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  • 12 hours ago
रामायण अयोध्या कांड — अध्याय 16 l Ramayana: Ayodhya Kanda — Chapter 16.
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00:00अयोध्या कांड, अध्याय सोला, राम के राज्य विशेक की तैयारी
00:05अयोध्या नगरी उस समय संसार की सबसे सम्रिद्ध और सुन्दर नगरियों में से एक मानी जाती थी
00:12सर्यू नगी के तट पर स्थित ये नगरी, धर्म, संस्कृती और सम्रिद्धी का अध्भुत केंद्र थी
00:18यहां के राजा थे दशरत
00:21वे सूर्य वंश के माहान राजा थे और उनकी ख्याती चारों दिशाओं में फैली हुई थी
00:26वर्षों तक उन्होंने न्याय, धर्म और पराक्रम के साथ अपने राज्य का शासन किया
00:32लेकिन अब समय के साथ उनकी आयू बढ़ चुकी थी
00:35दशरत की चिंता
00:37राजा दशरत ने अपने जीवन में अनेक युद्ध लड़े थे और कई बार राज्य की रक्षा की थी
00:43लेकिन अब उन्हें महसूस होने लगा था कि वे व्रिद्ध हो रहे हैं
00:46उन्होंने सोचना शुरू किया
00:48अब समय आ गया है कि राज्य की जिम्मेदारी किसी योग्य व्यक्ती को सौप दी जाए
00:53उनके चार पुत्र थे
00:55राम, भरत, लक्ष्मन, शत्रुगन
00:59चारों पुत्र अत्यंत गुणवान और वीर थे
01:02लेकिन उनमें सबसे बड़े और सबसे योग्य थे राम
01:05राम का चरित्र
01:07राम केवल एक महान योधा ही नहीं थे
01:10वे विनम्र, धर्म प्रिय और न्याय प्रिय भी थे
01:13वे अपने माता-पिता की आज्या का हमेशा पालन करते थे
01:17प्रजा के प्रती उनका व्यवहार अत्यंत प्रेम पूर्ण था
01:21अयोध्या की लोग राम से अत्यंत प्रेम करते थे
01:24और उन्हें भविश्य का आदर्ष राजा मानते थे
01:27मंत्रियों की सभा
01:29एक दिन राजा दशरत ने अपने मंत्रियों और प्रमुख नागरिकों की सभा बुलाई
01:34इस सभा में राजगुरु वशिष्ट भी उपस्थित थे
01:37राजा दशरत ने सभा में कहा
01:40मैं अब व्रिद्ध हो चुका हूँ और चाहता हूँ कि मेरा जेश्ट पुत्र राम अयोध्या का राजा बने
01:45सभा में उपस्थित सभी लोग ये सुनकर अत्यंत प्रसन्न हो गए
01:49उन्होंने राजा के निर्ने का समर्थन किया
01:53जनता की खुशी
01:54जब ये समाचार अयोध्या की जनता तक पहुँचा तो पूरे नगर में उत्साह की लहर दोड़ गई
02:00लोगों ने कहा राम से बहतर राजा कोई नहीं हो सकता
02:03बाजारों में लोग मिठाईया बाटने लगे
02:06मंदिरों में भगवान के सामने दीप जलाए गए
02:10राज्यभिशेक की तैयारी
02:11राजा दशरत ने तुरंत राजयभिशेक की तैयारी शुरू करने का आदेश दिया
02:16गुरु वशिष्ट ने शुब मुहुर्त निर्धारित किया
02:19अयोध्या नगरी को सजाने का काम शुरू हो गया
02:21सडकों को साफ किया गया और जगा जगा फूलों की सजावट की गई
02:41चाहता हूं कि तुम आयोध्या के अगले राजा बनो
02:43राम ने अत्यंत विनम्रता से उत्तर दिया
02:46पिताश्री मैं आपकी आज्या का पालन करूँगा
02:49सीता की भूमिका
02:51जब ये समाचार सीता को मिला तो वे भी अत्यंत प्रसन्न होई
02:55उन्होंने भगवान से प्रार्थना की
02:57की राम का शासन अयोध्या के लिए सुख और सम्रिध्धी ले कर आए
03:01उत्सव का वातावरण
03:03पूरे अयोध्या में उत्सव जैसा माहौल था
03:06लोग नए वस्त्र पहन रहे थे
03:08नृत्य और संगीत का आयोजन हो रहा था
03:11सभी लोग राम के राज्यभिशक की प्रतीक्षा कर रहे थे
03:14आने वाला संकट
03:16लेकिन इस उत्सव और खुशी के बीच
03:18एक ऐसा घटना क्रम शुरू होने वाला था
03:20जो पूरे अयोध्या राज्य का भाग्य बदल देगा
03:23राजमहल के भीतर एक ऐसी योजना जन्म ले रही थी
03:26जो राम को वनवास की ओर ले जाएगी
03:29और यही घटना रामायन की कथा को एक नया
03:32और अत्यंत भावनात्मक मोड देने वाली थी
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