों में भी हलका भावुक भाव था.
02:08लोगों का प्रेम और सम्मान देख कर उनका मन आनंदित हुआ.
02:13भरत का मिलन
02:14भरत ने चरण पादुका के माध्यम से राम का स्वागत किया.
02:18उसने आदर और श्रद्धा के साथ कहा,
02:20मेरा शासन केवल आपके चरण पादुका के लिए था.
02:23लेकिन अब आप स्वयम अयोध्या लोट आए हैं.
02:26राम ने उसे गले लगाया,
02:28और शांती और भाईचारे का प्रतीक बनाया.
02:31राज्याभिशक की तैयारी
02:32अयोध्या में राज्याभिशेक की तैयारी प्रारंब हुई.
02:35नगर को सूविवस्थित किया गया.
02:37मंत्रियों और राज परिवार ने आयोजन संभाला.
02:44Sita का स्थान
02:45Sita को राम के बगल में रखा गया
02:47उनका स्थान केवल पत्नी के रूप में नहीं
02:49बलकि धर्म और मर्यादा की प्रतीक के रूप में सम्मानित किया गया
02:56सूर्य की किर्णों से आयोध्या स्वरनिम दिखाई दी
02:58राम के सिर पर मुकुट रखा गया
03:00दिव्य गान और मंत्रों से वातावरन पवित्र हो गया
03:04जनता की जैकार ने नगर को गूंजित कर दिया
03:07राम का संदेश
03:08राज्या भीशेक के उपरांत राम ने अपने प्रजा को संबोधित किया
03:12धर्म और न्याय का पालन
03:14मेरा शासन केवल आपके हित के लिए होगा
03:17धर्म, सत्य और न्याय मेरे राज्य की नीव होंगे
03:20सत्य और प्रेम का आदर्श
03:22सत्य के मार्ग पर चलो
03:24सत्य हमेशा विजय प्राप्त करता है
03:26समाज का संगठित विकास
03:28सबका कल्यान मेरा उद्देश्य है
03:31गरीब और अमीर सभी के लिए न्याय समान रहेगा
03:34जनता की प्रतिक्रिया
03:36नगरवासी आनंदित हुए
03:37बच्चे और व्रिद्ध सभी राम के चारों और एकठे हुए
03:41वानर और सेना भी सम्मानित हुए
03:43ये केवल एक राज्या भिशेक नहीं
03:45बलकि सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक बन गया
03:48राम राज्य की स्थापना
03:50राम ने समाज, धर्म और नीती की आधार शिला रखी
03:53उनका राज्य राम राज्य के रूप में इतिहास में दर्ज हुआ
03:57ये राज्य केवल शक्ती और धन के लिए नहीं
03:59बलकि धर्म और न्याय के लिए प्रसिद्ध हुआ
04:03भावनात्मक गहराई
04:04इस अंतिम अध्याय में भावनाओं का संगम है
04:07युद्ध की थकान और विजय का आनंद
04:09भाई-भाई का मिलन
04:11पत्नी और पती का पुनर मिलन
04:13जनता का हुट्सह और सम्मान
04:15धर्म और न्याय का अडिगादर्श
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