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  • 2 days ago
रामायण: युद्ध कांड - अध्याय 76 l Ramayana: Yuddha Kanda — Chapter 76.

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Transcript
00:00युद्ध कांड का अध्याय 76 भव्यता, परिश्रम, संगठन और दिव्य संकल्प का अध्भुत्चित्र प्रस्तुत करता है।
00:08यहां राम की सेना समुद्र पर राम सेतु का निर्मान करती है।
00:11एक ऐसा कार्य जो इतिहास, आस्था और पराक्रम का प्रतीक बन जाता है।
00:41नल और नील ने।
00:44दिव्यक्षमता, इन दोनों वानरों के पास अध्भुत्च शक्ती थी, वे जिस पत्थर को छूते, वो जल पर तैरने लगता।
00:52कार्य का प्रारंब, वानर सेना ने पूरे उत्साह के साथ कार्य शुरू किया।
00:57कुछ वानर परवत तोड़ कर ला रहे थे, कुछ विशाल व्रिक्ष उखाड रहे थे, कुछ पत्थरों को समुद्र में डाल
01:03रहे थे।
01:05सामुहिक प्रयास, ये केवल निर्माण नहीं था, ये था सहयोग और एकता का अद्भुत उधारन।
01:12राम नाम की महिमा, जब पत्थरों पर राम का नाम लिखा जाता, तो वे और भी द्रड़ता से जल पर
01:18तैर थे।
01:19अद्भुत द्रिश्य, समुद्र पर धीरे धीरे एक मार्ग बनने लगा, लहरे शांत होने लगी, पत्थर एक के उपर एक जमने
01:27लगे और सेतु आकार लेने लगा।
01:30सेना का उत्साह, हर वानर के मन में उत्साह था, हम इतिहास रच रहे हैं।
01:36हनुमान की भूमिका, हनुमान स्वयम इस कार्य में जुटे हुए थे, वे बड़े-बड़े परवत उठा कर ला रहे थे।
01:44जामवान की प्रेरणा, जामवान सभी को प्रेरित कर रहे थे, धैरे रखो, ये कार्य अवश्य पूर्ण होगा।
01:52सुग्रीम का नित्रित्व, सुग्रीव पूरी सेना का संचालन कर रहे थे।
01:57विभीशन की सहायता, विभीशन लंका के बारे में मार्गदर्शन दे रहे थे, ताकि आगे की रणनीती बनाई जा सके।
02:05दिन रात का परिश्रम, वानर सेना दिन रात भिना रुके काम कर रही थी, न ठकान, न विश्राम, केवल लक्ष्य।
02:14सेतु का विस्तार, धीरे धीरे सेतु समुद्र के एक छोर से दूसरे छोर तक फैलने लगा।
02:21प्रकृती का सहयोग, ऐसा प्रतीत हो रहा था मानों प्रकृती भी इस कार्य में सहयोग दे रही हो।
02:27पांच दिन में निर्मान, कुछ ही दिनों में विशाल समुद्र पर एक अध्भुत सेतु तैयार हो गया।
02:34राम का निरीक्षण, राम ने सेतु को देखा और प्रसन्न हुए, उनकी आँखों में संतोश और विश्वास जलक रहा था।
02:43एतिहासिक्षण, ये केवल एक पुल नहीं था, ये था विश्वास का प्रतीक, भक्ती का परिणाम और विजय का मार्ग।
02:51सेना का प्रस्थान, अब समय था लंका की ओर प्रस्थान का।
02:56अग्रिम पंक्ती, सबसे आगे थे हनुमान, अंगद और अन्य वीरवानर।
03:02मध्य में राम, सेना के मध्य में राम और लक्षमड थे।
03:07पीछे का सुरक्षा दल, पीछे से सेना की रक्षा कर रहे थे अन्य वानर और योध्धा
03:13सेतु पर यात्रा, सेना धीरे-धीरे सेतु पर आगे बढ़ने लगी
03:17समुद्र के उपर चलना, लहरों का नीचे बहना और विजय की ओर कदम बढ़ाना
03:23उत्साह और गर्जना, वानर सेना जैकार कर रही थी, जैश्री राम
03:30लंका का निकट आना, जैसे जैसे वे आगे बढ़ते गए, लंका निकट आती गई
03:36युद्ध की तैयारी, अब सभी के मन में एक ही विचार था, युद्ध निकट है
03:42राम का संकल्प, राम ने मन ही मन संकल्प लिया, मैं सीता को मुक्त कराऊंगा और अधरम का अंत करूंगा
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