00:00सुन्दरकांड का अध्याय 73, रामायन का अत्यांत प्रसिद्ध, रोमांचक और वीर्ता से ओत प्रोत प्रसंग है.
00:06यहां हनुमान को रावन के दर्बार में प्रस्तुत किया जाता है,
00:10जहां उनका साहस, बुद्धी और धर्म के प्रती अडिक निष्ठा पूरे विश्व के सामने प्रकट होती है.
00:16यही वो अध्याय है जिसमें लंका दहन जैसा एतिहासिक और दिव्य प्रसंग घटित होता है.
00:22सुन्दरकांड अध्याय तिहत्तर
00:23रावन के दर्बार में हनुमान और लंका दहन
00:27राक्षसों द्वारा बांधे जाने के बाद भी हनुमान के चहरे पर न भय था न चिंता,
00:32वे शांत, स्थिर और आत्मविश्वास से भरे हुए थे.
00:36रावन का दर्बार
00:37हनुमान को रावन के भव्वे दर्बार में ले जाया गया.
00:40वो दर्बार अत्यंत विशाल और वैभवशाली था.
00:43सोने के सिंघासन, रतनों से सजी दीवारें, शक्तिशाली राक्षसों की उपस्थिती.
00:48उस सिंघासन पर बैठा था रावन.
00:51रावन का सुरूप
00:52रावन अत्यन तेजस्वी और प्रभावशाली था.
00:55दस मुख, बीस भुजाएं और अद्भुत आभा.
00:59उसकी व्यक्तित्व में शक्ति और एहंकार दोनों स्पष्ट जलक रहे थे.
01:03प्रथम समवाद
01:03रावन ने हनुमान को देखा और क्रोधित होकर पूछा.
01:07कौन हो तुम?
01:08और मेरी लंका में उत्पात मचाने का साहस कैसे किया?
01:11हनुमान का उत्तर
01:12हनुमान ने निर्भीख होकर उत्तर दिया.
01:15मैं प्रभु राम का दूथ हूँ
01:16और सीता माता की खोज में यहां आया हूँ.
01:19राम का संदेश
01:20हनुमान ने आगे कहा
01:28। । । । ।
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