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रामायण अयोध्या कांड — अध्याय 30 l Ramayana: Ayodhya Kanda — Chapter 30.
#Ramayan

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00:00अयोध्या कांड का अध्याय 30, अत्यंत शांत, आध्यात्मिक और भावनात्मक प्रसंग है। इस अध्याय में भगवान राम, माता सीता और
00:08लक्षमन पवित्र चित्रकूट में अपने वन जीवन की शुरुवात करते हैं और अनेक रिशी मुनियों से भेट करते हैं। ये
00:28
00:28सुबह का समय अत्यंत मनोहर होता था। पूर्व दिशा में उगते सूरी की सुनहरी किरणे, परवतों और व्रिक्षों पर पढ़ती
00:34तो पूरा वन स्वर्णिम प्रकाश से चमक उठता। चारो और पक्षियों का मधुर कलरव गूंचता और ठंडी हवा वातावरण को
00:41अत
00:55सुर्णिम प्रणाम करते। पर भगवान का स्मरन करते। फिर लक्ष्मन वन में जाकर फल, कंद और मूल इकठा करते। राम
01:05भी कभी-कभी उनके साथ जाते। सीता का वन जीवन। सीता ने भी वन जीवन को पूरी निश्ठा से स्विकार
01:11कर लिया था। वे कुटिया को सा�
01:40
01:43रिशी मुनी अक्सर राम के साथ धर्म और नीती की चर्चा करते
01:46वे उनसे पूछते
01:47हे राम, राजमहल का सुख छोड़ कर वनवास सुईकार करना क्या कठिन नहीं था
01:52राम मुस्कुरा कर उत्तर देते
01:53धर्म का पालन करना ही सबसे बड़ा सुख है
01:56लक्ष्मन की सेवा भावना
01:58पूरे समय लक्ष्मन अपने बड़े भाई की सेवा में लगे रहते
02:01वे कुटिया की रक्षा करते
02:02वन से भोजन लाते
02:04और हर प्रकार से राम और सीता की सहायता करते
02:06उनके हरदय में अपने भाई के प्रती अत्यंत प्रेम और सम्मान था
02:10चित्रकूट की प्रकृती
02:12चित्रकूट का वन अत्यंत सुन्दर था
02:14वहाँ बहते जरने, उचे परवत और हरे भरे व्रिक्ष थे
02:17कभी-कभी हिरणों के जुंड कोटिया के पास से गुजरते
02:20पक्षियों का मधुर संगीत पूरे वातावरण को जीवंत बना देता
02:24राम का संतोश
02:25राम उस शांत वातावरण में अत्यंत संतुष्ट दिखाई देते थे
02:28उन्होंने कहा, ये वन जीवन भले ही सरल है, लेकिन इसमें मन की शांती है
02:33चित्रकूट की सुन्दर्ता उनके हृदय को प्रसन कर देती थी
02:36रिशियों का आशिरवाद
02:37जब भी कोई रिशी उनसे मिलने आता, वो राम को आशिरवाद देता
02:41वे कहते, राम, तुम्हारा ये त्याग आने बाली पीढियों के लिए प्रेणा बनेगा
02:45राम बिनम्रता से उनका आशिरवाद स्विकार करते
02:48वन का शांत जीवन
02:49दिन बीटते गए, चित्रकूट में राम, सीता और लक्षमन का जीवन धीरे धीरिस्थिर हो गया
02:54वन का वातावरण, रिशियों का साथ और प्रकृति की शांती उनके जीवन को संतुलित बना रही थी
03:00लेकिन अयोध्या में इस समय गहरा शोक चाया हुआ था
03:03राजा दशरत अपने प्रियपुत्र के वियोग में अत्यंत दुखी थे
03:06ये घटना जन्धी एक बड़ी घटना का कारण बनने वाली थी
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