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  • 4 hours ago
रामायण बाल कांड – अध्याय 14 l Ramayana Bala Kand – Chapter 14.

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00:00रामायन के बालकांड का अध्याय 14 एक अत्यंत नाटकिये और महत्वपून प्रसंग है. परशुराम और राम का सामना. इस घटना
00:10में भगवान राम का सामना महान योध्धा और भगवान परशुराम से होता है. ये प्रसंग राम की दिव्य शक्ती और
00:17उनके भविश्य के मह
00:19राम कार्यों का संकेत देता है. बालकांड अध्याय 14 परशुराम और राम का सामना. मिथिला नगरी में राम और सीता
00:29का भव्य विवाह संपन्न हो चुका था. चारों भाईयों का विवाह होने के बाद राजा दशरत अपनी बारात के साथ
00:36अयोध्या लोटने की तैयारी कर
00:38रहे थे. मिथिला से विदाई का समय आया. राजा जनक ने अपनी पुत्रियों को भावुक रिदय से विदा किया. सीता,
00:45और मिला, मांडवी और शुत कीर्ती अपने पतियों के साथ अयोध्या की ओर चल पड़ी. मार्ग में अध्भुद घटना. अयोध्या
00:54लोटते समय ज
01:08परशुराम का आगमन. कुछी क्षणों में एक तेजस्वी और क्रोध से भरा हुआ तपस्वी वहां प्रकट हुआ. वे थे महान
01:16योध्धा और भगवान विश्नु के छठे अवतार परशुराम. उनके हाथ में एक विशाल धनुष था और उनके कंधे पर फरसा
01:23टंगा ह�
01:24उनका तेज इतना प्रबल था कि वहां उपस्थित सभी लोग भय और सम्मान से भर गए।
01:55उन्होंने विनम्रता से कहा, हे महर्शी, यदि कोई भूल हुई है तो कृप्या उसे क्षमा करें।
02:25राम ने सहजता से उस धनुष को उठाया और उस पर प्रत्यंचा चड़ा दी। ये देखकर परशुराम आश्चर्य चकेत रह
02:31गए। उन्होंने तुरंच समझ लिया कि राम कोई साधारन राजकुमार नहीं है।
02:36परशुराम का ज्यान परशुराम को ये आभास हो गया कि राम वास्तव में भगवान विश्णु के अवतार हैं। उन्होंने अपना
02:43क्रोध शांत किया। फिर उन्होंने राम की स्तुती की और उन्हें आशीरवाद दिया।
02:48विदाई। इसके बाद परशुराम वहां से प्रस्थान कर गए और तपस्या के लिए महेंद्र परवत की ओर चले गए। बारात
02:55फिर से अपनी यात्रा पर आगे बढ़ी।
02:58अयोध्या की ओर। कुछ समय बाद राजा दश्रत अपने पुत्रों और बहुओं के साथ अयोध्या पहुँच गए। पूरी अयोध्या नगरी
03:05ने उनका भव्य स्वागत किया। लोगों ने दीब जलाए और उत्सव मनाया।
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