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रामायण अयोध्या कांड — अध्याय 31 l Ramayana: Ayodhya Kanda — Chapter 31.
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00:00अयोध्या कांड का अध्याय 31 रामायन का अत्यंत करुण और हर्दय विदारक प्रसंग है। इसमें अयोध्या के महराज दशरत अपने
00:08प्रिय पुत्र राम के वियोग को सहन नहीं कर पाते और अंततह उनका देहांत हो जाता है। ये अध्याय पिता
00:15के प्रीम, पश्चाताप
00:17और वचन की पीडा को अत्यंत भावनात्मक रूप से प्रस्तुत करता है। अयोध्या कांड अध्याय 31 अयोध्या में दशरत का
00:25शोक और मृत्यू। अयोध्या नगरी जो कभी उत्सव और आनंद से भरी रहती थी, अब गहरे शोक में डूबी हुई
00:32थी। सडकों पर सन्न
00:35राज महल के भीतर भी वही उदासी और दुख का वातावरन था। जिस नगरी में कुछी दिन पहले राम के
00:40राज्य भिशेक की तयारी हो रही थी। वहाँ अब केवल आसू और विलाप की ध्वनी सुनाई दे रही थी। दशरत
00:47का दुख। राज महल के भीतर राजा दशर
01:04राम की याद दशरत को राम का बचपन याद आने लगा। उन्हें याद आया कि कैसे छोटा राम उनके पास
01:10दौड कर आता था। उनके चरणों में बैठता था और उनसे प्रेम पूर्वक बातें करता था। राम का वो सनेहिल
01:17चहरा उनकी आँखों के सामने घूमने लगा
01:19राजा का हरदय तूट कया। कोशल्या का दुख। राम की माता कोशल्या भी अत्यंत दुखी थी। वे दशरत के पास
01:27बैठी थी और उनके आंसु थम नहीं रहे थे। उन्होंने कहा, महाराज, राम के बिना ये महल सूना हो गया
01:34है। उनके शब्दों में गहरा दर्द था
01:37कैकई की स्थिती। उधर कैकई भी अब अपने निरने पर पच्चताने लगी थी। जब उन्होंने देखा कि पूरा राज्य दुखी
01:44है और राजा दशरत तूट चुके हैं तो उनका हिरदय भी व्याकुल हो ठा लेकिन अब बहुत देर हो चुकी
01:50थी। पुरानी घटना क
01:51याद। दशरत को अपने युवावस्था की एक घटना याद आने लगी। उन्होंने बताया कि एक बारवे शिकार के लिए बन
01:58में गए थे। अंधेरे में उन्हें ऐसा लगा कि कोई पशु पानी पी रहा है। उन्होंने बिना देखे ही तीर
02:03चला दिया। लेकिन वो को�
02:07वक था श्रवण कुमार। श्रवण कुमार की मृत्यू। तीर लगने से श्रवण कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। जब
02:14दशरत उसके पास पहुँचे तो उन्हें अपनी भयानक भूल का हैसास हुआ। श्रवण कुमार अपने व्रिध्ध माता-पिता के लिए
02:20
02:35अड़प रहे हैं। उसी प्रकार तुम्हें भी अपने पुत्र के व्योग में प्राण त्यागने होगे। ये उनका शाप था। शाप
02:42की पूर्ती। दशरत ने दौशल्या से कहा। आज वही शाप पूरा हो रहा है। मैं राम के व्योग को सहन
02:48नहीं कर पा रहा हूँ। �
03:03कुछी क्षणों बाद उनका शरीर शांत हो गया। राजा दशरत इस संसार से विदा हो चुकी थे। अयोध्या का विलाप।
03:11राजा के देहांत का समाचार पूरे अयोध्या में फैल गया। पूरा नगर शोक में डूब गया। लोग रोने लगे। अयोध्या
03:18ने अपने �
03:19प्रिय और धर्म प्रिय राजा को खो दिया था।
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