00:00युद्ध कांड का अध्याय 89, अत्यंत रह सिमय, रोमान्चक और संकट से भरा हुआ प्रसंग है। यहां मेगनाद अपनी मायावी
00:09शक्तियों का प्रयोग करके युद्ध को एक नया और भयावह रूप देता है, जिससे स्वयम राम और लक्षमन भी गंभीर
00:16संकट में पढ�
00:18अध्याय दिखाता है कि सिल्फ बल नहीं, बलकि माया और रननीती भी युद्ध का सुरूप बदल सकती है। युद्ध कांड
00:25अध्याय 89, मेगनाद का मायावी युद्ध और राम लक्षमन पर संकट। लंका के युद्ध का दूसरा दिन प्रारम हो चुका
00:33था। सूर्य की
00:46अहंकार अभी भी अटल था। उसने सोचा, अब समय है मेरे सबसे शक्तिशाली युद्ध को भेजने का। मेगनाद का प्रवेश।
00:55रावन ने अपने पुत्र मेगनाद को युद्ध भूमी में भेजा। अध्भुत शक्ती। मेगनाद केवल बलशाली ही नहीं था, वो मा
01:03आवी था, वो अदृश्य हो सकता था और दिव्य अस्त्रों का ग्याता था। युद्ध का आरंब। मेगनाद ने आते ही
01:11युद्ध का स्वरूब बदल दिया, उसने आकाश में अदृश्य होकर बानों की वर्षा शुरू कर दी और वानर सेना को
01:18भ्रमित कर दीया। वानर
01:39अब मेगनाद ने सीधे राम और लक्ष्मन को लक्ष बनाया।
01:50अचानक मेगनाद ने एक भयानक अस्थ का प्रयोग किया।
01:53नागपाश, बंधन, नागपाश के प्रभाव से राम और लक्ष्मन सर्पों के बंधन में जकड़ गए।
02:00संकट, अब दोनों महान योध्धा भूमी पर गिर पड़े, वे हिल भी नहीं पा रहे थे।
02:05बानर सेना की निराशा, ये द्रिश्य देखकर पूरी वानर सेना स्तब्ध रह गई, उनके मन में भय और निराशा पहल
02:12गई, कि अब क्या होगा।
02:14रावन की प्रसन्नता, उधर लंका में रावन अत्यंत प्रसन्न था, अब राम और लक्ष्मन पराजित हो चुके हैं।
02:36युद्ध भूमी का वातावरण, युद्ध भूमी में अब एक अजीब सा सन्नाटा था, वानर दुखी थे, राक्षस प्रसन्न थे, और
02:43स्थिती गंभीर थी, जामवान की बुद्धी, तभी जामवान ने धैरे बनाए रखा, आशा की किरण, उन्होंने कहा, ये अंत नह
03:03आते ही सभी सर्प भाग गये, नाग पाश का प्रभाव समाप्थ हो गया, राम लक्ष्मन मुक्त, राम और लक्ष्मन धीरे
03:11धीरे उठ खड़े हुए, वानरों में उत्साह, ये देखकर वानर सेना में पुनह उत्साह बर गया, मेघनाद का पीछे हटना,
03:18मेघनाद ये दे
03:20भूमी से पीछे हट गया नया संकल्प अब राम ने कहा ये युद्ध आसान नहीं है लेकिन हम विजय प्राप्त
03:28करेंगे
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