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  • 2 days ago
रामायण: सुंदर कांड -अध्याय 74 l Ramayana: Sundara Kanda – Chapter 74.

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00:00सुन्दर कांड का अध्याय 74, विजय, भक्ती, प्रेम और संदेश के पूर्ण होने का अत्यंत भावनात्मक और गौरव पूर्ण प्रसंग
00:09है.
00:09यहां हनुमान अपने महानकारे को सफलता पूर्वक पूर्ण करके लोठते हैं और राम को सीता का संदेश देते हैं.
00:16यह अध्याय सफलता की पराकाश्था और भक्ती की पूर्णता का अध्भत चित्र है. सुन्दर कांड अध्याय 74, हनुमान की वापसी,
00:25वानरों से मिलन और राम को सीता का संदेश देना.
00:29लंका देहन के बाद अब हनुमान का कार्य पूर्ण हो चुका था. उन्होंने सीता माता को आश्वस्त किया था. रावन
00:36को चेतावनी दे दी थी और लंका की शक्ती का आँकलन भी कर लिया था. अब समय था वापसी का.
00:43समुद्र की और प्रस्थान
00:45हनुमान अशोक वाटिका से निकल कर तेजी से समुद्र की और बढ़े. उनके हिर्दय में अपार आनंद था. क्योंकि वे
00:51अपने प्रभू के कारे में सफल हो चुके थे.
00:54पुनह विशाल रूप
00:55समुद्र तट पर पहुँच कर हनुमान ने पुनह अपना विशाल रूप धारण किया. उन्होंने एक बार फिर आकाश की और
01:03देखा और पूरे उत्साह के साथ छलांग लगा दी.
01:06विजई उडान
01:07अब उनकी उडान पहले से भी अधिक तेज और उत्साह पूर्ण थी. इस बार वे केवल खोज करता नहीं थे.
01:14वे विजेता थे.
01:15मन में प्रसन्नता
01:17हनुमान के मन में एक ही विचार था. अब मैं प्रभू राम को ये शुब समाचार दूँगा. वानरों के पास
01:23पहुँचना
01:23कुछी समय में वे उस थान पर पहुँचे जहां वानर दल उनकी प्रतीक्षा कर रहा था. वहां अंगद, जामवान और
01:31अन्यवानर उपस्थित थे. उत्साह का विस्फोट
01:34हनुमान को सुरक्षित लोटते देख सभी वानर अत्यंत प्रसन्न हो गए. वे हर्शोलास से भर उठे. समाचार
01:41हनुमान में कहा, मैंने सीता माका को देख लिया है. आनंद और राहत
01:46ये सुनकर सभी वानरों के हिर्दे में अपार आनंद छा गया. उनकी आँखों में खुशी के आंसु आ गए. संपूर्ण
01:53कथा
01:54हनुमान ने विस्तार से सब कुछ बताया. लंका का वर्णन, रावन का व्यवहार, सीता की स्थिती और लंका देहन. सब
02:02का सम्मान
02:03जामवान ने हनुमान की प्रशंसा की. तुमने असंभव को संभव कर दिया. वापसी का निर्ने. अब सभी वानरों ने निश्चे
02:11किया, हमें तुरंत राम के पास जाना चाहिए. मार्ग में आनंद. सभी वानर खुशी-खुशी किश्किंधा की ओर चल पड़े.
02:18उनके मन म
02:19केवल एक ही उत्साह था. राम को ये शुब समाचार देना. मधुवन में उत्सव. रास्ते मेवे सुग्रीव के प्रिय उपवन
02:27मधुवन में पहुँचे. उत्सव का द्रिश्य. खुशी में वानरों ने वहां फल खाय, आनंद मनाया और उत्सव किया. दूतों की
02:35सूचना
02:35मधुवन के रक्षकों ने ये समाचार सुग्रीव को दिया. सुग्रीव की प्रसन्नता. सुग्रीव समझ गया. यदि वानर इतना आनंद मना
02:44रहे हैं, तो अवश्य ही कार्य सफल हुआ है. राम के पास पहुँचना. कुछी समय बाद सभी वानर राम और
02:50लक्षमन के पास �
02:52हनुमान का प्रणाम. हनुमान ने राम के चरणों में गिर कर प्रणाम किया. शुब समाचार. उन्होंने कहा, प्रभू, मैंने सीता
03:00माता को देख लिया है. राम की प्रतिक्रिया. ये सुनकर राम की आँखों में आसू आ गए, लिकिन ये दुख
03:06के नहीं, बलकि आनंद के �
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