00:00सुन्दर कांड का अध्याय 71, रामायन का सबसे भावनात्मक, भक्ति से परिपून और रिदय को छू लेने वाला प्रसंग है.
00:09यहां हनुमान पहली बार सीधे सीता से समबाद करते हैं, और उन्हें राम का संदेश और उनकी अंगूठी प्रदान करते
00:16हैं.
00:16यह अध्याय आशा, विश्वास, प्रेम और भक्ति का दिव्य संगम है.
00:22सुन्दर कांड अध्याय 71, हनुमान का सीता से समबाद और राम की अंगूठी देना.
00:28अशोक वाटिका में रात का समय था, चारों और शान्ती थी, लेकिन उस शान्ती के भीतर सीता के रिधय की
00:36पीड़ा गूँज रही थी.
00:38हनुमान की चिंता, व्रिक्ष पर बैठे हनुमान सीता की स्थिती देखकर अत्यंत व्याकुल थे.
00:43उन्होंने सोचा, मुझे माता को ये विश्वास दिलाना होगा के मैं राम का दूथ हूँ.
00:49सही समय का चैन.
00:51हनुमान ने प्रतीक्षा की, जब तक की राक्षसियां सो नहीं गई.
00:55जब चारों ओर पूर्ण शान्ती चा गई, तब उन्होंने धीरे धीरे अपना कार्य आरंब किया.
01:01राम कथा का गान.
01:02हनुमान ने व्रिक्ष पर बैठकर मधुर स्वर में राम की कथा गाना शुरू किया.
01:07राम का जन्म, उनका वनवास, सीता हरण और उनकी खोज.
01:13सीता का आश्चर्य.
01:14ये कथा सुनकर सीता चकित हो गई.
01:17उन्होंने सोचा, ये कौन है जो राम की कथा इतनी मधुर्ता से गा रहा है.
01:22हनुमान का प्रकट होना.
01:23हनुमान धीरे धीरे व्रिक्ष से नीचे उतरे.
01:26उन्होंने विनम्रता से सीता के सामने हाथ जोड कर कहा
01:29माता, मैं राम का दूथ हूँ
01:32संदेह
01:32सीता को पहले विश्वास नहीं हुआ
01:35उन्होंने सोचा, ये रावन की कोई चाल भी हो सकती है
01:38प्रमान
01:39हनुमान ने तुरंत राम द्वारा दी गई अंगूठी प्रस्तुत की
01:44अंगूठी का महत्व
01:45जब सीता ने वो अंगूठी देखी, तो उनकी आखों में आसु आ गए
01:49उन्होंने उसे अपने रिदय से लगा लिया
01:51विश्वास
01:52अब उन्हें विश्वास हो गया
01:54ये वास्तव में राम का दूथ है
01:57भावनात्मक्षण
01:58सीता रो पड़ी
01:59उन्होंने कहा, राम कैसे हैं?
02:01क्या वे मुझे याद करते हैं?
02:03हनुमान का उत्तर
02:04हनुमान ने कहा, प्रभु राम हर क्षण आपका स्मरण करते हैं
02:09वे आपको मुक्त कराने के लिए व्याकुल है
02:11सीता का दुख
02:12सीता ने अपने दुख को व्यक्त किया
02:15मैं यहां अत्यंत कष्ट में हूँ
02:17रावन मुझे बार-बार धमकाता है
02:19हनुमान का प्रस्ताओ
02:21हनुमान ने कहा, माता
02:23यदि आप चाहे तो मैं अभी आपको
02:25अपने कंधों पर बैठा कर यहां से ले जा सकता हूँ
02:27सीता का उत्तर
02:29सीता ने विनम्रता से मना कर दिया
02:31ये उचित नहीं होगा
02:32राम स्वयम आकर मुझे मुक्त करेंगे
02:35धैर्य और विश्वास
02:37सीता ने अपने धैर्य और विश्वास को बनाये रखा
02:40चूडा मडी का प्रदान
02:41सीता ने अपनी चूडा मडी उतार कर हनुमान को दी
02:44संदेश
02:45उन्होंने कहा, इसे राम को देना
02:48ये मेरा संदेश और मेरा विश्वास है
02:50हनुमान की भक्ती
03:06अब सीता के रिदय में आशा की एक नई किरण जाग उठी थी
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