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रामायण: युद्ध कांड - अध्याय 75 l Ramayana: Yuddha Kanda — Chapter 75.
#mahabharat

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00:00युद्ध कांड का अध्याय 75 रामायन का अत्यंत महतुपून, एतिहासिक और निरनायक प्रसंग है।
00:06यहां से कथा अपने चरम की ओर बढ़ती है, जहां धर्म और अधर्म का अंतिम संगर्ष आरंब होने वाला है।
00:13इस अध्याय में राम अपनी विशाल वानर सेना के साथ समुद्र तट पर पहुँचते हैं और लंका जाने के लिए
00:20सेतु निर्मान का निर्णय लेते हैं।
00:22युद्ध कांड अध्याय 75. समुद्र तटपर राम की सेना और सेतु निर्माण का निर्णै.
00:29हनुमान द्वारा सीता माता का समाचार मिलने के बाद, राम का हिर्दय अब केवल एक ही संकल्प से भरा था.
00:35लंका जाकर सीता का उध्धार करना. सेना का प्रस्थान.
00:39सुग्रीव ने तुरंत अपनी विशाल वानर सेना को तैयार किया.
00:43लाखों वानर, रीच और योध्धा, राम की नेत्रतु में लंका की और प्रस्थान करने लगे.
00:49उत्साह और संकल्प. सेना में अद्भुद उत्साह था.
00:52हरवानर के मन में एक ही उद्देश था. सीता माता को मुक्त कराना.
00:57मार्ग की कठिनाई.
00:59वनों, परवतों और नदियों को पार करते हुए, ये विशाल सेना धीरे-धीरे समुद्र तट तक पहुँची.
01:05समुद्र का दर्शन.
01:07जब राम समुद्र के किनारे पहुँचे, तो उन्होंने एक विशाल और अताह जलराशी को देखा.
01:12लहरे गर्जना कर रही थी.
01:14जल अनंत तक फैला था.
01:16और पार कहीं दूर लंका स्थित थी.
01:19नई चुनौती.
01:20राम ने सोचा, इस समुद्र को कैसे पार किया जाए?
01:23ये एक बहुत बड़ी चुनौती थी.
01:26सेना की चिंता.
01:27वानर सेना भी चिंतित हो गई.
01:29इतने विशाल समुद्र को पार करना सरल नहीं था.
01:32विचार विमर्ष.
01:34राम ने अपने साथियों से सलाह ली.
01:36लक्षमन, हनुमान, जामबान और अन्य सभी वीरों ने अपने अपने विचार रखे.
01:42विमीशन का आगमन.
01:43तब ही आकाश से एक तेजस्वी व्यक्तित्व वहां उत्रा.
01:46वो था विभीशन.
01:48शरण आगती.
01:49विभीशन ने राम के सामने आकर कहा,
01:52मैं रावन का भाई हूँ,
01:53लेकिन उसके अधर्म से असंतुष्ट हूँ.
01:55मैं आपकी शरण में आया हूँ.
01:57सेना में संदे है.
01:59कुछ वानरों को संदे है हुआ.
02:01ये शत्रू का भाई है.
02:02इस पर कैसे विश्वास किया जाए?
02:04राम का निर्णय.
02:05राम ने शांत स्वर में कहा,
02:07जो मेरी शरण में आता है,
02:09मैं उसे स्वीकार करता हूँ.
02:11विभीशन का स्वागत.
02:13राम ने विभीशन को अपना मित्र बना लिया.
02:16महतोपूर्ण जानकारी.
02:17विभीशन ने लंका की स्थिती और रावन की शक्ती के बारे में महतोपूर्ण जानकारी दी.
02:22समुद्र से प्रार्थना.
02:24अब राम ने समुद्र से मार्ग देने की प्रार्थना करने का निश्चे किया.
02:28तीन दिन की तपस्या.
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02:54was
02:55Rām ne apna dhanush uđthaya,
02:57Samudr me uthal puthal maç gai.
02:58Leheren teiz ho gai.
03:00Devta bhi chintit ho uđthe.
03:02Samudrdev ka prakat ho na.
03:03Tabhi Samudrdev swayam prakat huye.
03:06Samudrdev
03:06Vinamr Nivedan
03:08Samudrdev ne hath jod kar kaha
03:10He Rām,
03:11mein prakrati ke niyamu se bandha huu.
03:13Mein swayam marg nahi dee sakta.
03:16Samadhan
03:16Unhohu nne kaaha
03:17Aap apni sena ke saath seetu bana kar
03:20Is samudr ko par kar sakti hain.
03:22Nal aur nil ka ul lek
03:23Samudrdev nne bataya
03:25Aapki sena me nal aur nil namak varnar hain.
03:28Vishish shakti
03:29Unhohu nne kaaha
03:30Unhke pats yhe shakti hai
03:32Khi vhe patharon ko jal per tairnay yogi bana sakti hain.
03:35Setu nirman ka nirnay
03:36Yhe sunkar Rām nne nirnay liya
03:38Hum samudr par setu banaayenge
03:40Utsah ka sanchar
03:42Yhe nirnay sunkar puri sena me
03:44Utsah ki leher dođ gai
03:45Kareka aramb
03:47Nal aur nil ki nitratu me
03:49Varnar ho nne pathar, vriksh aur parvat laa kar
03:52Samudr mei ndalna šuruu kiya
03:53Adbhud drish
03:54Yhe drish atyant adbhud tha
03:57Vishal pathar jal per tair rahe thay
03:59Varnar puri shakti se kare kar rahe thay
04:01Aur dhere dhere
04:02Ek setu ban raha tha
04:04Rām ka nirikshan
04:05Rām yhe sab dhekkar prasand ho rahe thay
04:08Unki aankho mei vishwaas aur vijay ki chamak thi
04:10Vijay ki yor
04:12Pehla qadam
04:13Yhe setu keval patharon ka nahi tha
04:15Yhe tha sankalp, vishwaas aur
04:17Sahyog ka pratik
04:19Rām ka nirikshan
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