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  • 3 days ago
रामायण: युद्ध कांड - अध्याय 85 l Ramayana: Yuddha Kanda — Chapter 85.

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00:01ुत्तर कांड रामायण का अंतिम कांड है, जिसमें राम का अयोध्या में शासन, भरत और लक्षमन की भक्ती, सीता की
00:10कठनाईया और अंतिमें राम का भगवान विश्नु रूप में वापस जाना जैसे अत्यंत गहन और भावनात्मक प्रसंग शामिल हैं. इसे
00:18में बहुत व
00:18इस्त्रित और भावनात्मक रूप में प्रस्तुत गर रहा हूँ. उत्तर कांड अध्याय पचासी राम का अयोध्या में शासन और आदर्श
00:27शासन की स्थापना अयोध्या जो अब राम राज्य की स्थापना के बाद अत्यंत सुन्दर और समरिध हो गई थी, उस
00:35नगर में
00:35सभी ओर खुशी और संतोश का माहौल था. नगर के गलियों में हर जगा दीप जल रहे थे. नागरिक अपने
00:42राजा के आदर्श शासन का आनंद ले रहे थे. छोटे बच्चे, राम के चित्र और मूर्तियां अपने घरों में सजाकर
00:49उसकी पूजा कर रहे थे. वानर और अ
01:05अमीर, साधू और साधारन नागरिक सभी को न्याय समान मिला. किसी भी प्रकार का अन्याय या अत्याचार नगर में सहन
01:13नहीं किया जाता था. जनता में विश्वास और प्रीम का वातावरन बन गया. राम ने अपने मंत्रियों और प्रजा से
01:19कहा, मेरे राज्य में केवल ध
02:04
02:34अब नगर में अपनी भूमिका निभा रही थी।
03:04पराक्रम के बारे में कहानिया सुनकर प्रेरित हो रहे थे।
03:05पराज्य कहा गया जो सत्य और न्याय का प्रतीक बन गया।
03:09मंत्रियों और प्रजा का अनुभाव।
03:10प्रतीक मंत्री राम की नीती और आदेशों के अनुसार कारे करता।
03:14प्रजा को अपने राजा पर गर्व था।
03:17नागरिकों में शान्ती, प्रेम और समरस्ता का अनुभाव होता था।
03:21व्रिध और युवाओं सभी ने राम को आदर्श और दिव्यनेता माना।
03:27उत्तरकांड का ये पहला अध्याय केवल शासन की शुरुवात नहीं है।
03:30ये राम के सत्य, प्रेम और धर्म पर आधारित जीवन दर्शन का परिचायक है।
03:35युद्ध की थकान और संघर्ष के बाद ये अध्याय शांटी और आदर्श राज्य की स्थापना का प्रतीक है।
03:41राम और सीता के मिलन की खुशियां, लक्ष्मण और भरत की भक्ती और जनता का आदर सभी मिलकर ये अध्याय
03:48भावनात्मक गहराई प्रदान करता है।

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